पड़ोसी के घर में आग और इजराइल की नींद गायब ,ईरान में मचती हलचल के बीच अमेरिका की एंट्री का डर

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News India Live, Digital Desk: दुनिया का नक्शा एक बार फिर गर्माता दिख रहा है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व), जो पहले ही बारूद के ढेर पर बैठा था, वहां अब एक नई चिंगारी सुलग उठी है। ताजा खबरें ईरान और इजराइल के खेमे से आ रही हैं, जिन्होंने एक बार फिर सबको चिंता में डाल दिया है। मामला इतना गंभीर है कि इजराइल को रातों-रात अपनी सुरक्षा व्यवस्था 'हाई अलर्ट' (High Alert) पर डालनी पड़ी है।

ईरान में बवाल, इजराइल क्यों परेशान?

दरअसल, कहानी शुरू होती है ईरान के अंदरूनी हालात से। वहां सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। जनता सड़कों पर है और वहां का निजाम हिलता हुआ दिखाई दे रहा है। लेकिन, इजराइल की चिंता ईरान के लोग नहीं हैं, उसकी चिंता है—अमेरिका का अगला कदम

खुफिया गलियारों में और मीडिया रिपोर्ट्स में यह चर्चा गर्म है कि ईरान के इन कमजोर हालात का फायदा उठाकर अमेरिका वहां हस्तक्षेप (Intervention) कर सकता है। यानी बहती गंगा में हाथ धोने की तैयारी! अब आप सोचेंगे कि इसमें इजराइल को क्या डर? डर यह है कि अगर अमेरिका ने ईरान में कोई एक्शन लिया, तो ईरान और उसके समर्थित गुट (जैसे हिजबुल्लाह या हमास) चुप नहीं बैठेंगे। उनका पहला निशाना अमेरिका नहीं, बल्कि उसका सबसे करीबी दोस्त—इजराइल होगा।

बौखलाहट में हमला न कर दे ईरान

इजराइल का डिफेंस सिस्टम इसलिए एक्टिव मोड में है क्योंकि उन्हें आशंका है कि 'घायल शेर' ज्यादा खतरनाक होता है। अगर ईरान को लगा कि उसकी सत्ता अमेरिका की वजह से खतरे में है, तो वह ध्यान भटकाने के लिए इजराइल पर मिसाइलें दाग सकता है। तेल अवीव में बैठी सरकार यह जोखिम नहीं लेना चाहती।

पर्दे के पीछे क्या चल रहा है?

कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि यह समय बहुत नाजुक है। एक तरफ ईरान के लोग अपनी ही सरकार से लड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका इसे 'बदलाव' के मौके के तौर पर देख रहा है। इजराइल, जो हमेशा से ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोधी रहा है, वह हर एक आहट पर कान लगाए बैठा है। उसकी सेना किसी भी जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार खड़ी है।

क्या आगे बड़ी जंग होगी?

फिलहाल तो यह सिर्फ 'अलर्ट' है, लेकिन मिडिल ईस्ट का इतिहास गवाह है कि यहाँ एक छोटी सी चिंगारी भी भयंकर आग लगा सकती है। अगर अमेरिका सच में ईरान में दखल देता है, तो स्थिति क्या होगी, यह सोचकर ही दुनिया के बाकी देश सहमे हुए हैं।

अब देखना यह है कि वाशिंगटन (अमेरिका) और तेहरान (ईरान) के बीच का यह शह-मात का खेल आगे क्या मोड़ लेता है। क्या यह सिर्फ दबाव बनाने की राजनीति है, या हम किसी बड़े टकराव की ओर बढ़ रहे हैं?

हम इस खबर पर नजर बनाए हुए हैं, जैसे ही कोई बड़ा अपडेट आएगा, सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।