29 वर्ष की उम्र में दिव्यांका सिरोही के अचानक निधन से गहरा सदमा: विशेषज्ञों ने बताया युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं गंभीर हृदय रोग

29 वर्ष की उम्र में दिव्यांका सिरोही के अचानक निधन से गहरा सदमा: विशेषज्ञों ने बताया युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं गंभीर हृदय रोग

नई दिल्ली। महज 29 वर्ष की आयु में युवा प्रोफेशनल दिव्यांका सिरोही के अचानक और असामयिक निधन की खबर ने समाज, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और युवाओं को गहरे सदमे में डाल दिया है। इतनी कम उम्र में जीवन की डोर टूटने की इस स्तब्धकारी घटना ने एक बार फिर उस गंभीर खतरे की ओर ध्यान खींचा है, जिसे अक्सर युवा पीढ़ी 'उम्र का तकाजा नहीं' समझकर नजरअंदाज कर देती है—युवाओं में तेजी से बढ़ती गंभीर हृदय संबंधी समस्याएं (Cardiovascular Diseases)।

हाल के वर्षों में 20 से 35 वर्ष के युवाओं में अचानक कार्डियक अरेस्ट (Sudden Cardiac Arrest), साइलेंट हार्ट अटैक और गंभीर अतालता (Arrhythmia) के मामलों में खतरनाक बढ़ोतरी देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह धारणा अब पूरी तरह गलत साबित हो चुकी है कि दिल की बीमारियां केवल 50 या 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को ही प्रभावित करती हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, कॉर्पोरेट दबाव और अनियंत्रित दिनचर्या के चलते 20-30 की उम्र के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

युवाओं के दिल पर क्यों गहरा रहा है संकट: प्रमुख चिकित्सीय कारण

वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) के अनुसार, युवाओं में अचानक होने वाली गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं और मृत्यु के पीछे कई जैविक, आनुवंशिक और जीवनशैली से जुड़े कारण होते हैं:

  • हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (HCM): यह एक आनुवंशिक स्थिति है जिसमें हृदय की मांसपेशियां असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं, जिससे दिल के लिए रक्त पंप करना कठिन हो जाता है। अक्सर इसके कोई स्पष्ट बाहरी लक्षण नहीं दिखते और यह अत्यधिक शारीरिक तनाव या खेलकूद के दौरान अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती है।

  • कोरोनरी आर्टरी विसंगतियां और समय पूर्व एथेरोस्क्लेरोसिस: धमनियों की बनावट में जन्मजात असामान्यताएं या अत्यधिक तनाव और खराब आहार के कारण रक्त नलिकाओं में वसा (Plaque) का तेजी से जमना। कई बार यह प्लाक अचानक फट जाता है, जिससे तुरंत बड़ा रक्त का थक्का (Blood Clot) बनता है और धमनियां पूरी तरह ब्लॉक हो जाती हैं।

  • संक्रमण के बाद मायोकार्डिटिस (हृदय की सूजन): वायरल या रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन के बाद कई मामलों में हृदय की मांसपेशियों में सूजन (Myocarditis) आ जाती है। यदि इसका समय पर निदान न हो, तो यह दिल की धड़कन के संतुलन (Electrical Conduction) को बिगाड़ देती है, जिससे अचानक बेहोशी या मृत्यु हो सकती है।

  • लंबा क्यूटी सिंड्रोम और एरिथमिया: दिल की विद्युत प्रणाली (Electrical System) में गड़बड़ी, जिसके कारण दिल अचानक बहुत तेज या अनियमित रूप से धड़कने लगता है और सेकंडों में रक्त संचार रुक जाता है।

आधुनिक जीवनशैली के वो छिपे हुए खतरे जो दिल को कर रहे कमजोर

चिकित्सकों का मानना है कि जेनेटिक कारणों के अलावा, आज के युवा अनजाने में अपनी दैनिक आदतों से अपने दिल को खतरे में डाल रहे हैं:

