पूर्व सब-इंस्पेक्टर और सरपंच पिता ने की अपने ही सेंगे बेटे की निर्मम हत्या

पूर्व सब-इंस्पेक्टर और सरपंच पिता ने की अपने ही सेंगे बेटे की निर्मम हत्या

हरियाणा के जींद जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली और खौफनाक वारदात सामने आई है जिसने खाप पंचायतों, पुलिस प्रशासन और इंसानियत के रिश्तों को हिलाकर रख दिया है। एक तरफ जहां पिता को बच्चों का रक्षक और मार्गदर्शक माना जाता है, वहीं जींद में एक पूर्व सब-इंस्पेक्टर (Retired Sub-Inspector) और एक स्थानीय सरपंच पिता ने अपने ही सेंगे जवान बेटे की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। घटना के वक्त जब पिता और उसके साथियों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कीं, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी अपनी जान बचाने के लिए मौके से उल्टे पांव भाग खड़े हुए। बेखौफ आरोपियों ने मृतक मुरारी पर एक के बाद एक ताबड़तोड़ 7 गोलियां दाग दीं, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। आइए एक ग्राउंड और क्राइम रिपोर्टर की नजर से जानते हैं कि इस खौफनाक ऑनर किलिंग और पारिवारिक कत्लेआम की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है।

ऑनर किलिंग और पारिवारिक रंजिश का खौफनाक अंत: जींद में सरेआम गोलियों की गड़गड़ाहट

घटना की शुरुआत तब हुई जब जींद के एक ग्रामीण इलाके में पिछले काफी समय से परिवार के भीतर चल रहा संपत्ति और आपसी रिश्तों का विवाद अपने चरम पर पहुंच गया था। मृतक मुरारी अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर अपनी जिंदगी जीने और कुछ व्यक्तिगत फैसलों पर अड़ा हुआ था, जो उसके पिता और परिवार के रसूखदार सदस्यों को नागवार गुजर रहा था। आरोपी पिता जो कि पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हो चुका था और वर्तमान में गांव की राजनीति में सरपंच या दबंग ओहदे से जुड़ा था, उसने अपने बेटे की बगावत को अपनी इज्जत पर धब्बा मान लिया था। उसने कई बार अपने बेटे को रास्ते से हटाने की धमकी भी दी थी, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि एक पिता अपने ही खून के प्यासे हो जाएंगे और सरेआम गोलियों से छलनी कर देंगे।

फायरिंग शुरू होते ही जान बचाकर भागी पुलिस: कानून-व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस खौफनाक वारदात का सबसे शर्मनाक और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि जिस वक्त आरोपियों ने इस हत्या की साजिश को अंजाम देना शुरू किया, उस समय मौके पर कुछ पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। जैसे ही आरोपियों ने धड़ाधड़ फायरिंग शुरू की और गोलियों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा, तो कानून व्यवस्था बनाए रखने के दावे करने वाली स्थानीय पुलिस अपनी जान बचाने के लिए मौके से भाग खड़ी हुई। पुलिस की इस कायरता और कार्यशैली पर अब स्थानीय ग्रामीणों और मृतक के समर्थकों द्वारा बेहद तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस थोड़ी सी भी मुस्तैदी और बहादुरी दिखाती, तो शायद एक नौजवान बेटे की जान बचाई जा सकती थी। पुलिस के भागने के बाद बेखौफ हत्यारों ने मुरारी के शरीर पर ताबड़तोड़ 7 गोलियां उतारीं और यह सुनिश्चित किया कि उसकी सांसें हमेशा के लिए थम जाएं।

मुरारी के शरीर पर दागी गईं 7 गोलियां, मौके पर पसरा सन्नाटा और चीख-पुकार

आरोपियों ने इस वारदात को किसी पेशेवर शार्पशूटर की तरह अंजाम दिया। चश्मदीदों के अनुसार, जब मुरारी पर पहला वार किया गया तो वह अपनी जान बचाने के लिए भागा, लेकिन बेरहम पिता और उसके सहयोगियों ने उसे घेर लिया और नजदीक से एक के बाद एक 7 गोलियां उसके सीने और शरीर में उतार दीं। गोलियों की आवाज इतनी भयानक थी कि आसपास के घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद हो गईं। जब तक हमलावर वारदात को अंजाम देकर वहां से फरार हुए, तब तक मुरारी खून से लथपथ होकर जमीन पर ढेर हो चुका था। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद मृतक के घर में कोहराम मच गया और मां तथा अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम के साथ-साथ एक अनजाना डर और तनाव का माहौल व्याप्त है।

पुलिस प्रशासन की ताबड़तोड़ छापेमारी और आरोपियों की धरपकड़ के लिए एसआईटी गठित

घटना की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा पुलिस के उच्च अधिकारियों ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया है और लापरवाह पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। मुख्य आरोपी पूर्व सब-इंस्पेक्टर और उसके साथियों के खिलाफ हत्या, शस्त्र अधिनियम (Arms Act) और आपराधिक साजिश की गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस की कई विशेष टीमों (SIT) का गठन करके आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि चाहे आरोपी कितना भी रसूखदार या पूर्व पुलिसकर्मी क्यों न हो, उसे कानून के दायरे में लाकर कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। इस वीभत्स हत्याकांड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अहंकार और सामाजिक प्रतिष्ठा के झूठे पाखंड में इंसानियत किस हद तक गिर सकती है।