गोरखपुर को मिलेगी जलभराव से मुक्ति, 12 KM लंबा नाला बनेगा 50,000 लोगों के लिए 'वरदान'

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अगर आप गोरखपुर के उन इलाकों में रहते हैं जहाँ हर साल बारिश के मौसम में सड़कों का तालाब बन जाना एक आम बात है, तो यह खबर आपके लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आई है। नगर निगम ने शहर के तीन वार्डों की इस सबसे पुरानी और बड़ी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एक मेगा प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है।

₹107 करोड़ की भारी-भरकम लागत से गुलरिहा थाने से लेकर चिलुआताल तक 12.36 किलोमीटर लंबा एक पक्का (आरसीसी) नाला बनाया जाएगा। यह विशाल नाला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई 'अर्बन फ्लड एवं स्टार्म वाटर ड्रेनेज योजना' के तहत बनाया जा रहा है, जिसका सीधा मकसद शहरों को जलभराव से मुक्त करना है।

किन इलाकों को मिलेगी राहत?

यह नाला एक तरह से इन क्षेत्रों के लिए 'लाइफलाइन' साबित होगा। इसकी शुरुआत गुलरिहा थाने से होगी और यह कंचनपुर चौराहा, पुरैना पुलिया, बजरहा पुलिया, मिर्जापुर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरते हुए चिलुआताल में गिरेगा। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद इन इलाकों में रहने वाले 50,000 से ज़्यादा लोगों को हर साल की पानी भरने की मुसीबत से स्थायी छुटकारा मिल जाएगा।

कितना शक्तिशाली होगा यह नाला?

यह कोई मामूली नाला नहीं होगा। अधिकारियों के अनुसार, इसकी क्षमता 3,200 मिलियन लीटर प्रति दिन (MLD) होगी। आसान भाषा में समझें तो यह इतना शक्तिशाली होगा कि भारी बारिश के पानी के साथ-साथ घरों और गलियों से निकलने वाले सीवरेज के पानी को भी बिना किसी रुकावट के तेजी से बाहर निकाल देगा।

इसके निर्माण के दौरान सभी छोटी-छोटी नालियों को इससे जोड़ा जाएगा और इसकी ढलान को वैज्ञानिक तरीके से सेट किया जाएगा, ताकि भविष्य में पानी रुकने की कोई गुंजाइश ही न बचे।

भविष्य की प्लानिंग भी है तैयार

नगर निगम इस प्रोजेक्ट को सिर्फ आज की ज़रूरत के हिसाब से नहीं, बल्कि भविष्य को ध्यान में रखकर बना रहा है। इस नाले को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) की आने वाली बड़ी परियोजनाओं, जैसे राप्ती टाउनशिप और स्पोर्ट्स सिटी, के ड्रेनेज सिस्टम से भी जोड़ने की योजना है।

नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने साफ निर्देश दिए हैं कि नाले को बनाते समय न सिर्फ मौजूदा आबादी, बल्कि आने वाले 50 सालों की बढ़ती आबादी और पानी के बहाव का भी ध्यान रखा जाए।

यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद गोरखपुर के उत्तरी हिस्से की जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह से बदल जाएगी और लोगों को हर साल बरसात में होने वाली परेशानी से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।