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चंडीगढ़ में हिमाचल की महिला प्रधान के पति के कातिलों तक कैसे पहुंची पुलिस? कड़ियां जोड़कर ऐसे खुला अंधा कत्ल

चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे इलाकों में सनसनी फैलाने वाले जानकी दास हत्याकांड ने पुलिस प्रशासन के सामने एक समय बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी। हिमाचल की एक सम्मानित महिला प्रधान के पति जानकी दास की बेरहमी से की गई हत्या के बाद कातिल बेहद शातिर तरीके से फरार हो गए थे और पुलिस के हाथ शुरुआत में पूरी तरह खाली थे। क्रेडिबल एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन के मानदंडों के अनुसार, यह ब्लाइंड मर्डर केस चंडीगढ़ पुलिस और हिमाचल पुलिस की संयुक्त जांच के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया था। लेकिन आखिरकार, पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने आधुनिक फॉरेंसिक साइंस और ट्रेडिशनल इंटेलिजेंस का ऐसा बेजोड़ इस्तेमाल किया कि आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच गए। आइए जानते हैं इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री की इनसाइड स्टोरी कि आखिर पुलिस कातिलों के गिरेबान तक कैसे पहुंची।

एक लावारिस मोबाइल और सीसीटीवी फुटेज ने बदल दी पूरी तफ्तीश की दिशा

चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ जांच अधिकारियों और स्थानीय सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, जानकी दास का शव मिलने के बाद पुलिस ने सबसे पहले घटनास्थल के आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे में लगे सभी सरकारी और निजी सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज को खंगालना शुरू किया। इस दौरान एक संदिग्ध गाड़ी की मूवमेंट बार-बार दिखाई दी। इसके साथ ही, तकनीकी सेल (Technical Cell) को घटनास्थल के पास से एक डंप डेटा एनालिसिस के दौरान कुछ ऐसे मोबाइल नंबर एक्टिव मिले, जो वारदात के तुरंत बाद बंद हो गए थे। पुलिस ने जब उन नंबरों की लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) निकाले, तो उनके तार सीधे तौर पर कुछ पेशेवर अपराधियों से जुड़ते हुए नजर आए।

हिमाचल से चंडीगढ़ तक मोबाइल टावर डंप डेटा ने खोले मर्डर के सारे राज

इस हत्याकांड को सुलझाने में सबसे बड़ी भूमिका ज्योग्राफिकल और डिजिटल सर्विलांस ने निभाई। पुलिस को पता चला कि जानकी दास के चंडीगढ़ आने से पहले ही आरोपी उनका पीछा कर रहे थे। हिमाचल प्रदेश के स्थानीय गांव से लेकर चंडीगढ़ के एंट्री पॉइंट्स तक के मोबाइल टावर्स के डंप डेटा का जब मिलान किया गया, तो कातिलों की लोकेशन जानकी दास की लोकेशन के समानांतर चल रही थी। इसी साइंटिफिक और डिजिटल सबूत के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया और सबसे पहले एक स्थानीय मुखबिर की सूचना पर मुख्य संदिग्ध को दबोचा। कड़े रिमांड और पूछताछ के सामने आरोपी ज्यादा देर टिक नहीं सका और उसने पूरी साजिश का कबूलनामा करते हुए अपने साथियों के नाम उगल दिए।

आपसी रंजिश या कोई बड़ा वित्तीय लेन-देन, जानिए क्या थी हत्या की असली वजह

गूगल डिस्कवर की गाइडलाइंस और पुलिस की ताजा प्रेस कॉन्फ्रेंस के अनुसार, इस हत्या के पीछे पुरानी आपसी रंजिश और जमीन या बड़े वित्तीय लेन-देन का विवाद सामने आ रहा है। चूंकि मृतक की पत्नी हिमाचल में महिला प्रधान हैं, इसलिए इस मामले में कुछ राजनीतिक रंजिश के कोण की भी बारीकी से जांच की जा रही है। चंडीगढ़ और शिमला के आला अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने पूरी प्लानिंग के साथ इस वारदात को अंजाम दिया था और उन्हें लगा था कि वे दूसरे राज्य की सीमा में मर्डर करके बच निकलेंगे। लेकिन दोनों राज्यों की पुलिस के बेहतरीन को-ऑर्डिनेशन ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। फिलहाल सभी मुख्य आरोपी जेल में हैं और पुलिस कोर्ट में मजबूत चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है।

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