फरीदाबाद में रिटायर्ड बैंककर्मी से 3,21,999 रुपये की ठगी: सॉफ्टवेयर इंजीनियर समेत तीन शातिर गिरफ्तार
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अंतर्गत हरियाणा के फरीदाबाद जिले से साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बल्लभगढ़ क्षेत्र के सेक्टर-7D में रहने वाले एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी को शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर 3,21,999 रुपये की भारी-भरकम चपत लगा दी गई। इस सनसनीखेज मामले में कार्रवाई करते हुए फरीदाबाद पुलिस के साइबर थाना बल्लभगढ़ की टीम ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर समेत तीन मुख्य आरोपियों को उत्तराखंड से गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। पढ़े-लिखे और तकनीकी रूप से दक्ष लोगों द्वारा इस तरह साइबर अपराधियों के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने के खुलासे से पुलिस भी हैरान है।
फेसबुक के लुभावने विज्ञापन और व्हाट्सऐप चैट से बिछाया गया जाल
घटना की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित रिटायर्ड बैंक कर्मी ने पिछले दिनों फेसबुक पर शेयर बाजार में निवेश करके बंपर मुनाफा कमाने से जुड़ा एक आकर्षक विज्ञापन देखा। चूंकि विज्ञापन में कम समय में अधिक रिटर्न का लालच दिया गया था, इसलिए उन्होंने उस पर क्लिक कर दिया। क्लिक करते ही उनके मोबाइल पर एक अज्ञात व्हाट्सऐप नंबर से मैसेज आया, जिसमें साइबर ठगों ने उन्हें शेयर ट्रेडिंग के तमाम फर्जी टिप्स देने शुरू किए। ठगों के झांसे में आकर पीड़ित ने गत 16 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 3,21,999 रुपये ऑनलाइन निवेश कर दिए। जब निवेश की गई पूरी रकम के बाद भी उन्हें एक भी रुपया वापस नहीं मिला और ठगों ने संपर्क तोड़ दिया, तब उन्हें अपने साथ हुई बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ, जिसके बाद तुरंत साइबर थाने में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई।
टेलीग्राम के जरिए ठगों तक पहुंचाए जाते थे बैंक खाते, ऐसे शिकंजे में आए आरोपी
मामلا दर्ज करने के बाद जब साइबर सेल ने तकनीकी छानबीन और बैंक ट्रांजेक्शन की ट्रेकिंग शुरू की, तो अपराधियों के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी अंकुर श्रीवास्तव और विवेक राय तथा उत्तराखंड के ऋषिकेश निवासी प्रकाश सरकार को धर दबोचा। पूछताछ में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि आरोपी अंकुर श्रीवास्तव बीटेक पास है और एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा है, जबकि विवेक 12वीं और प्रकाश 8वीं पास हैं। ये सभी आरोपी मूल रूप से 'खाता प्रदाता' (Account Provider) के रूप में काम करते थे। प्रकाश सरकार ने अन्य सहयोगियों से बैंक खाते लेकर आगे विवेक और अंकुर को मुहैया कराए थे, जिन्हें टेलीग्राम एप्लीकेशन के माध्यम से मुख्य साइबर ठगों तक भेजा जाता था ताकि ठगी की अवैध रकम को उनमें ट्रांसफर किया जा सके। पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया है और इस अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश तेज कर दी है।