बॉलीवुड अभिनेता यशपाल शर्मा के भाई और जिलेदार राजेश कुमार हिसार में रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

बॉलीवुड अभिनेता यशपाल शर्मा के भाई और जिलेदार राजेश कुमार हिसार में रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

बॉलीवुड और हरियाणवी सिनेमा के जाने-माने दिग्गज अभिनेता यशपाल शर्मा (Yashpal Sharma) के परिवार से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। फिल्म 'लगान', 'गंगाजल' और 'दहाड़' जैसी बेहतरीन फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी का लोहा मनवाने वाले अभिनेता यशपाल शर्मा के भाई राजेश कुमार को हरियाणा के एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया है। हरियाणा के हिसार जिले में जल सेवा मंडल के तहत जिलेदार के पद पर तैनात राजेश कुमार को एक मामले में मात्र 3000 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों दबोचा गया। सरकारी महकमे में एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा इस तरह रिश्वत लिए जाने और एसीबी की इस अचानक की गई कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है, वहीं एक बड़े फिल्मी कलाकार के भाई के इस तरह भ्रष्टाचार के दलदल में फंसने से हर कोई हैरान है।

मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला हिसार क्षेत्र में एक कृषि भूमि पर बसाई जा रही कॉलोनी से जुड़ा हुआ था। इस कॉलोनी की सिंचाई व्यवस्था के लिए नहर का पानी इस्तेमाल करने हेतु 'कमांड एरिया ऑथराइजेशन' (COO) यानी आधिकारिक अनुमति की आवश्यकता थी, जिसके लिए विभाग में आवेदन किया गया था। इस फाइल को आगे बढ़ाने और अनुमति देने की पूरी जिम्मेदारी जिलेदार राजेश कुमार के पास थी। आरोप है कि इसी कागजी कार्रवाई और एनओसी जारी करने के एवज में अधिकारी द्वारा रिश्वत की मांग की गई थी। परेशान होकर शिकायतकर्ता ने इसकी गुप्त शिकायत हरियाणा एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की हांसी सब-सेंटर टीम से कर दी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने पूरी सतर्कता बरतते हुए मामले का सत्यापन किया और जाल बिछाने की पुख्ता योजना तैयार की।

एसीबी का सफल ट्रैप और केमिकल लगे नोटों के साथ हुई गिरफ्तारी

शिकायत के सही पाए जाने के बाद एसीबी ने योजना के तहत शिकायतकर्ता को केमिकल लगे हुए 3,000 रुपये देकर राजेश कुमार के पास भेजा। जैसे ही शिकायतकर्ता ने वह रकम राजेश कुमार को सौंपी, पहले से ही ताक में बैठी एंटी-करप्शन ब्यूरो की टीम ने तुरंत मौके पर छापा मारकर उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। अधिकारियों ने आरोपी के पास से रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली है। एसीबी ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act) की धारा 7 के तहत आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी राजेश कुमार का जल्द ही प्रमोशन होने वाला था और पदोन्नति के आदेश भी आ चुके थे, लेकिन उससे ठीक पहले इस आपराधिक मामले में फंसने से उनके करियर पर बड़ा ग्रहण लग गया है।

परिवार की सफाई: फंसाने का लगाया जा रहा है आरोप

दूसरी ओर, इस पूरी कार्रवाई के सामने आने के बाद आरोपी पक्ष और परिजनों की तरफ से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। परिवार के सदस्यों ने एसीबी की इस कार्रवाई को गलत बताते हुए दावा किया है कि राजेश कुमार को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि जो पैसे लिए गए थे वे किसी प्रकार की अवैध रिश्वत नहीं बल्कि नहरी पानी के चालान और आधिकारिक प्रक्रिया की सरकारी फीस थी, जिसकी बाकायदा रसीद कटती है। बहरहाल, भ्रष्टाचार के इस मामले में एसीबी के हाथ पुख्ता सबूत और रंगे हाथों गिरफ्तारी के बाद कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है, और जांच एजेंसी अब इस पूरे प्रकरण के अन्य पहलुओं की गहराई से छानबीन कर रही है।