छत्तीसगढ़ के धमतरी में नया धर्मांतरण कानून लागू होने के बाद मचा हड़कंप
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से इस वक्त एक बेहद संवेदनशील और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने राज्य के राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राज्य में नए और कड़े धर्मांतरण विरोधी कानून (Anti-Conversion Law) के प्रभावी होने के बाद धमतरी जिले के कई प्रमुख चर्चों और प्रार्थना स्थलों के बाहर हिंदी में स्पष्ट चेतावनी वाले नोटिस बोर्ड लगा दिए गए हैं। इन नोटिस बोर्ड्स में साफ तौर पर यह लिखा गया है कि चर्च परिसर के भीतर प्रार्थना या आराधना के लिए केवल ईसाइयों का ही प्रवेश मान्य है, और यदि कोई अन्य धर्म या समुदाय का व्यक्ति स्वेच्छा से अंदर आता है तो वह इसके लिए खुद पूरी तरह जिम्मेदार होगा। धमतरी जिला क्रिश्चियन फोरम के पदाधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों के दौरान प्रशासन के पास बड़ी संख्या में ऐसे स्व-घोषणा पत्र जमा किए गए थे जिनमें लोग स्वेच्छा से प्रार्थना सभाओं में शामिल होने की बात कह रहे थे। इसी पृष्ठभूमि और लगातार सामने आ रहे विवादों के बाद एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है। ऐतिहासिक 116 साल पुराने सुंदरगंज मेनोनाइट चर्च सहित शहर के कई अन्य चर्चों के बाहर इस तरह के बैनर और बोर्ड लगने के बाद से यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और शांति समिति की बैठकों के बाद उपजे इस नए घटनाक्रम से इलाके में सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस पूरे मामले के पीछे का घटनाक्रम क्या है और नए धर्म परिवर्तन कानून का स्थानीय स्तर पर किस तरह का असर देखने को मिल रहा है।
छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतरी जैसे क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से प्रार्थना सभाओं और धार्मिक आयोजनों को लेकर विभिन्न संगठनों के बीच तनातनी की खबरें सामने आती रही हैं। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए नए धर्म स्वतंत्रता कानून के प्रावधानों के तहत जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने के मामलों में बेहद कड़े दंड और लंबी सजा का प्रावधान किया गया है। इसी कानूनी सख्ती और संभावित कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए ईसाई समुदाय ने यह precautionary step उठाया है। स्थानीय संगठनों और सर्व आदिवासी समाज की आपत्तियों के बाद जिला कलेक्ट्रेट में शांति समितियों की बैठकें भी आयोजित की जा चुकी हैं, जिसके बाद से चर्च प्रबंधन ने यह स्पष्ट संदेश देना शुरू कर दिया है कि उनके परिसरों में होने वाली प्रार्थनाओं में अन्य लोगों की संलिप्तता को लेकर अनावश्यक विवाद न खड़े हों। आइए जानते हैं कि चर्च के बाहर लगाए गए इन नोटिस बोर्ड्स में क्या खास बातें लिखी गई हैं और इसका स्थानीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
चर्च के बाहर लगाए गए नोटिस बोर्ड्स में क्या लिखा गया है और क्या हैं इसके मायने?
धमतरी के ऐतिहासिक चर्चों के बाहर लगाए गए इन बोर्ड्स में बहुत ही स्पष्ट शब्दों में यह बात दर्ज की गई है कि चर्च प्रबंधन के नियमों के अनुसार केवल ईसाई समुदाय के लोग ही प्रार्थना के लिए आ सकते हैं। यदि कोई अन्य व्यक्ति अपनी मर्जी से प्रवेश करता है, तो उसके परिणाम और जिम्मेदारी उसी की होगी। इस तरह के बयानों के पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति के आने से अवैध धर्मांतरण या जबरन दबाव के आरोप न लग सकें। क्रिश्चियन फोरम का कहना है कि वे कानून का पूरी तरह सम्मान करते हैं और किसी भी प्रकार के भ्रम से बचने के लिए समुदाय के लोगों को अपने घरों और प्रार्थना स्थलों के बाहर भी ऐसे एहतियाती बोर्ड लगाने की सलाह दी गई है।
नए धर्म परिवर्तन कानून और प्रशासनिक बैठकों का असर
जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की देखरेख में हाल ही में हुई शांति बैठकों के बाद इस प्रकार के कदम उठाए जाने से यह साफ हो गया है कि प्रशासन संवेदनशील मुद्दों पर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। एक तरफ जहां हिंदू संगठन और स्थानीय जनजातीय समूह अपने रीति-रिवाजों और संस्कृति की रक्षा के लिए मुखर हैं, वहीं अल्पसंख्यक समुदाय भी अपनी सुरक्षा और कानूनी स्पष्टता को लेकर सतर्क हो गया है। इस घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में धार्मिक आयोजनों को लेकर संवेदनशीलता कितनी बढ़ चुकी है, और आने वाले दिनों में प्रशासन के लिए इस तरह के मामलों को संभालना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।