Hartalika Teej 2025 : किन महिलाओं को नहीं रखना चाहिए ये कठिन व्रत? जानें नियम और सावधानियां

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News India Live, Digital Desk: हरतालिका तीज का व्रत भारतीय परंपरा में विवाहित महिलाओं और कुंवारी लड़कियों के लिए बहुत खास माना जाता है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है, जिसमें महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुयोग्य वर की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह व्रत जितना पावन है, उतना ही कठिन भी. यही वजह है कि शास्त्रों और अनुभवी लोगों द्वारा कुछ महिलाओं को यह व्रत न रखने की सलाह दी जाती है.

दरअसल, हरतालिका तीज का व्रत बेहद कठोर होता है, जिसमें महिलाएं पूरे दिन और रात पानी की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करतीं. यह शारीरिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए स्वास्थ्य और कुछ विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ये सलाह दी जाती है:

इन महिलाओं को नहीं रखना चाहिए हरतालिका तीज का व्रत:

  1. गर्भवती महिलाएं: गर्भवती महिलाओं के लिए निर्जला व्रत रखना बेहद खतरनाक हो सकता है. इससे उनकी अपनी सेहत के साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है. शास्त्रों में भी ऐसी स्थिति में गर्भवती महिलाओं को व्रत से छूट दी गई है. यह समझना चाहिए कि मां और बच्चे का स्वास्थ्य सबसे पहले है, इसलिए इस स्थिति में व्रत नहीं रखना चाहिए.
  2. जो महिला बहुत बीमार हों या बुजुर्ग हों: अगर कोई महिला बहुत बीमार है, जिसकी दवाइयां चल रही हैं, या जो काफी कमजोर महसूस कर रही है, उसे भी इस कठिन व्रत से बचना चाहिए. इसी तरह, बहुत ज़्यादा उम्रदराज़ महिलाएं जिनके लिए शरीर को कष्ट देना मुमकिन न हो, उन्हें भी यह व्रत नहीं रखना चाहिए. सेहत के साथ समझौता करके कोई भी धार्मिक कार्य सफल नहीं हो सकता.
  3. मासिक धर्म (Periods) में हों: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूजा-पाठ या ऐसे कठोर व्रत नहीं रखने चाहिए. इसे 'अशुद्धि' का समय माना जाता है. इसलिए, अगर किसी महिला को व्रत के दौरान या इससे ठीक पहले मासिक धर्म आ जाए, तो उन्हें व्रत से बचना चाहिए और अगली बार स्वच्छ होकर ही व्रत करने का विचार करना चाहिए.
  4. जिन्होंने व्रत एक बार शुरू किया लेकिन बाद में छोड़ दिया: शास्त्रों के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत एक बार शुरू करने के बाद उसे हर साल किया जाना चाहिए. अगर किसी कारणवश किसी महिला ने व्रत शुरू करके छोड़ दिया है और फिर से उसे शुरू करने का मन बना रही है, तो उन्हें दोबारा इसे शुरू करने से पहले किसी अनुभवी पंडित या घर के बुजुर्गों से सलाह ज़रूर लेनी चाहिए. कुछ लोग इसे 'खंडित व्रत' मानते हैं और कुछ खास नियमों के बाद ही दोबारा इसकी अनुमति देते हैं.

याद रखें, व्रत का मूल उद्देश्य मन की पवित्रता और श्रद्धा है, शरीर को अनावश्यक कष्ट देना नहीं. अगर आप ऊपर दी गई किसी भी स्थिति में हैं, तो आप व्रत की बजाय केवल पूजा-अर्चना कर सकती हैं और फलहार कर सकती हैं. भगवान भावना देखते हैं, कठोरता नहीं.