पहले वाशिंगटन, अब शिकागो... ट्रंप का 'मिलिट्री' वाला प्लान अमेरिका को कहां ले जाएगा?
डोनाल्ड ट्रंप जब भी कोई फैसला लेते हैं, तो उस पर बहस होना लाजमी है। वह अपनी सियासत के लिए जाने जाते हैं जिसमें वे चौंकाने वाले और अक्सर विवादित कदम उठाने से नहीं हिचकते। एक बार फिर, उन्होंने एक ऐसा ही ऐलान कर दिया है जिससे पूरे अमेरिका में हलचल मच गई है। देश की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. में सेना उतारने के बाद, अब ट्रंप की नजर शिकागो शहर पर है।
क्या है ट्रंप का नया प्लान?
खबरों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के सबसे बड़े शहरों में से एक, शिकागो की सड़कों पर मिलिट्री यानी सेना को तैनात करने की योजना बना रहे हैं। यह कोई छोटी-मोटी घोषणा नहीं है। अपने ही देश के किसी शहर में सेना भेजना एक बहुत बड़ा और संवेदनशील कदम होता है, जो अक्सर आखिरी उपाय के तौर पर देखा जाता है।
ट्रंप इससे पहले वाशिंगटन डी.सी. में भी ऐसा ही कर चुके हैं, जहां उन्होंने विरोध प्रदर्शनों को काबू में करने के लिए सेना को तैनात किया था। अब शिकागो का नंबर लगाकर उन्होंने यह संकेत दे दिया है कि वे अपनी "लॉ एंड ऑर्डर" यानी "कानून-व्यवस्था" की नीति को लेकर कितने गंभीर हैं।
लेकिन, ट्रंप ऐसा क्यों करना चाहते हैं?
शिकागो लंबे समय से अपराध और हिंसा की समस्याओं से जूझ रहा है। ट्रंप का तर्क है कि शहर की स्थानीय सरकार और पुलिस इन समस्याओं से निपटने में नाकाम रही है, इसलिए अब हालात को काबू में करने के लिए सेना की मदद लेना जरूरी हो गया है। उनका कहना है कि वे चुपचाप बैठकर शहर को बिगड़ते हुए नहीं देख सकते और शांति बहाल करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।
क्यों हो रहा है इस फैसले का विरोध?
अमेरिका में, अपने ही शहर में सेना की तैनाती को बहुत गंभीरता से लिया जाता है। कई लोग इसे राष्ट्रपति की शक्तियों का गलत इस्तेमाल मानते हैं। आलोचकों का कहना है कि यह शहर के स्थानीय प्रशासन के अधिकारों का हनन है। उनका मानना है कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखना स्थानीय पुलिस का काम है, सेना का नहीं। सेना का इस्तेमाल अपने ही नागरिकों के खिलाफ करना लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत माना जाता है।
इस फैसले ने अमेरिका में एक बड़ी बहस छेड़ दी है - एक तरफ "कानून-व्यवस्था" की दलील है, तो दूसरी तरफ नागरिक अधिकारों और लोकतंत्र की चिंता। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सच में शिकागो की सड़कों पर अमेरिकी सेना उतरेगी, और अगर ऐसा हुआ, तो इसका अंजाम क्या होगा।