पंचकूला : जानिए देश के सबसे ऊंचे 221 फीट के रावण की पूरी कहानी

पंचकूला : जानिए देश के सबसे ऊंचे 221 फीट के रावण की पूरी कहानी

हरियाणा का हाई-टेक शहर पंचकूला इस बार विजयादशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर एक नया और ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है। पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित विशाल शालिमार ग्राउंड में इस वर्ष देश का सबसे ऊंचा और विशालकाय रावण का पुतला खड़ा किया गया है, जिसकी कुल ऊंचाई 221 फीट मापी गई है। इस भव्य और अलौकिक रावण के पुतले को तैयार करने में आयोजकों ने करीब 34 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की है। दशहरा उत्सव समिति और मुस्लिम कारीगरों के एक बड़े समूह ने मिलकर इसे रात-दिन एक करके तैयार किया है।

इस रावण को देखने के लिए न केवल पंचकूला, चंडीगढ़ और मोहाली (ट्राइसिटी) से, बल्कि पूरे हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के जुटने की संभावना है। आयोजकों का दावा है कि ऊंचाई और भव्यता के मामले में यह पुतला लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और अन्य विश्व रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराने के लिए तैयार है। पूरे शालिमार ग्राउंड को एक भव्य मेले का रूप दिया गया है, जहाँ सुरक्षा से लेकर लाइटिंग और पार्किंग के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

#1 साढ़े तीन महीने की अटूट मेहनत और मुस्लिम कारीगरों की मिसाल: कैसे बना यह 221 फीट ऊंचा रावण?

इस विशालकाय रावण के पुतले के निर्माण की कहानी बेहद रोचक और प्रेरणादायी है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और आगरा के रहने वाले प्रसिद्ध कारीगर तजिंदर चौहान और उनकी 40 सदस्यीय कुशल टीम ने पिछले साढ़े तीन महीने से पंचकूला में डेरा डाल रखा था। भारी बारिश और बदलते मौसम की चुनौतियों का सामना करते हुए इस टीम ने दिन-रात एक करके बांस, लोहे के पाइप, मखमली कपड़ों और पर्यावरण-अनुकूल पन्नों से इसे आकार दिया है।

इस पुतले के निर्माण में लगभग 3000 मीटर से अधिक मजबूत कपड़ा, 25 क्विंटल से ज्यादा बांस, सैकड़ों किलो लोहा और फाइबरग्लास का इस्तेमाल किया गया है। पुतले का चेहरा और मुकुट ही करीब 25 फीट ऊंचा बनाया गया है, जिसे क्रेन की मदद से धड़ के ऊपर स्थापित किया गया। मुस्लिम कारीगरों द्वारा हिंदू आस्था के इस प्रतीक को इतनी श्रद्धा और मेहनत से तैयार करना कौमी एकता और सामाजिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल पेश करता है।

#1 इको-फ्रेंडली ग्रीन आतिशबाजी और रिमोट कंट्रोल से होगा डिजिटल रावण दहन

पर्यावरण और वायु प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए इस बार पंचकूला के इस सबसे ऊंचे रावण में सामान्य पटाखों की जगह केवल तमिलनाडु के शिवकाशी से मंगाए गए विशेष ग्रीन क्रैकर्स (Green Crackers) और इको-फ्रेंडली आतिशबाजी का इस्तेमाल किया गया है। पुतले के भीतर करीब 1.5 लाख रुपये मूल्य की ऐसी आतिशबाजी फिट की गई है जो धुएं के बिना केवल रंग-बिरंगी रोशनी और लेजर शो जैसी अनुभूति प्रदान करेगी।

सुरक्षा के कड़े मानकों का पालन करते हुए इस 221 फीट ऊंचे रावण के दहन के लिए पारंपरिक मशाले का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसके बजाय एक अत्याधुनिक रिमोट कंट्रोल डिजिटल सिस्टम तैयार किया गया है। जैसे ही मुख्य अतिथि बटन दबाएंगे, रावण के नाभिकमल, मुकुट, आंखों और अंत में पूरे शरीर में एक साथ आतिशबाजी शुरू हो जाएगी। रावण की आंखों से अंगारे और मुंह से धुआं निकलने का विशेष हाइड्रोलिक मैकेनिज्म भी इस बार आकर्षण का मुख्य केंद्र रहने वाला है।

#1 सुरक्षा के कड़े इंतजाम: सीसीटीवी, ड्रोन कैमरे और भारी पुलिस बल तैनात

221 फीट ऊंचे रावण के पुतले की विशालता और विशाल जनसमूह की सुरक्षा को देखते हुए पंचकूला पुलिस और जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर हैं। शालिमार ग्राउंड के चारों ओर 500 मीटर के दायरे में लोहे की मजबूत बैरिकेडिंग की गई है ताकि दहन के समय कोई भी दर्शक पुतले के करीब न जा सके।

सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता बनाने के लिए पूरे मैदान में 50 से अधिक हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी लाइव मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से की जा रही है। इसके अलावा, आसमान से नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का सहारा लिया जा रहा है। एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और बम निरोधक दस्ते को ग्राउंड के पास ही स्टैंडबाय पर रखा गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

#1 ट्राइसिटी में उत्सव का माहौल: स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

पंचकूला में हर साल दशहरे पर बनने वाला यह विशालकाय रावण अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्र के पर्यटन और स्थानीय व्यापार के लिए एक बड़ा अवसर बन चुका है। दशहरा मेले के कारण आसपास के होटल, रेस्तरां और छोटे व्यापारियों के कारोबार में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह आयोजन पंचकूला की पहचान बन चुका है और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में इस विशाल रावण दहन को देखने का भारी उत्साह है।