दिनभर लुढ़कने के बाद शाम को रॉकेट बना सोना, ₹3000 उछला गोल्ड और चांदी ₹6200 चढ़ी; जानें दिवाली तक का नया टारगेट
देश के प्रमुख सर्राफा बाजारों में गुरुवार का कारोबारी सत्र निवेशकों और आभूषण खरीदारों के लिए किसी थ्रिलर फिल्म की तरह साबित हुआ। सुबह के शुरुआती कारोबार से लेकर दोपहर के सत्र तक बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में लगातार सुस्ती और नरमी का माहौल देखा जा रहा था, जिससे बाजार में मंदी की आशंकाएं गहराने लगी थीं। हालांकि शाम 6 से 7 बजे के बीच अचानक ट्रेडिंग टर्मिनल्स पर ऐसी तूफानी लिवाली लौटी जिसने बाजार विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया। महज चंद घंटों के भीतर पीली धातु में प्रति 10 ग्राम लगभग 3,000 रुपये का जोरदार उछाल दर्ज किया गया, जबकि सफेद धातु यानी चांदी ने प्रति किलोग्राम करीब 6,200 रुपये की जबरदस्त छलांग लगाई। इस अप्रत्याशित तेजी के साथ घरेलू बाजार में सोना चढ़कर 1,53,444 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए स्तर पर पहुंच गया, वहीं चांदी की कीमत भी उछलकर 2,38,678 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड दायरे में दर्ज की गई।
यूएस फेड रेट हाइक के बावजूद सोना क्यों बना रॉकेट: बाजार का चौंकाने वाला समीकरण
सर्राफा बाजार के इस ताजा घटनाक्रम ने वित्तीय विश्लेषकों और आम निवेशकों दोनों के सामने एक बड़ा तकनीकी सवाल खड़ा कर दिया है। अर्थशास्त्र के बुनियादी नियमों के तहत जब भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी (Rate Hike) का ऐलान करता है, तब अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड मजबूत होती है। आम तौर पर ऐसी स्थिति में बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने और चांदी में मुनाफावसूली या तेज गिरावट देखने को मिलती है। मगर इस बार ब्याज दर बढ़ने के बावजूद कीमती धातुओं में भारी तेजी क्यों आई, यह इस समय का सबसे बड़ा सवाल है। बाजार के इनसाइडर्स का मानना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति की स्थायी चिंताएं और केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार की जा रही सोने की आक्रामक खरीद ने फेड के दबाव को पूरी तरह बेअसर कर दिया। निवेशकों ने दरों में बढ़ोतरी को मंदी के अग्रदूत के रूप में देखा और सुरक्षित निवेश (Safe-Haven Buying) के तहत सोने में अपनी पूंजी झोंक दी।
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का बड़ा दावा: खरीदारी का यह है सुनहरा मौका
सोने और चांदी के इस अप्रत्याशित यू-टर्न और भविष्य की चाल को डिकोड करते हुए केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने स्थिति को विस्तार से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि दिन के पहले हिस्से में जो गिरावट नजर आ रही थी, वह केवल एक अस्थाई तकनीकी करेक्शन (Technical Correction) था, जिसका इस्तेमाल बड़े संस्थागत निवेशकों ने निचले स्तरों पर नई पोजिशन बनाने के लिए किया। अजय केडिया के अनुसार, मौजूदा समय में जो निवेशक सोने और चांदी में लंबी अवधि के लिए प्रवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट से उबरने का दौर खरीदारी का एक बेहतरीन अवसर प्रस्तुत करता है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत सख्ती का दौर अपने चरम पर पहुंचता है, बाजार अक्सर पहले ही आगे की अनिश्चितताओं को डिस्काउंट करना शुरू कर देता है, और आज शाम की तेजी इसी बड़े बदलाव का साफ संकेत है।
त्योहारी सीजन और दिवाली तक कहां जा सकते हैं भाव: जानिए नए संभावित टारगेट
आगामी त्योहारी और शादियों के सीजन को ध्यान में रखते हुए आभूषण प्रेमियों और रिटेल निवेशकों के मन में यह सवाल सबसे ऊपर है कि दिवाली 2026 तक सोने और चांदी के भाव किस स्तर पर पहुंच सकते हैं। विशेषज्ञ विश्लेषण के मुताबिक, भारत में धनतेरस और दिवाली के दौरान सोने की भौतिक मांग अपने चरम पर होती है। अजय केडिया के अनुसार, यदि वैश्विक अनिश्चितताएं और करेंसी बाजार की उठापटक इसी तरह जारी रही, तो घरेलू स्तर पर सोना दिवाली तक अपने मौजूदा स्तर से और ऊपर निकलकर नए मनोवैज्ञानिक स्तरों को छू सकता है। वहीं चांदी, जो अब केवल एक कीमती धातु नहीं बल्कि सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) कंपोनेंट्स और 5G टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अनिवार्य कच्चा माल बन चुकी है, उसमें सोने के मुकाबले कहीं अधिक तेज उछाल की संभावना बनी हुई है। औद्योगिक मांग की यह कमी चांदी को आने वाले महीनों में नए ऐतिहासिक शिखरों की ओर धकेल सकती है।
रिटेल खरीदारों और निवेशकों के लिए विशेषज्ञ रणनीति: कैसे करें निवेश की योजना
सर्राफा बाजार के मौजूदा हालात को देखते हुए बाजार के जानकारों ने खुदरा खरीदारों को एकमुश्त मोटी रकम लगाने के बजाय सिस्टेमैटिक तरीके से खरीदारी करने की सलाह दी है। जानकारों का कहना है कि उच्च स्तरों पर बाजार में अस्थिरता (Volatility) हमेशा बनी रहती है, इसलिए निवेशकों को किसी भी आकस्मिक गिरावट पर चरणबद्ध तरीके से गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF), सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या डिजिटल गोल्ड जैसे पारदर्शी विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए। जो उपभोक्ता शादियों या आगामी त्योहारों के लिए वास्तविक आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें भी कीमतों में आने वाले किसी भी छोटे डिप्स का इंतजार कर आंशिक खरीदारी करते रहनी चाहिए। यह रणनीति बाजार के अचानक आने वाले उछाल के जोखिम से खरीदारों को सुरक्षित रखने में सबसे कारगर साबित होगी।