Google Maps की छुट्टी? इस स्वदेशी ऐप ने कर दिया बड़ा धमाका, अब बस-मेट्रो का सफर होगा एकदम झक्कास
News India Live, Digital Desk : आज के दौर में हम बिना मैप्स (Maps) के एक गली से दूसरी गली जाने में भी कतराते हैं। अब तक हम सब 'Google Maps' के इतने आदि हो चुके हैं कि हमें लगता था कि इसका कोई विकल्प हो ही नहीं सकता। लेकिन आज 31 दिसंबर 2025 की दोपहर, जब हम नए साल 2026 में कदम रखने जा रहे हैं, तब हमारे पास एक और जबरदस्त 'देसी' विकल्प मौजूद है मैपल्स (Mappls)।
जी हाँ, मैपमायइंडिया (MapmyIndia) का यह ऐप अब सिर्फ़ रास्ता नहीं दिखाता, बल्कि यह भारत के उन लोगों के लिए वरदान साबित होने वाला है जो हर रोज़ बस और मेट्रो (Metro) के धक्कों से परेशान रहते हैं।
क्यों खास है मैपल्स का नया अपडेट?
अक्सर मेट्रो या बस से सफर करते वक्त हम ये सोचकर परेशान रहते हैं कि "कौन से प्लेटफॉर्म पर जाना है?" या "मेट्रो कहाँ बदलनी है?" गूगल मैप्स भी कई बार भारतीय बस स्टॉप्स और छोटी गलियों के मामले में थोड़ा पिछड़ जाता है। इसी बात का फायदा उठाया है 'मैपल्स' ने।
इस स्वदेशी ऐप में अब ऐसे फीचर्स जोड़े गए हैं जो आपको बताएंगे कि—
- आपको ठीक किस पॉइंट पर बस पकड़नी है (Bus Catch Point)।
- अगर आप मेट्रो बदल रहे हैं, तो इंटरचेंज स्टेशन पर आपको कहाँ से मुड़ना है और कहाँ ट्रेन मिलेगी।
- सबसे बढ़िया बात ये कि अब आप इस ऐप के जरिए अपनी बस और मेट्रो की टिकट भी सीधे बुक कर सकते हैं। यानी अब न खिड़की पर खड़े होकर लंबी लाइनों का इंतज़ार करना होगा और न ही चेंज के लिए परेशान होना पड़ेगा।
गूगल मैप्स को क्यों मिल रही है टक्कर?
भारत जैसे देश में गूगल मैप्स काफी सटीक काम करता है, लेकिन भारत की हर गली-नुक्कड़ और स्थानीय भाषा के हिसाब से मैपल्स ने खुद को कहीं ज्यादा ढाल लिया है। कई यूज़र्स का कहना है कि मैपल्स भारत की सड़कों और रास्तों की छोटी-बड़ी जानकारियाँ गूगल से भी ज्यादा बारीकी से देता है।
खासकर दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर और कोलकाता जैसे महानगरों में, जहाँ हर मिनट रास्ता बदलना और नई बस ढूंढना एक सरदर्द है, वहां मैपल्स का 'पब्लिक ट्रांजिट गाइड' काफी आसान और समझने में सरल (Human-friendly) लगता है।
डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी का भरोसा
जब हम विदेशी ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो अक्सर हमारे मन में डेटा सुरक्षा (Privacy) का ख्याल आता है। मैपल्स पूरी तरह से एक हिंदुस्तानी ऐप है, और कंपनी का दावा है कि यूज़र्स का डेटा पूरी तरह सुरक्षित है। भारत में अब लोग धीरे-धीरे अपनी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से ऐप्स का चुनाव कर रहे हैं और 'लोकल के लिए वोकल' होने का यह बड़ा सबूत है।
क्या आपको इसे ट्राई करना चाहिए?
अगर आप भी हर रोज़ बस या मेट्रो से सफर करते हैं, तो साल 2026 की शुरुआत इस ऐप को आज़माकर कर सकते हैं। कम इंटरनेट स्पीड पर भी यह अच्छा काम करता है और इंटरफेस (चलने का तरीका) इतना आसान है कि कोई भी पहली बार में इसे समझ जाए।