Gambhir vs Ajinkya : क्या कप्तानी और कोचिंग के तरीकों में आ गई है दरार? जानें भारतीय क्रिकेट में छिड़ी इस नई बहस का पूरा सच

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News India Live, Digital Desk: अजिंक्य रहाणे एक ऐसा नाम जो अपनी शांति और गजब के धैर्य के लिए जाना जाता है। जब तक पानी सिर के ऊपर न जाए, रहाणे अक्सर चुप्पी साधे रहते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से भारतीय टीम के नए हेड कोच गौतम गंभीर और उनके 'मैनेजमेंट स्टाइल' को लेकर जैसी खबरें आ रही हैं, उसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। रहाणे ने कुछ ऐसे सवाल उठाए हैं जो सीधे तौर पर यह इशारा कर रहे हैं कि कोचिंग के नए दौर में शायद अनुभवी खिलाड़ियों और पुरानी गरिमा को उतनी अहमियत नहीं मिल पा रही है।

गौतम गंभीर के कोच बनते ही भारतीय क्रिकेट में एक अलग ही आक्रामकता और बदलाव की हवा चली। लेकिन क्या यह 'अति-उत्साह' (Over-aggressive style) सीनियर खिलाड़ियों के साथ सही तालमेल बिठा पा रहा है? यही वो मुख्य सवाल है जिसने चर्चा छेड़ दी है।

अजिंक्य रहाणे की क्या है चिंता?
रहाणे का इशारा साफ़ है—क्रिकेट केवल मैदान पर आक्रामक तेवर दिखाने या केवल कोच के 'विज़न' के इर्द-गिर्द घूमने वाला खेल नहीं है। मैनेजमेंट में कोच की भूमिका एक सपोर्टर की होनी चाहिए, न कि किसी तानाशाह की जो सब कुछ अपने ही अंदाज़ में चलाने की जिद करे। रहाणे जैसे खिलाड़ी, जिन्होंने कई मुश्किल हालातों में टीम को उबारा है, अगर सवाल उठा रहे हैं, तो मतलब साफ़ है कि ड्रेसिंग रूम में कहीं न कहीं संवाद की कमी (Lack of communication) हो रही है।

क्या गंभीर का 'इंटेंट' भारी पड़ रहा है?
गौतम गंभीर हमेशा से स्पष्ट बात कहने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कमान संभालते ही साफ़ कर दिया था कि वे उन्हीं को मौका देंगे जो उनके आक्रामक इरादों (Intent) में फिट बैठेंगे। लेकिन जानकारों का कहना है कि इंटरनेशनल क्रिकेट केवल चौकों-छक्कों का खेल नहीं, बल्कि नज़ाकत और परिस्थिति को पढ़ने का खेल भी है। रहाणे के सवालों ने इसी पुराने स्कूल ऑफ़ थॉट और गंभीर के नए विज़न के बीच की जंग को दुनिया के सामने ला दिया है।

फैंस की क्या है राय?
क्रिकेट प्रेमियों के बीच अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या टीम इंडिया में अब केवल वही रहेगा जिसे कोच पसंद करेगा? सीनियर खिलाड़ियों का सम्मान और उनकी जगह को लेकर रहाणे की ये टिप्पणियाँ गंभीर के मैनेजमेंट को लेकर उठ रही आशंकाओं को और मज़बूत कर रही हैं। लोग यह भी याद दिला रहे हैं कि जब टीम हारती है, तो कोचिंग के इन्हीं फैसलों पर उंगलियां उठती हैं।