G7 Summit: पेरिस में एस जयशंकर का बड़ा दांव! होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर भारत-फ्रांस आए साथ, फंसे हुए भारतीय जहाजों को मिलेगी राह
फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित G7 विदेश मंत्रियों की बैठक से भारत के लिए राहत और गर्व वाली खबर सामने आई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वैश्विक मंच पर न केवल 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की आवाज बुलंद की, बल्कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर फ्रांस के साथ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी भी की है। इस बैठक का मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा रहा, जो वैश्विक तेल आपूर्ति और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाइफलाइन माना जाता है।
भारत और फ्रांस की जुगलबंदी: समुद्री लुटेरों और युद्ध के खतरे से निपटेंगे साथ
पेरिस में एस जयशंकर और उनके फ्रांसीसी समकक्ष जीन-नोएल बैरोट के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर सहमति बनी। फ्रांसीसी नौसेना के चीफ ऑफ स्टाफ, एडमिरल निकोलस वौजोर ने पुष्टि की है कि भारत, ब्रिटेन और जापान जैसे देशों के साथ मिलकर एक समन्वित 'नौसैनिक एक्शन प्लान' पर चर्चा की गई है। इसका उद्देश्य नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) को बरकरार रखना है, ताकि वैश्विक व्यापार पर युद्ध का साया न पड़े।
होर्मुज में फंसे 18 भारतीय जहाजों के लिए आई खुशखबरी
ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के कारण होर्मुज जलमार्ग में भारत के 18 जहाज फंसे हुए थे, जिससे देश में तेल और गैस के संकट की आहट सुनाई देने लगी थी। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर भारत की बड़ी जीत हुई है। ईरान ने भारत को उन चुनिंदा पांच देशों की सूची में शामिल किया है, जिन्हें इस जलमार्ग से अपने जहाज निकालने की विशेष छूट दी गई है। 4 जहाज पहले ही निकल चुके हैं, और बाकी जहाजों के सुरक्षित वापसी का रास्ता अब साफ हो गया है।
UNSC में सुधार और 'ग्लोबल साउथ' की चिंताएं
G7 के सत्र को संबोधित करते हुए एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार नहीं होगा, तब तक शांति स्थापना के अभियान सफल नहीं होंगे। जयशंकर ने युद्ध के कारण पैदा हुई ऊर्जा चुनौतियों, उर्वरक आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विकासशील देशों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाया।
मानवीय सहायता और शांतिरक्षा अभियानों पर जोर
विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने शांतिरक्षा अभियानों (Peacekeeping Operations) को और अधिक प्रभावी बनाने और मानवीय सहायता की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की जरूरत पर प्रकाश डाला है। भारत का यह रुख दिखाता है कि वह केवल अपनी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता और विकास में भी एक जिम्मेदार 'विश्व मित्र' की भूमिका निभा रहा है।