हरियाणा की 23.5 लाख महिलाओं को हर महीने मिलेंगे ₹2100, सीएम सैनी ने खोला पोर्टल; जानिए नए नियम
हरियाणा सरकार ने राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त, स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ पंडित दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के दायरे में व्यापक विस्तार का औपचारिक ऐलान कर दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महेंद्रगढ़ की पावन धरा से योजना के दूसरे चरण के लिए आधिकारिक ऑनलाइन आवेदन पोर्टल का विधिवत शुभारंभ किया। इस ऐतिहासिक नीतिगत फैसले के तहत अब उन सभी परिवारों की पात्र महिलाओं को भी हर महीने ₹2,100 की सीधी नकद आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय ₹1,80,000 (एक लाख अस्सी हजार रुपये) तक है। इस विस्तार से राज्य भर की लाखों गृहणियों और माताओं-बहनों के चेहरों पर खुशी की नई लहर दौड़ गई है, क्योंकि अब उन्हें अपनी छोटी-मोटी व्यक्तिगत और घरेलू जरूरतों के लिए किसी अन्य पर आश्रित नहीं रहना पड़ेगा।
23.50 लाख के पार पहुंचेगा कुल लाभार्थी आंकड़ा: 13.50 लाख नई महिलाओं को सीधा लाभ
इस महत्वपूर्ण संशोधन से पूर्व दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ केवल उन्हीं परिवारों को मिल रहा था जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे कम थी, जिसके तहत लगभग 10 लाख महिलाएं नियमित रूप से ₹2100 की मासिक किस्त प्राप्त कर रही थीं। आय सीमा को ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹1.80 लाख किए जाने के बाद परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के सत्यापित आंकड़ों के अनुसार कुल 17 लाख 13 हजार 447 महिलाएं इस नए पात्रता दायरे में आ गई हैं। इनमें से लगभग साढ़े तीन लाख महिलाएं पहले से ही अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन या कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा रही हैं। नतीजतन, प्रशासनिक छंटनी और सत्यापन के बाद राज्य की लगभग 13 लाख 50 हजार नई महिलाओं के खातों में हर महीने ₹2100 की सीधी सहायता राशि पहुंचने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस प्रकार राज्य भर में इस फ्लैगशिप योजना के कुल लाभार्थियों की संख्या अब बढ़कर 23.50 लाख के विशाल आंकड़े को छू लेगी, जिससे प्रत्येक लाभार्थी महिला को प्रतिवर्ष ₹25,200 का ठोस वित्तीय संबल मिलेगा।
25 सितंबर पंडित दीन दयाल जयंती से खाते में आएगी राशि: सत्यापन प्रक्रिया तेज
महेंद्रगढ़ में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में पोर्टल का बटन दबाकर शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा चुनावी घोषणाओं से आगे बढ़कर जमीनी धरातल पर पारदर्शी सेवा देना है। सरकार ने प्रशासनिक मशीनरी को निर्देशित किया है कि आगामी 25 सितंबर को पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती के पावन अवसर पर नए लाभार्थियों के बैंक खातों में योजना की पहली किस्त डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से ट्रांसफर करने की तैयारी पूरी रखी जाए। तब तक प्रदेश भर के कॉमन सर्विस सेंटरों (सीएससी), अंत्योदय केंद्रों और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए पात्र महिलाओं से आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं और परिवार पहचान पत्र डेटाबेस के माध्यम से त्वरित पात्रता सत्यापन का कार्य चौबीसों घंटे युद्धस्तर पर संचालित किया जा रहा है ताकि किसी भी वास्तविक पात्र बहन का नाम सूची से छूटने न पाए।
वित्तीय मजबूती की मिसाल: बजट में ₹6,500 करोड़ का भारी-भरकम वित्तीय प्रावधान
दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के निरंतर विस्तार को सुगम बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने अपने राज्य बजट 2026-27 में वित्तीय संसाधनों की कोई कमी नहीं रहने दी है। चालू वित्त वर्ष में इस योजना के लिए अकेले ₹6,500 करोड़ का विशाल बजटीय आवंटन किया गया है, जो योजना के आरंभिक चरण में रखे गए ₹5,000 करोड़ के बजट से ₹1,500 करोड़ अधिक है। राज्य सरकार ने संपूर्ण सामाजिक कल्याण एवं पोषण क्षेत्र के लिए कुल ₹20,110 करोड़ का ऐतिहासिक बजट निर्धारित किया है, जिसका लगभग एक-तिहाई हिस्सा अकेले लाडो लक्ष्मी योजना के सफल क्रियान्वयन पर व्यय किया जा रहा है। यह वित्तीय समर्पण दर्शाता है कि सरकार आधी आबादी के सामाजिक उत्थान और पोषण सुरक्षा को अपनी प्राथमिक आर्थिक नीतियों के केंद्र में रखकर काम कर रही है।
