होम लोन पूरा चुकाने के बाद भी बैंक ने नहीं लौटाए प्रॉपर्टी के मूल कागजात? आरबीआई के सख्त नियम के तहत अब हर दिन के हिसाब से मिलेगा 5000 रुपये का भारी हर्जाना

होम लोन पूरा चुकाने के बाद भी बैंक ने नहीं लौटाए प्रॉपर्टी के मूल कागजात? आरबीआई के सख्त नियम के तहत अब हर दिन के हिसाब से मिलेगा 5000 रुपये का भारी हर्जाना

घर खरीदना हर आम भारतीय परिवार का सबसे बड़ा जीवन-लक्ष्य होता है। इस सपने को साकार करने के लिए लोग अपनी आधी जिंदगी की कमाई होम लोन की मासिक किश्तों यानी ईएमआई के रूप में बैंकों को चुकाते हैं। वर्षों की कड़ी मेहनत, वित्तीय अनुशासन और त्याग के बाद जब होम लोन का अंतिम रुपया चुकता हो जाता है, तो परिवार को जिस सबसे बड़ी राहत और सुकून का इंतजार होता है, वह है अपनी संपत्ति के असली और कानूनी कागजात यानी ओरिजिनल टाइटल डीड अपने हाथों में लेना। लेकिन अक्सर देखने को मिलता है कि कर्ज खत्म होते ही बैंक ग्राहकों के प्रति लापरवाह हो जाते हैं और महीनों तक उन्हें अपनी ही संपत्ति के दस्तावेजों के लिए शाखाओं के चक्कर लगाने पर मजबूर करते हैं। इस मनमानी पर लगाम कसने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक यानी आरबीआई ने बेहद कड़े नियम लागू किए हैं, जिसके तहत अब बैंकों की एक-एक दिन की देरी उन्हें बहुत भारी पड़ रही है।

आरबीआई का ऐतिहासिक आदेश: 30 दिनों की सख्त समय सीमा और बैंकों की सीधी जवाबदेही

भारतीय रिज़र्व बैंक ने देशभर के सभी वाणिज्यिक बैंकों, सरकारी व निजी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही कोई उधारकर्ता अपने लोन खाते का पूरा निपटान कर देता है और सारा बकाया खत्म हो जाता है, बैंक की यह वैधानिक जिम्मेदारी बन जाती है कि वह 30 कैलेंडर दिनों के भीतर ग्राहक के सभी मूल चल व अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रूप से वापस सौंपे। यह नियम केवल होम लोन पर ही लागू नहीं होता, बल्कि मॉर्गेज लोन, प्रॉपर्टी के एवज में लिए गए पर्सनल लोन, बिजनेस लोन और वाहन लोन पर भी पूरी तरह प्रभावी है। देश के किसी भी शहर, चाहे वह लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, मुंबई, पटना या बेंगलुरु हो, स्थानीय शाखाओं को इस केंद्रीय नियम का शत-प्रतिशत पालन करना अनिवार्य है।

30 दिन की डेडलाइन पार होते ही 5000 रुपये प्रतिदिन का मुआवजा सीधे खाते में

आरबीआई के संशोधित फेयर प्रैक्टिसेज कोड के तहत यदि बैंक या वित्तीय संस्थान पूरा कर्ज चुकता होने के 30 दिनों के अंदर ग्राहक को उसकी संपत्ति के मूल कागजात लौटाने में विफल रहता है, तो उसे देरी के हर एक दिन के लिए ग्राहक को पांच हजार रुपये का मुआवजा देना होगा। यह मुआवजा बैंक किसी तरह की छूट या बहाने बनाकर टाल नहीं सकता। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ग्राहक का लोन बंद होने के बाद बैंक कागजात लौटाने में 40 दिन का समय लेता है, तो अतिरिक्त 10 दिनों की देरी के लिए बैंक को बिना किसी आनाकानी के पचास हजार रुपये की हर्जाना राशि सीधे ग्राहक के बैंक खाते में जमा करनी होगी। आरबीआई ने साफ कर दिया है कि देरी की अवधि की गणना उस दिन से शुरू होगी जब कर्जदाता को अंतिम बकाया राशि प्राप्त हुई थी।

