राजस्थान वालों के लिए जबरदस्त खुशखबरी! जयपुर से गुजरेगा 342 KM लंबा नया एक्सप्रेसवे, पर 24 गांवों में जमीन खरीदना-बेचना हुआ बंद!

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राजस्थान के विकास को एक नई रफ्तार देने के लिए सरकार एक के बाद एक बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है. इसी कड़ी में, राज्य को एक और नए एक्सप्रेसवे का तोहफा मिलने जा रहा है, जो लाखों लोगों के लिए सफर को पहले से कहीं ज़्यादा आसान और तेज़ बना देगा. इस नए एक्सप्रेसवे का नाम है ब्यावर-भरतपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे. लेकिन इस खुशखबरी के साथ ही जयपुर के 24 गांवों के लिए एक बड़ा और अहम आदेश भी जारी किया गया है.

सबसे बड़ी खबर: 24 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक

जैसे ही इस एक्सप्रेसवे का रास्ता फाइनल हुआ है, सरकार ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसी के चलते जयपुर जिले की फागी और माधोराजपुरा तहसील के 24 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है.

जिला कलेक्टर जितेंद्र कुमार सोनी ने यह आदेश जारी किया है, ताकि एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण का काम आसानी से और बिना किसी गड़बड़ी के हो सके. अनुमान है कि इन 24 गांवों की करीब 400 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण इस प्रोजेक्ट के लिए किया जा सकता है. जल्द ही इन गांवों में सर्वे का काम भी शुरू कर दिया जाएगा.

कहां से कहां तक जाएगा यह एक्सप्रेसवे? (The Route)

यह 342 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे राजस्थान के कई बड़े जिलों को आपस में जोड़ेगा.

  • मुख्य जिले: अजमेर, जयपुर, टोंक, दौसा, और सवाई माधोपुर.
  • शुरुआत और अंत: यह एक्सप्रेसवे ब्यावर में नेशनल हाईवे-58 से शुरू होगा और भरतपुर में जाकर नेशनल हाईवे-21 से जुड़ जाएगा.
  • रास्ते में आने वाले प्रमुख शहर: भिनाय, केकड़ी, मसूदा, फागी, माधोराजपुरा, लालसोट, निवाई, टोडारायसिंह और गंगापुर सिटी जैसे कई शहर इसके रूट पर आएंगे.

कितना बड़ा और महंगा है यह प्रोजेक्ट?

यह राजस्थान के सबसे बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स में से एक होने वाला है.

  • कुल लंबाई: 342 किलोमीटर.
  • अनुमानित लागत: 14,010 करोड़ रुपये.
  • कुल जमीन अधिग्रहण: पूरे एक्सप्रेसवे के लिए लगभग 3,175 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा.

इस एक्सप्रेसवे के बनने से न सिर्फ ब्यावर से भरतपुर के बीच यात्रा का समय घटेगा, बल्कि रास्ते में आने वाले सभी जिलों और गांवों में विकास को नए पंख लगेंगे. यह प्रोजेक्ट राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है.