Ghaziabad Canara bank : लोन के बदले मांगी रिश्वत, CBI ने रंगे हाथ पकड़ा, अब 5 साल जेल में कटेगी

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News India Live, Digital Desk: कहते हैं कि क़ानून के हाथ लंबे होते हैं और गुनाहगार एक न एक दिन पकड़ में आ ही जाता है. ऐसा ही एक मामला गाजियाबाद से सामने आया है, जहां सीबीआई की विशेष अदालत ने रिश्वत लेने के दोषी एक बैंक मैनेजर को 5 साल की कड़ी सज़ा सुनाई है. यह फ़ैसला उन सभी के लिए एक सबक है जो अपने पद का गलत इस्तेमाल करके आम आदमी को परेशान करते हैं.

क्या है पूरा मामला?

यह कहानी आज से कई साल पहले, 2017 की है. राकेश कुमार नाम के एक व्यक्ति अपना काम शुरू करने के लिए 'प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम' के तहत 5 लाख रुपये का लोन लेना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने गाजियाबाद के लोनी इलाके में स्थित केनरा बैंक की शाखा में आवेदन किया. वहां के ब्रांच मैनेजर मुकेश कुमार ने लोन पास करने के बदले राकेश कुमार से 25,000 रुपये की रिश्वत की मांग की.

जब CBI ने बिछाया अपना जाल

राकेश कुमार एक ईमानदार नागरिक थे और वह रिश्वत देना नहीं चाहते थे. उन्होंने हिम्मत दिखाई और 13 नवंबर 2017 को सीधे सीबीआई में जाकर बैंक मैनेजर के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करा दी. शिकायत मिलते ही सीबीआई ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी और घूसखोर मैनेजर को रंगे हाथ पकड़ने का प्लान बनाया.

प्लान के मुताबिक़, दो दिन बाद यानी 15 नवंबर 2017 को, जैसे ही मैनेजर मुकेश कुमार ने अपने दफ़्तर में राकेश कुमार से 25,000 रुपये की रिश्वत ली, पहले से तैयार सीबीआई की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया.

कोर्ट ने सुनाई सज़ा

इस मामले में सालों तक अदालत में सुनवाई चली. सीबीआई ने कोर्ट के सामने घूस लेते पकड़े जाने के मज़बूत सबूत और गवाह पेश किए. सारे सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर, गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत के जज शिवांक सिंह ने मुकेश कुमार को भ्रष्टाचार का दोषी पाया.

अदालत ने दोषी बैंक मैनेजर को 5 साल के कठोर कारावास और 50,000 रुपये के जुर्माने की सज़ा सुनाई है. कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि अगर जुर्माना नहीं भरा गया, तो दोषी को 6 महीने की अतिरिक्त साधारण जेल काटनी होगी. यह फ़ैसला भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक बड़ा संदेश देता हैं.