  • क्रोनिक तनाव और लगातार उच्च कोर्टिसोल: करियर, आर्थिक दबाव और कॉर्पोरेट लक्ष्यों के कारण शरीर में 'तनाव हार्मोन' (Cortisol और Adrenaline) लगातार उच्च स्तर पर बने रहते हैं। यह स्थिति रक्तचाप को बढ़ाती है और धमनियों में सूजन पैदा करती है।

  • नींद की गंभीर कमी (Sleep Deprivation): रात में 7-8 घंटे की निर्बाध नींद न लेना और देर रात तक जागना दिल की प्राकृतिक मरम्मत (Repair Mechanism) को बाधित करता है। नियमित रूप से 5-6 घंटे से कम सोने वालों में हार्ट अटैक का जोखिम काफी अधिक पाया गया है।

  • अति-व्यायाम और बिना डॉक्टरी सलाह के सप्लीमेंट्स: जिम में क्षमता से अधिक भारी वजन उठाना (Over-exertion), डिहाइड्रेशन की स्थिति में इंटेंस वर्कआउट करना, और अनाधिकृत प्रोटीन पाउडर या एनर्जी बूस्टर्स का अत्यधिक सेवन भी दिल पर जानलेवा दबाव डाल सकता है।

  • धूम्रपान, वेपिंग और जंक फूड: स्मोकिंग और वेपिंग से धमनियों की अंदरूनी परत क्षतिग्रस्त होती है, जिससे खून में थक्के बनने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। वहीं ट्रांस फैट और अत्यधिक रिफाइंड चीनी वाला भोजन कम उम्र में ही बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ा देता है।

इन चेतावनी संकेतों को कभी न करें 'गैस या थकान' समझकर नजरअंदाज

अक्सर युवा सीने में होने वाली बेचैनी को सामान्य 'एसिडिटी' या 'मांसपेशियों का खिंचाव' मानकर टाल देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार निम्नलिखित लक्षणों को तुरंत गंभीरता से लेना चाहिए:

  • बिना किसी भारी मेहनत के अचानक अत्यधिक पसीना आना और चक्कर आना।

  • सीने के बीच में भारीपन, दबाव, जलन या निचोड़ने जैसा दर्द महसूस होना।

  • दर्द का जबड़े, गर्दन, पीठ या बाएं हाथ की ओर फैलना।

  • सीढ़ियां चढ़ते या सामान्य चलते समय भी सांस का अत्यधिक फूलना।

  • अचानक दिल की धड़कनें बहुत तेज (धड़कन असामान्य होना) महसूस होना या बेहोशी छाना।

युवाओं के लिए डॉक्टरों की सलाह: सुरक्षा के 4 सुनहरे नियम

दिव्यांका सिरोही जैसी होनहार और युवा प्रतिभाओं का असामयिक जाना इस बात की सख्त चेतावनी है कि स्वास्थ्य को कभी हल्के में नहीं लिया जा सकता:

  1. 25 की उम्र के बाद वार्षिक स्वास्थ्य जांच: लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल), ईसीजी (ECG), ब्लड शुगर और रक्तचाप की सालाना जांच अवश्य कराएं। यदि परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास रहा हो, तो ट्रेडमिल टेस्ट (TMT) और इकोकार्डियोग्राम (Echo) भी करवाएं।

  2. सक्रिय रहें, लेकिन संतुलन के साथ: रोजाना 30-40 मिनट की मध्यम गति की सैर, योग या हल्का व्यायाम करें। अपनी शारीरिक क्षमता की सीमा को पहचानें।

  3. नींद और मानसिक स्वास्थ्य को दें प्राथमिकता: रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें और तनाव प्रबंधन के लिए ध्यान व हॉबीज का सहारा लें।

  4. व्यसनों से दूरी: तंबाकू, सिगरेट और वेपिंग को तुरंत अलविदा कहें और प्रसंस्कृत (Processed) खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें।

युवावस्था असीम ऊर्जा का समय है, लेकिन यह अमरता की गारंटी नहीं है। अपने शरीर और दिल की आवाज को सुनना, समय रहते स्वास्थ्य संकेतों को पहचानना और संतुलित जीवनशैली अपनाना ही इस गंभीर खतरे से बचाव का एकमात्र उपाय है।