GST fraud in Jharkhand: ED की रांची सहित आठ ठिकानों पर छापेमारी, अब तक की पूरी जानकारी
- by Archana
- 2025-08-07 15:13:00
News India Live, Digital Desk: GST fraud in Jharkhand: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड में करोड़ों रुपये के जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े एक बड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की है। जीएसटी चोरी और मनरेगा घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में ईडी ने झारखंड के रांची, गुमला, हजारीबाग के साथ-साथ ओडिशा, दिल्ली, बंगाल और बिहार में कुल आठ ठिकानों पर छापेमारी की है। ये छापेमारी एक सिंडिकेट के खिलाफ की जा रही है, जो नकली बिलों और जाली कंपनियों के माध्यम से जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) धोखाधड़ी में शामिल है। इस मामले की जड़ें 100 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट रैकेट से जुड़ी हैं, जिसका मुख्य आरोपी विकास गुप्ता और उसके सहयोगी हैं।
यह कार्रवाई ईडी की झारखंड जोनल कार्यालय द्वारा झारखंड सरकार के शिकायत-आधारित खुफिया इनपुट के आधार पर शुरू की गई है, जिसमें नकली चालान रैकेट, शेल कंपनियों, जाली इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और जीएसटी चोरी के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग की जानकारी दी गई थी। फर्जी जीएसटी चालान जारी कर सरकार को ₹100 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाया गया था। यह आपराधिक षड्यंत्र सिर्फ जीएसटी धोखाधड़ी तक सीमित नहीं था, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों को भी अंजाम दिया गया था, जिसके माध्यम से अवैध धन को वैध बनाने का प्रयास किया गया था।
जांच में यह भी पता चला है कि इस सिंडिकेट द्वारा उत्पन्न किए गए जीएसटी क्रेडिट का उपयोग रांची और झारखंड के अन्य हिस्सों में खनन, लॉजिस्टिक्स और शराब व्यापार जैसे क्षेत्रों में कुछ प्रमुख कंपनियों के द्वारा भी किया गया था, जिसका उद्देश्य उनकी टैक्स देनदारियों को कम करना था। अब तक की कार्रवाई में, ईडी ने आरोपी के घर से महत्वपूर्ण आपत्तिजनक दस्तावेज, हार्ड डिस्क और डिजिटल उपकरणों सहित साक्ष्य एकत्र किए हैं, जो इस धोखाधड़ी के पैमाने और नेटवर्क को समझने में सहायक होंगे।
छापेमारी के दौरान कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया है। इस पूरे ऑपरेशन का उद्देश्य जीएसटी धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल लोगों की पहचान करना और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है, ताकि इस तरह के वित्तीय अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके। ईडी का मानना है कि यह रैकेट अंतर-राज्यीय स्तर पर फैला हुआ था, जो विभिन्न राज्यों में फर्जी कंपनियों और बिलिंग के माध्यम से सक्रिय था।
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