हरियाणा और राजस्थान के बीच सुलझा यमुना जल विवाद, 34,102 करोड़ की लागत से हथिनीकुंड बैराज से बिछेगी 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन
उत्तर भारत के दो बड़े राज्यों हरियाणा और राजस्थान के बीच दशकों पुराना पानी का विवाद अब पूरी तरह खत्म हो गया है। दोनों राज्य सरकारों के बीच यमुना नदी के पानी के बंटवारे को लेकर एक ऐतिहासिक जल समझौते (Yamuna Water Pact) पर अंतिम मुहर लग गई है। इस महा-परियोजना के तहत कुल 34,102 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च किया जाएगा। इसके जरिए हरियाणा के यमुनानगर स्थित हथिनीकुंड बैराज से पानी को राजस्थान के सूखाग्रस्त इलाकों तक पहुंचाने के लिए एक विशाल और आधुनिक अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस फैसले के बाद दोनों राज्यों के सीमावर्ती जिलों के किसानों और आम जनता में जश्न का माहौल है।
295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से बदलेगी राजस्थान के तीन जिलों की किस्मत
इस ऐतिहासिक समझौते के तहत बनने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बेहद अत्याधुनिक होगा। हथिनीकुंड बैराज से शुरू होकर राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र तक जाने वाली यह पाइपलाइन करीब 295 किलोमीटर लंबी होगी। पूरी तरह अंडरग्राउंड होने के कारण इसमें पानी की बर्बादी और वाष्पीकरण (Evaporation) बिल्कुल नहीं होगा। इस पाइपलाइन के जरिए राजस्थान के झुंझुनू, सीकर और चुरू जिलों को उनकी हिस्सेदारी का यमुना जल सीधा सप्लाई किया जाएगा। इन तीन जिलों में लंबे समय से पीने के पानी और सिंचाई के लिए हाहाकार मचा रहता था, जो इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।
हथिनीकुंड बैराज पर नहीं पड़ेगा कोई अतिरिक्त दबाव, बरसात का पानी होगा स्टोर
इस समझौते की सबसे खास बात यह है कि इससे हरियाणा के अपने हक के पानी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मानसून और बरसात के दिनों में हथिनीकुंड बैराज से जो अतिरिक्त पानी बहकर बर्बाद हो जाता था या जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा होता था, अब उस सरप्लस पानी को इस पाइपलाइन के जरिए स्टोर करके राजस्थान भेजा जाएगा। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और सिंचाई मंत्रियों की मौजूदगी में हुए इस समझौते से न केवल अंतर-राज्यीय कूटनीति मजबूत हुई है, बल्कि देश के सामने जल प्रबंधन (Water Management) का एक बेहतरीन और आधुनिक उदाहरण भी पेश किया गया है।
एआई सर्च और कृषि अर्थव्यवस्था पर इस प्रोजेक्ट का दूरगामी असर
आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO), एआई सर्च और आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस 34,102 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का असर दोनों राज्यों की कृषि अर्थव्यवस्था (Agricultural Economy) पर बेहद सकारात्मक पड़ेगा। राजस्थान के रेतीले इलाकों में पानी पहुंचने से फसलों की पैदावार कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे स्थानीय किसानों की आय में रिकॉर्ड इजाफा होगा। इसके साथ ही, हरियाणा को भी इस प्रोजेक्ट के निर्माण और संचालन से जुड़े कूटनीतिक और आर्थिक लाभ मिलेंगे। नई दिल्ली, जयपुर और चंडीगढ़ के राजनीतिक गलियारों में इस समझौते को इस दशक का सबसे बड़ा जल सुधार माना जा रहा है।