हरियाणा : गोहाना में एक करोड़ की जमीन अब दस करोड़ रुपये में बिक रही
भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और उसके आसपास के राज्यों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भू-संपत्ति (Real Estate) के बाजार में एक अभूतपूर्व क्रांति ला दी है। विशेष रूप से हरियाणा राज्य में एक्सप्रेसवे, पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, नए राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और बाईपास के निर्माण ने गांवों और कस्बों की तस्वीर को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। कभी कृषि पर पूरी तरह निर्भर रहने वाले ग्रामीण इलाकों में अब विकास की बयार इस तरह बह रही है कि जमीन की कीमतों में बेतहाशा उछाल देखने को मिल रहा है। हरियाणा के गोहाना क्षेत्र का एक ताजा उदाहरण इस बात की गवाही देता है कि कैसे रातों-रात सड़कों के जाल ने किसानों और स्थानीय निवासियों की किस्मत बदल दी है, जहां कभी एक करोड़ रुपये में बिकने वाली जमीन आज दस करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम दामों पर बिक रही है। आइए इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं कि बुनियादी ढांचे के विकास का यह मैजिक कैसे काम कर रहा है और इसका स्थानीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है।
हरियाणा में एक्सप्रेसवे और हाईवे का जाल और ग्रामीण इलाकों का कायाकल्प
किसी भी क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए सबसे पहली शर्त बेहतर कनेक्टिविटी यानी सड़कों और परिवहन का मजबूत नेटवर्क होती है। हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से पिछले एक दशक में राज्य के अंदर एक्सप्रेसवे और आधुनिक हाईवे का ऐसा जाल बिछाया गया है, जिसने देश के बड़े महानगरों को ग्रामीण अंचलों से सीधे जोड़ दिया है। केएमपी (KMP) एक्सप्रेसवे, दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे और विभिन्न औद्योगिक कॉरिडोर्स के कारण अब हरियाणा के दूरदराज के गांव भी दिल्ली, गुरुग्राम, चंडीगढ़ और नोएडा जैसे बड़े व्यावसायिक केंद्रों से कुछ ही घंटों की दूरी पर आ गए हैं। इस बेहतरीन सड़क नेटवर्क के चलते लॉजिस्टिक्स कंपनियों, वेयरहाउसिंग हब्स और बड़ी औद्योगिक इकाइयों ने शहरों से बाहर निकलकर इन ग्रामीण क्षेत्रों की तरफ अपना रुख करना शुरू कर दिया है, जिससे इन इलाकों की भू-संपत्ति का महत्व कई गुना बढ़ गया है।
गोहाना में जमीन के दामों का आसमान छूना: एक करोड़ से दस करोड़ का सफर
रोहतक और सोनीपत जिले के बीच स्थित ऐतिहासिक शहर गोहाना और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ महीनों के दौरान जमीनों के भाव में जो उछाल आया है, उसने रियल एक्सपर्ट्स को भी हैरान कर दिया है। जो जमीनें कुछ साल पहले तक एक करोड़ या डेढ़ करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से बिकती थीं, आज वही जमीनें विभिन्न कमर्शियल प्रोजेक्ट्स, हाईवे किनारे के प्लॉटिंग और वेयरहाउसिंग की मांग के कारण सीधे आठ से दस करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक के भाव में बिक रही हैं। इस अचानक आए आर्थिक बदलाव ने गोहाना क्षेत्र के सामान्य किसानों और भू-स्वामियों को रातों-रात करोड़पति बना दिया है। किसानों के पास अब पर्याप्त पूंजी आ गई है, जिससे वे अपने बच्चों को बेहतर उच्च शिक्षा दिला रहे हैं, आधुनिक जीवनशैली अपना रहे हैं और अन्य क्षेत्रों में भी अपने व्यावसायिक निवेश को तेजी से बढ़ा रहे हैं।
रियल एस्टेट और वेयरहाउसिंग हब के रूप में उभरता हरियाणा का ग्रामीण अंचल
पारंपरिक खेती-किसानी से आगे बढ़कर अब हरियाणा के गांवों की जमीनें कमर्शियल और इंडस्ट्रियल गतिविधियों का केंद्र बनती जा रही हैं। एक्सप्रेसवे के किनारे बड़े-बड़े लॉजिस्टिक्स पार्क, कोल्ड स्टोरेज, ऑटोमोबाइल प्लांट्स और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित हो रही हैं, क्योंकि कंपनियों को यहां से माल ढुलाई (Transportation) करने में भारी सुविधा मिलती है। इस वजह से निवेशकों और बिल्डर्स की पहली पसंद अब गुरुग्राम या फरीदाबाद जैसे महंगे शहरों के बजाय हरियाणा के छोटे कसबे और गोहाना जैसे ग्रामीण क्षेत्र बनते जा रहे हैं। जब बहुराष्ट्रीय कंपनियां और बड़े कॉरपोरेट घराने जमीन खरीदने के लिए आगे आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से उसका सीधा फायदा वहां के स्थानीय किसानों को मिलता है, जिनकी पीढ़ियों से चली आ रही आर्थिक तंगी इस विकास की वजह से हमेशा के लिए दूर हो रही है।
बुनियादी ढांचे के विकास का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव तथा भविष्य की राह
यह स्पष्ट है कि सड़कों और एक्सप्रेसवे का यह जाल केवल कंक्रीट और डामर की पटरियां नहीं हैं, बल्कि यह प्रगति के वे राजमार्ग हैं जो भारत के गांवों को सीधे विकसित राष्ट्र के सपने से जोड़ते हैं। गोहाना जैसी जगहों पर जमीन के दामों में आया यह उछाल इस बात का सबूत है कि जब सरकार सही समय पर सही जगह इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश करती है, तो उसका मल्टीप्लायर इफेक्ट (Multiplier Effect) सीधे आम जनता तक पहुंचता है। हालांकि, इस अंधाधुंध शहरीकरण और जमीन की बढ़ती कीमतों के बीच यह भी जरूरी है कि स्थानीय प्रशासन सुनियोजित योजना (Town Planning) के तहत विकास को आगे बढ़ाए ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे और कृषि भूमि के तेजी से कम होने का असर खाद्य सुरक्षा पर न पड़े। कुल मिलाकर, हरियाणा के इन गांवों की बदलती हुई यह तस्वीर नए और समृद्ध भारत की एक बेहद प्रेरणादायक और शानदार कहानी कह रही है।