हिंदू भाव भूले, इसलिए हुआ विभाजन RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, बताया अखंड भारत का रास्ता
News India Live, Digital Desk: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भारत के विभाजन को लेकर एक गहरा और वैचारिक दृष्टिकोण साझा किया है। मुजफ्फरपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि 1947 में भारत का बंटवारा इसलिए हुआ क्योंकि लोग अपना 'हिंदू भाव' भूल गए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की एकता का आधार किसी राजनीतिक समझौते में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना में निहित है।
"हिंदू भाव ही भारत की आत्मा"
संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि 'हिंदू भाव' का अर्थ किसी संप्रदाय विशेष से नहीं, बल्कि उस समावेशी संस्कृति से है जिसने सदियों से इस उपमहाद्वीप को जोड़े रखा। उन्होंने कहा, "विभाजन इसलिए हुआ क्योंकि हमने अपनी जड़ों को भुला दिया। जब तक हम हिंदू भाव को मजबूती से थामे रहे, भारत अखंड रहा। जैसे ही इसमें कमी आई, देश खंडित हो गया।"
अखंड भारत और भविष्य की राह
मोहन भागवत ने अखंड भारत के सपने पर चर्चा करते हुए कहा कि यह केवल मानचित्र बदलने का विषय नहीं है, बल्कि मन और भाव को फिर से जोड़ने की प्रक्रिया है। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:
विभाजन का दर्द: उन्होंने विभाजन को एक ऐसी त्रासदी बताया जिसे भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन जिससे सबक लेना अनिवार्य है।
एकता का सूत्र: भागवत के अनुसार, विविधता में एकता का असली मंत्र हिंदू विचारधारा में ही समाहित है, जो सबको साथ लेकर चलने की बात करती है।
युवाओं को संदेश: उन्होंने नई पीढ़ी से अपनी विरासत और इतिहास को गहराई से समझने का आह्वान किया ताकि भविष्य में वैसी गलतियाँ न दोहराई जाएं।
विभाजन की विभीषिका और संघ का दृष्टिकोण
आरएसएस हमेशा से विभाजन को 'अप्राकृतिक' मानता रहा है। भागवत का यह बयान उस समय आया है जब देश में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को लेकर बहस तेज है। उन्होंने तर्क दिया कि शांति और सुरक्षा तभी सुनिश्चित हो सकती है जब समाज अपनी मूलभूत पहचान के प्रति जागरूक और संगठित हो।