विद्या की देवी और सुनहरी यादें, बसंत पंचमी 2026 पर अपनी राशि और बच्चों की पढ़ाई के लिए ज़रूर करें ये काम
News India Live, Digital Desk : जब ठंड थोड़ी कम होने लगती है और पेड़ों पर नई कोंपलें फूटने लगती हैं, तब समझ जाइये कि बसंत ऋतु आ गई है। बसंत पंचमी यानी वह दिन, जब हर घर में माँ सरस्वती की वंदना होती है, किताबें धूप में सजाई जाती हैं और चारों तरफ पीला रंग अपनी चमक बिखेरता है।
2026 में बसंत पंचमी का त्योहार न सिर्फ़ छात्रों के लिए बल्कि हर उस इंसान के लिए खास है जो अपने जीवन में नई ऊर्जा, बुद्धि और कला का संचार चाहता है। लेकिन अक्सर लोग उलझ जाते हैं कि पूजा का सही मुहूर्त क्या है और पूजा में क्या-क्या सामान रखना ज़रूरी है। चलिए, इसे बड़े आसान शब्दों में समझते हैं।
तारीख और शुभ मुहूर्त का पेंच (2026)
साल 2026 में बसंत पंचमी 22 जनवरी को मनाई जाएगी। अब आप कहेंगे कि तिथि कब से शुरू है? देखिए, पंचांग के हिसाब से माघ शुक्ल पंचमी तिथि 21 जनवरी की रात से ही शुरू हो जाएगी और अगले दिन यानी 22 जनवरी को पूरे दिन उदया तिथि का मान रहेगा।
पूजा के लिए सबसे अच्छा समय सुबह का माना जाता है। सुबह 07:13 से लेकर दोपहर 12:30 के बीच अगर आप माँ सरस्वती का आह्वान करते हैं, तो यह बहुत फलदायी होगा। ख़ासकर छात्रों के लिए इस मुहूर्त में पढ़ाई शुरू करना या वाद्य यंत्रों की पूजा करना बहुत शुभ है।
पूजा की सामग्री: कुछ भी भूल न जाएँ!
जब आप पूजा की चौकी सजाएं, तो यह एक छोटी सी 'चेकलिस्ट' आपके बहुत काम आएगी। माँ सरस्वती को सफेद और पीला रंग बहुत प्यारा है, तो अपनी लिस्ट ऐसे बनाएं:
- चौकी और मूर्ति: पीला कपड़ा बिछाने के लिए और सरस्वती माता की साफ़-सुथरी प्रतिमा।
- फूल: सबसे ज़रूरी हैं 'गेंदे के फूल' या पीले कनेर के फूल।
- हवन और धूप: चंदन, अगरबत्ती, और केसर मिला हुआ रोली।
- प्रसाद (भोग): मालपुए, पीले चावल या बूंदी के लड्डू। घर में बने हुए पीले मीठे चावल (केसरिया भात) माँ को सबसे ज़्यादा प्रिय हैं।
- अन्न और ज्ञान: पूजा के पास अपनी किताबें, पेन या अगर आप कलाकार हैं तो अपना गिटार या हारमोनियम ज़रूर रखें।
पीला रंग ही क्यों है खास?
बसंत पंचमी के दिन पीले कपड़े पहनने और पीला भोजन करने के पीछे गहरा रहस्य है। यह रंग न सिर्फ़ प्रकृति में सरसों के खेतों की याद दिलाता है, बल्कि यह शुद्धता और नई उम्मीद का भी प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा जी ने अपनी शक्ति से 'ज्ञान की देवी' को उत्पन्न किया था, इसलिए चारों तरफ एक नई चेतना जागृत हुई थी।
स्टूडेंट्स के लिए खास टिप
अगर आपका मन पढ़ाई में नहीं लगता या आने वाले दिनों में आपकी परीक्षाएं हैं, तो बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती के सामने एक छोटा सा 'केसर' का तिलक अपनी कलम और किताब पर ज़रूर लगाएं। और हाँ, कम से कम आज के दिन माँ शारदा की वंदना का पाठ शांत मन से ज़रूर करें।
पूजा करना सिर्फ रस्म नहीं है, बल्कि अपनी बुद्धि को सही दिशा में मोड़ने का एक बहाना है। इस बसंत पंचमी पर अपने घर में सिर्फ़ किताबें ही नहीं, बल्कि नई सोच और सकारात्मकता का भी स्वागत करें।
माँ सरस्वती आप सब पर अपनी कृपा बरसाएं!