5 पीढ़ियों और 140 सालों से लगातार एक ही रेजिमेंट '1 हॉर्स' में देश सेवा कर रहा है यह जांबाज परिवार

5 पीढ़ियों और 140 सालों से लगातार एक ही रेजिमेंट '1 हॉर्स' में देश सेवा कर रहा है यह जांबाज परिवार

हरियाणा की माटी ने देश को एक से बढ़कर एक वीर सपूत दिए हैं, जिन्होंने अपनी बहादुरी और देशभक्ति से दुनिया भर में भारत का मान बढ़ाया है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के झज्जर जिले का एक छोटा सा गोछी गांव इन दिनों देश भर में विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है। इस गांव के प्रतिष्ठित अहलावत परिवार ने भारतीय सेना के इतिहास में एक ऐसा अनूठा और दुर्लभ रिकॉर्ड कायम किया है, जिसकी मिसाल मिलना पूरी दुनिया में बेहद कठिन है। हाल ही में 5 सितंबर को लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत के औपचारिक रूप से कमीशंड होने के साथ ही, इस गौरवशाली परिवार ने भारतीय सेना की बेहद प्रतिष्ठित और पुरानी बख्तरबंद रेजिमेंट '1 हॉर्स' (जिसे 'स्किनर्स हॉर्स' के नाम से भी जाना जाता है) के साथ अपने 140 साल के गौरवशाली और अटूट सफर को पूरा कर लिया है। एक ही परिवार की लगातार पांच पीढ़ियों तक बिना किसी अंतराल के एक ही रेजिमेंट में देश की रक्षा के लिए समर्पित रहना सैन्य परंपरा का वह स्वर्णिम अध्याय है, जो हर भारतीय के सीने को गर्व से चौड़ा कर देता है।

पांच पीढ़ियों और 140 साल का यह अद्भुत सैन्य सफर क्या है

भारतीय सेना के इतिहास में यह अपनी तरह का एक अकेला और बेहद दुर्लभ मामला है जहां किसी एक ही परिवार के पुरुष सदस्यों ने ब्रिटिश काल से लेकर स्वतंत्र भारत के आधुनिक सैन्य दौर तक लगातार पांच पीढ़ियों तक एक ही यूनिट को अपनी सेवाएं दी हैं। '1 हॉर्स' या 'स्किनर्स हॉर्स' भारतीय सेना की सबसे पुरानी और वीरता के लिए जानी जाने वाली कैवलरी यानी आर्मर्ड रेजिमेंट्स में शुमार की जाती है, जिसके नाम कई ऐतिहासिक युद्धों और विजयों का इतिहास जुड़ा हुआ है। अहलावत परिवार के इस अटूट सिलसिले की शुरुआत ब्रिटिश राज के समय से हुई थी, जब परिवार के बुजुर्गों ने इस रेजिमेंट में भर्ती होकर अपनी वीरता का लोहा मनवाया था। उसके बाद से जैसे-जैसे समय बीतता गया, पिता के बाद पुत्र और फिर उनके पुत्र इस परंपरा को आगे बढ़ाते चले गए। इस रेजिमेंट के साथ परिवार का यह रिश्ता केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उनकी जीवनशैली, उनके संस्कारों और मातृभूमि के प्रति उनकी अगाध निष्ठा का पर्याय बन चुका है।

लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत के कमीशंड होने से पूरा हुआ गौरवशाली मील का पत्थर

इस पांच पीढ़ी की लंबी परंपरा के सबसे नए और युवा हस्ताक्षर के रूप में लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत ने 5 सितंबर को भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कदम रखकर परिवार के इस इतिहास को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। पासिंग आउट परेड के दौरान जब उन्होंने अपनी वर्दी पर सितारे सजाए और '1 हॉर्स' रेजिमेंट को ज्वाइन करने का गौरव हासिल किया, तो पूरा गोछी गांव जश्न में डूब गया। परिवार के बुजुर्गों का सपना था कि उनके घर का यह युवा भी अपने पुरखों के नक्शेकदम पर चलते हुए उसी रेजिमेंट का हिस्सा बने, जिसके इतिहास में उनके परिवार का खून और पसीना शामिल है। लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत ने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और अटूट लगन के बल पर यह साबित कर दिया है कि जब देशभक्ति खून में दौड़ती है, तो रास्ते की हर चुनौती छोटी पड़ जाती है। उनके इस मुकाम पर पहुंचने से न केवल उनके माता-पिता और परिवार का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है, बल्कि पूरे हरियाणा प्रदेश और देश के युवाओं के लिए वे प्रेरणा के एक नए प्रतीक बन गए हैं।

गोछी गांव और हरियाणा के सैन्य योगदान की ऐतिहासिक गाथा

हरियाणा राज्य को वैसे भी वीरों की भूमि कहा जाता है, जहां के घर-घर से युवा देश की सीमाओं की रक्षा के लिए सेना में भर्ती होते हैं, लेकिन झज्जर के गोछी गांव के अहलावत परिवार की यह कहानी इन सब में सबसे अनूठी और ऐतिहासिक है। एक ही गांव और एक ही परिवार से पांच पीढ़ियों का लगातार सेना में अधिकारी और जवान के रूप में सेवा देना इस बात का प्रमाण है कि इस परिवार की रग-रग में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रेम कूट-कूट कर भरा हुआ है। जब गांव के लोगों को यह पता चला कि उनके गांव के लाल ने 140 साल पुरानी इस ऐतिहासिक परंपरा की पांचवीं कड़ी को सफलतापूर्वक जोड़ दिया है, तो पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन गया। ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत और मिठाइयां बांटकर इस महान उपलब्धि का जश्न मनाया गया, जो यह दर्शाता है कि हमारे देश में वर्दी पहनने वाले और देश के लिए जान देने वाले वीरों को समाज में कितना ऊंचा और आदरणीय स्थान दिया जाता है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है अहलावत परिवार की यह विरासत

लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत और उनके पूरे अहलावत परिवार की यह 140 साल लंबी यात्रा आने वाली कई पीढ़ियों के लिए देशभक्ति और समर्पण का एक जीवंत पाठ बन चुकी है। आज के आधुनिक दौर में जहां करियर के कई अन्य आकर्षक विकल्प युवाओं के सामने मौजूद रहते हैं, वहीं इस परिवार ने अपनी पारिवारिक विरासत और सैन्य संस्कृति को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देश सेवा को ही अपना एकमात्र धर्म माना है। '1 हॉर्स' रेजिमेंट के इतिहास में अहलावत परिवार का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है, और इनकी यह गाथा उन तमाम युवाओं को प्रेरित करती रहेगी जो देश की रक्षा के लिए सेना में जाने का सपना देखते हैं। गोछी गांव के इस सपूत की यह कहानी भारत की उस मजबूत और गौरवशाली सैन्य रीढ़ को दर्शाती है, जिसके दम पर आज 140 करोड़ देशवासी चैन की नींद सोते हैं और अपने भविष्य को सुरक्षित महसूस करते हैं।