बैंक से कागजात गुम या नष्ट होने पर क्या है 60 दिनों का कड़ा प्रोटोकॉल

कई मामलों में बैंक यह दलील देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हैं कि कागजात उनके केंद्रीय रिकॉर्ड रूम में नहीं मिल रहे हैं या ट्रांसफर के दौरान कहीं खो गए हैं। इस गंभीर स्थिति के लिए भी आरबीआई ने उपभोक्ताओं के अधिकारों की पूरी रक्षा की है। यदि बैंक से ग्राहक की सेल डीड, रजिस्ट्री या अन्य दस्तावेज खो जाते हैं, तो बैंक को तुरंत इसकी आधिकारिक सूचना ग्राहक को देनी होगी। इसके बाद बैंक को अपने स्वयं के खर्च पर स्थानीय सब-रजिस्ट्रार ऑफिस, संबंधित विकास प्राधिकरण या नगर निगम से उन सभी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां यानी सर्टिफाइड कॉपीज निकलवानी होंगी। इसके साथ ही बैंक को प्रमुख समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस और गुमशुदगी की एफआईआर भी अपने खर्च पर करानी होगी। इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए बैंक को अधिकतम 30 अतिरिक्त दिन मिलते हैं। यदि कुल 60 दिनों के बाद भी प्रमाणित दस्तावेज और कानूनी संरक्षण पत्र ग्राहक को नहीं सौंपे जाते हैं, तो 61वें दिन से रोजाना 5000 रुपये का जुर्माना फिर से लागू हो जाएगा।

लोन बंद कराने के बाद इन अहम दस्तावेजों की जांच करना न भूलें

जब भी आप अपना लोन खाता पूरी तरह बंद करें, तो केवल जुबानी आश्वासन पर भरोसा न करें। सबसे पहले बैंक से नो ड्यूज सर्टिफिकेट यानी एनडीसी या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी एनओसी हासिल करें। लोन लेते समय बैंक ने आपको लिस्ट ऑफ डाक्यूमेंट्स यानी एलओडी नाम की एक रसीद दी होगी, जिसमें जमा किए गए सभी कागजों का ब्यौरा दर्ज होता है। संपत्ति वापस लेते समय उस सूची के प्रत्येक कागजात, जैसे मूल विक्रय पत्र, बैनामा, टाइटल डीड, अलॉटमेंट लेटर, पॉसेशन लेटर, नक्शा और पूर्ववर्ती स्वामित्व पत्रों की एक-एक कर भौतिक जांच करें। इसके अलावा यह भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें कि बैंक ने सेंट्रल रजिस्ट्री ऑफ सिक्योरिटाइजेशन एसेट रिकंस्ट्रक्शन एंड सिक्योरिटी इंटरेस्ट यानी सरफेसी व सरसई पोर्टल से अपनी बंधक प्रविष्टि हटा ली है और स्थानीय रजिस्ट्री कार्यालय में जाकर भार मुक्ति प्रमाण पत्र दर्ज करा दिया है।

बैंक द्वारा आनाकानी करने पर ग्राहक कैसे उठाएं कानूनी कदम और शिकायत प्रक्रिया

यदि आपके होम लोन का अंतिम भुगतान हुए 30 दिन से अधिक का समय बीत चुका है और आपकी स्थानीय बैंक शाखा टालमटोल कर रही है, तो सबसे पहले बैंक के शाखा प्रबंधक यानी ब्रांच मैनेजर को एक औपचारिक लिखित पत्र या ईमेल भेजें, जिसमें लोन क्लोजर की तारीख, बकाया शून्य होने का प्रमाण और आरबीआई के 30 दिवसीय नियम व 5000 रुपये प्रतिदिन मुआवजे का स्पष्ट संदर्भ दें। शाखा से रिसीविंग कॉपी या पावती अवश्य सुरक्षित रखें। यदि शाखा स्तर पर 15 से 30 दिनों के भीतर कोई ठोस समाधान और मुआवजा नहीं मिलता है, तो मामले को बैंक के प्रधान नोडल अधिकारी यानी प्रिंसिपल नोडल ऑफिसर के समक्ष उठाएं।

आरबीआई ओंबड्समैन पोर्टल पर सीधे करें ऑनलाइन शिकायत

यदि नोडल अधिकारी से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है या 30 दिन की समय सीमा बीत जाने के बाद भी बैंक मुआवजा देने से इनकार करता है, तो ग्राहक को सीधे भारतीय रिज़र्व बैंक के एकीकृत लोकपाल योजना के तहत शिकायत दर्ज करनी चाहिए। इसके लिए आरबीआई के आधिकारिक शिकायत प्रबंधन पोर्टल यानी सीएमएस पोर्टल (cms.rbi.org.in) पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। ग्राहक टोल-फ्री नंबर 14448 पर कॉल करके भी मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते समय लोन सैंक्शन लेटर, अंतिम नो ड्यूज रसीद, एलओडी और शाखा को भेजे गए पत्रों की प्रतियां संलग्न करें। आरबीआई लोकपाल इस मामले में त्वरित संज्ञान लेकर बैंक को न केवल तुरंत दस्तावेज सौंपने का निर्देश देता है, बल्कि हर दिन की देरी के हिसाब से 5000 रुपये का पूरा हर्जाना ग्राहक को दिलाने का वैधानिक आदेश पारित करता है। ग्राहक अपने इस अधिकार के प्रति जागरूक रहें और किसी भी बैंक की मनमानी को चुपचाप सहने के बजाय कानूनी नियमों का सहारा लें।