10 किस्तों में ₹2042 करोड़ वितरित: डीबीटी प्रणाली से बिचौलियों का खेल पूरी तरह खत्म
परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला ने आधिकारिक आंकड़े साझा करते हुए बताया कि 10 अगस्त 2026 तक राज्य सरकार लाडो लक्ष्मी योजना की कुल 10 सफल किस्तों के माध्यम से 9.98 लाख पंजीकृत महिलाओं के बैंक खातों में ₹2,042.31 करोड़ की विशाल धनराशि बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सीधे ट्रांसफर कर चुकी है। उन्होंने रेखांकित किया कि आधुनिक जनसांख्यिकीय डेटाबेस और डीबीटी (DBT) व्यवस्था के समावेश से सरकारी खजाने से निकला एक-एक रुपया बिना किसी बिचौलिए या दलाली के सीधे महिलाओं के आधार-लिंक बैंक खातों में पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रशासनिक अनुशासन का यह जीवंत प्रमाण है कि जो नीतिगत वादा सरकार ने मंचों से जनता के बीच किया था, उसे निर्धारित समय-सीमा के भीतर धरातल पर क्रियान्वित कर दिखाया है।
देश भर के राज्यों में महिला सहायता योजनाओं का तुलनात्मक विश्लेषण
महिला सशक्तीकरण के राष्ट्रीय परिदृश्य पर नजर डालें तो हरियाणा की दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना वित्तीय सहायता के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शीर्ष स्थान पर खड़ी दिखाई देती है। हरियाणा सरकार द्वारा प्रति माह दी जा रही ₹2,100 की सहायता राशि पड़ोसी और अन्य बड़े राज्यों की तुलना में काफी अधिक है। तुलनात्मक रूप से, पंजाब में 'मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना' के तहत सामान्य महिलाओं को ₹1,000 और अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को ₹1,500 मासिक दिए जाते हैं। हिमाचल प्रदेश की 'इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि' के अंतर्गत पात्र महिलाओं को ₹1,500 मासिक मिलते हैं, जबकि कर्नाटक की चर्चित 'गृह लक्ष्मी योजना' में ₹2,000 प्रति माह की आर्थिक मदद दी जा रही है। इसके अतिरिक्त, विवाह सहायता के क्षेत्र में भी जहां हिमाचल प्रदेश की मुख्यमंत्री शगुन योजना में ₹31,000 दिए जाते हैं, वहीं हरियाणा अपनी मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना के तहत विभिन्न श्रेणियों के आधार पर ₹31,000 से लेकर ₹71,000 तक की सम्मानजनक एकमुश्त सहायता बेटियों के विवाह पर उपलब्ध करा रहा है।
जिलावार लाभार्थी परिदृश्य: फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत रहे सबसे आगे
हरियाणा में ₹1.80 लाख तक की वार्षिक आय सीमा के तहत आने वाली 17 लाख से अधिक पात्र महिलाओं का जिलावार वितरण राज्य के क्षेत्रीय विकास और जनसांख्यिकी का संतुलित चित्र प्रस्तुत करता है। औद्योगिक और घनी आबादी वाले जिलों में लाभार्थियों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। फरीदाबाद जिला 2,22,562 पात्र महिलाओं के साथ पूरे प्रदेश में पहले पायदान पर है, जबकि सोनीपत में 1,18,878 और पानीपत में 1,09,424 महिलाएं इस दायरे में आती हैं। इसके अतिरिक्त करनाल में 1,05,717, पलवल में 1,01,652, गुरुग्राम में 92,017, यमुनानगर में 77,605, जींद में 73,152, नूंह में 69,760, सिरसा में 69,397, झज्जर में 67,513, हिसार में 67,177, कैथल में 66,518, भिवानी में 66,014, अंबाला में 62,612, रोहतक में 60,254, रेवाड़ी में 52,685, कुरुक्षेत्र में 47,982, महेंद्रगढ़ में 46,709, फतेहाबाद में 46,379, पंचकूला में 37,472, हांसी में 27,809 और चरखी-दादरी में 24,159 पात्र महिलाएं चिन्हित की गई हैं। यह जिलावार आंकड़े दर्शाते हैं कि शहरी बस्तियों से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक राज्य सरकार की कल्याणकारी नीतियों की पहुंच समान और निष्पक्ष रूप से सुनिश्चित हो रही है।