400 पदक और 336 सर्टिफिकेट! 76 साल के बुजुर्ग रामकिशन हैं असली 'मेडल मशीन', अब पद्मश्री और गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने का है बड़ा लक्ष्य

400 पदक और 336 सर्टिफिकेट! 76 साल के बुजुर्ग रामकिशन हैं असली 'मेडल मशीन', अब पद्मश्री और गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने का है बड़ा लक्ष्य

उम्र सिर्फ एक संख्या है और अगर आपके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो, तो बड़ी से बड़ी बाधाएं भी आपके कदमों में झुक जाती हैं। इस बात को एक बार फिर से सच साबित कर दिखाया है 76 साल के एक ऐसे ऊर्जावान और जुनूनी बुजुर्ग ने, जिनकी उपलब्धियों के बारे में जानकर आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। हरियाणा के सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले रामकिशन ने अपनी उम्र के इस पड़ाव पर खेल के मैदान में ऐसा इतिहास रच दिया है कि आज हर कोई उन्हें 'मेडल मशीन' के नाम से पुकार रहा है। अपने अब तक के सफर में कुल 400 से अधिक शानदार पदक और 336 से ज्यादा प्रमाण पत्र हासिल कर चुके रामकिशन किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनकी इस असाधारण फिटनेस और अटूट दृढ़ संकल्प को देखकर अब देश भर से यह मांग उठ रही है कि उनके इस अमूल्य योगदान के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से नवाजा जाए और साथ ही उनका नाम प्रतिष्ठित 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज किया जाए।

साधारण जीवन से लेकर एथलेटिक्स के शिखर तक का सफर

76 वर्ष की उम्र में जहां ज्यादातर लोग अपनी शारीरिक कमजोरियों और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते हुए विश्राम का जीवन चुनते हैं, वहीं रामकिशन हर रोज सुबह सूरज उगने से पहले मैदान पर पसीना बहाते नजर आते हैं। उनके जीवन का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है। तमाम पारिवारिक जिम्मेदारियों, संघर्षों और आर्थिक तंगियों को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने कभी भी अपने खेल और फिटनेस से समझौता नहीं किया। जवानी के दिनों से ही दौड़ने और खेलकूद के प्रति उनका जो अटूट प्रेम शुरू हुआ था, वह उम्र के बढ़ने के साथ-साथ और अधिक मजबूत होता चला गया। उन्होंने अपनी नियमित दिनचर्या, खान-पान के सख्त अनुशासन और कड़ी मेहनत के दम पर यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो उम्र कभी भी आपके सपनों के आड़े नहीं आ सकती है। आज वे क्षेत्र के युवाओं के लिए एक चलते-फिरते प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं जो हर पीढ़ी को यह सिखाते हैं कि सेहत और मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता है।

400 मेडल और 336 सर्टिफिकेट का यह अनोखा और ऐतिहासिक रिकॉर्ड

रामकिशन द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड्स की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि कोई भी सामान्य इंसान देखकर हैरान रह जाएगा। उन्होंने राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में भाग लिया है और हर जगह अपनी धाक जमाई है। उनके घर की दीवारें और शोकेस उन चमकदार पदकों से सजे हुए हैं जिन्हें उन्होंने अपनी मेहनत और पसीने के बल पर जीता है। उनके पास कुल मिलाकर 400 से अधिक पदक और 336 प्रमाण पत्रों का ऐसा अनमोल खजाना है, जो भारत के खेल इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह दर्ज हो चुका है। वे दौड़, लंबी कूद और अन्य ट्रैक एंड फील्ड इवेंट्स में लगातार हिस्सा लेते रहे हैं और अपने आयु वर्ग में हमेशा से ही चैंपियन बने रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि लगन सच्ची हो तो सफलता उम्र की मोहताज नहीं होती है और आप किसी भी पड़ाव पर इतिहास रच सकते हैं।

पद्मश्री सम्मान और गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने की चल रही है खास तैयारी

रामकिशन की इन असाधारण खेल उपलब्धियों और देश का मान बढ़ाने वाले उनके योगदान को अब स्थानीय लोगों, खेल प्रेमियों और विभिन्न संगठनों द्वारा बड़े मंच पर पहचान दिलाने की कवायद तेज हो चुकी है। उनके चाहने वाले और खेल विशेषज्ञ इस बात की पुरजोर पैरवी कर रहे हैं कि सरकार को उनके इस अद्वितीय सफर का संज्ञान लेते हुए उन्हें देश के प्रतिष्ठित 'पद्मश्री' पुरस्कार से सम्मानित करना चाहिए। इसके साथ ही, उनके 400 से अधिक पदकों के इस ऐतिहासिक आंकड़े को आधिकारिक तौर पर 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज कराने के लिए भी दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं और आवेदन प्रक्रिया पर काम चल रहा है। यदि यह सपना सच होता है, तो यह न केवल रामकिशन के व्यक्तिगत जीवन के लिए बल्कि पूरे देश और वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक गर्व का क्षण होगा, जो दुनिया भर में भारत का सिर ऊंचा कर देगा।

आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने 'मेडल मशीन' रामकिशन

आज के इस भागदौड़ भरे दौर में जहां युवा छोटी-छोटी असफलताओं से निराश हो जाते हैं और शारीरिक रूप से कमजोर होने लगते हैं, वहां 76 साल के रामकिशन एक जीवित मिसाल बनकर खड़े हैं। उनका जीवन हमें यह सीख देता है कि जीवन में चाहे जितनी भी मुश्किलें आएं, अगर आपके भीतर आगे बढ़ने की ललक है, तो आप हर चुनौती को पार कर सकते हैं। वे आज भी पूरी शिद्दत के साथ अभ्यास करते हैं और नए प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए अपनी फिटनेस पर पूरा ध्यान देते हैं। उनके इस जज्बे ने यह बता दिया है कि उम्र केवल एक नंबर है और असली जवानी इंसान के हौसलों में बसती है। देश के हर कोने से उन्हें मिल रही बधाइयां और सम्मान इस बात की गवाही दे रहे हैं कि सच्चा खिलाड़ी कभी बूढ़ा नहीं होता, वह अपने काम से हमेशा अमर रहता है।

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