Hazaribagh Land Scam : IAS विनय चौबे के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, 5000 एकड़ जमीन का खेल और ₹3.1 करोड़ का वह रहस्यमयी लिंक
News India Live, Digital Desk: झारखंड के बहुचर्चित हजारीबाग वन भूमि घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने शुक्रवार (6 फरवरी, 2026) को पूर्व उपायुक्त और निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे के खिलाफ सिविल कोर्ट स्थित विशेष निगरानी न्यायालय में चार्जशीट पेश की। एसीबी ने अपनी जांच में चौबे को इस सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार बताया है।
1. ₹3.1 करोड़ का 'मनी ट्रेल' और पत्नी का कनेक्शन
एसीबी की जांच में एक महत्वपूर्ण वित्तीय कड़ी (Link) सामने आई है। जांच एजेंसियों को ₹3.1 करोड़ के ऐसे लेन-देन मिले हैं, जिसका संबंध सीधे तौर पर जमीन घोटाले से होने का संदेह है।
शेल कंपनियां: आरोप है कि भ्रष्टाचार से अर्जित धन को सफेद करने के लिए तीन शेल कंपनियों का सहारा लिया गया।
पत्नी के खाते: जांच में यह भी पाया गया कि चौबे ने अपने सहयोगी विनय सिंह के जरिए अपनी पत्नी के बैंक खातों में संदिग्ध रूप से पैसे ट्रांसफर करवाए थे।
ससुर के साथ लेन-देन: पूछताछ का एक मुख्य केंद्र विनय चौबे और उनके ससुर एस.एन. त्रिवेदी के बीच हुए वित्तीय लेन-देन भी रहे हैं।
2. 5000 एकड़ जमीन का 'तालिबानी' कब्जा?
एसीबी ने खुलासा किया है कि जब विनय चौबे हजारीबाग के डीसी थे, तब उनके कार्यकाल में लगभग 5000 एकड़ जमीन का अवैध लेन-देन हुआ।
जमीन का प्रकार: इसमें वन भूमि, गैर मजरूआ आम, सरकारी खासमहाल और ट्रस्ट की जमीनें शामिल थीं।
फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी: भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों और पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए इन जमीनों की अवैध जमाबंदी कराई। तत्कालीन राजस्व अधिकारियों ने अपने बयानों में स्वीकार किया है कि ऊपर से दबाव के कारण उन्होंने इन फाइलों पर हस्ताक्षर किए थे।
3. विनय चौबे की मुश्किलें: शराब से लेकर जमीन तक
विनय चौबे फिलहाल जेल में बंद हैं और उनके खिलाफ कई मोर्चों पर जांच चल रही है:
शराब घोटाला: उन्हें छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट के साथ मिलकर नई शराब नीति बनाने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के आरोप में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
आय से अधिक संपत्ति (DA Case): एसीबी ने पाया कि उनकी संपत्ति उनकी वैध आय (₹2.20 करोड़) से 53% अधिक (लगभग ₹3.47 करोड़) है।
73 नामजद आरोपी: इस पूरे वन भूमि घोटाले में कुल 73 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें कई राजस्व कर्मचारी और निजी बिल्डर्स शामिल हैं।
अगला कदम:
न्यायालय द्वारा चार्जशीट पर संज्ञान (Cognizance) लिए जाने के बाद अब इस मामले में विधिवत ट्रायल (मुकदमा) शुरू होगा। एसीबी ने कोर्ट से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पीडी ट्रायल चलाया जाए।