ग्राउंड रिपोर्ट: पीएम मोदी के आगमन से 'गणेशपुर' की धड़कनें तेज, एशिया के सबसे लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के स्वागत को तैयार देवभूमि
गणेशपुर/देहरादून: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उत्साह अब फाइलों से निकलकर धरातल पर दिखने लगा है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित छोटा सा गांव गणेशपुर आज एक ऐतिहासिक बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहीं से देश के सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में मानों उत्सव जैसा माहौल है।
गणेशपुर: हेलीपैड पर टिकीं ग्रामीणों की निगाहें
गणेशपुर गांव, जो कभी अपनी शांति के लिए जाना जाता था, आज वीआईपी मूवमेंट का केंद्र बन गया है। खेतों को समतल कर तीन भव्य हेलीपैड तैयार किए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का उत्साह: गांव के बुजुर्गों के लिए यह किसी सपने जैसा है। एक बुजुर्ग कहते हैं, "हमने इस मिट्टी पर बुग्गी और ट्रैक्टर चलते देखे थे, अब लोहे के पंछी (हेलीकॉप्टर) उतरेंगे।"
सुरक्षा और तैयारी: अफसरों का डेरा, वायरलेस की गूँज और पुलिस के तंबुओं ने गांव का नक्शा बदल दिया है। हर चेहरे पर इस बात का गर्व है कि प्रधानमंत्री के कदम उनके गांव की मिट्टी पर पड़ने वाले हैं।
12 किमी का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर: जहाँ विकास और प्रकृति का मिलन है
गणेशपुर से शुरू होने वाला 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खूबी है। यह एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड गलियारा है।
प्रकृति से तालमेल: यह कॉरिडोर राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर से गुजरता है, जिससे वन्यजीवों के रास्ते में कोई बाधा नहीं आती। जैसा कि एक पर्यटक ने कहा— "सड़क अब समझदार हो गई है, जंगल का रास्ता नहीं रोकती।" यह वाक्य आधुनिक भारत के 'सतत विकास' (Sustainable Development) का सटीक उदाहरण है।
डाट काली मंदिर: श्रद्धा और सुरक्षा का संगम
एलिवेटेड रोड के ढलान पर स्थित प्रसिद्ध मां डाट काली मंदिर में भी जोरदार तैयारियां चल रही हैं।
ऐतिहासिक क्षण: यह पहला मौका होगा जब देश के प्रधानमंत्री इस मंदिर में आकर माथा टेकेंगे। भक्त और स्थानीय लोग इस पल को लेकर बेहद उत्साहित हैं।
प्रशासनिक चौकसी: अफसरों की गाड़ियां और सुरक्षा एजेंसियां चप्पे-चप्पे पर रूट प्लान और सुरक्षा इंतजामों का खाका खींच रही हैं।
"सड़क चलेगी, तो किस्मत दौड़ेगी"
आशारोड़ी से मोहब्बेवाला तक का पूरा इलाका नई चमक बिखेर रहा है। सड़कों पर डामर की नई परत बिछ रही है और दीवारों को सुंदर चित्रों से संवारा जा रहा है।
आर्थिक उम्मीदें: स्थानीय दुकानदारों और ढाबा संचालकों की आंखों में भविष्य की चमक है। उनका मानना है कि दिल्ली से देहरादून की दूरी सिमटने से यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, जिससे पर्यटन को नई ऊंचाई मिलेगी।
रोजगार के अवसर: ग्रामीण चौपालों पर चर्चा है कि यह एक्सप्रेसवे केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि प्रगति का द्वार है। "जब सड़क दौड़ेगी, तो हमारी किस्मत भी दौड़ पड़ेगी"— यह भावना पूरे इलाके में रची-बसी है।