बैंकों की 'जबरन वसूली' पर वित्त मंत्री का सख्त प्रहार: अब गलत बीमा बेचा तो देना होगा पूरा रिफंड और हर्जाना, 1 जुलाई से बदलेंगे नियम
नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क: देश के सरकारी और निजी बैंकों द्वारा ग्राहकों को जबरन या गुमराह करके बीमा और अन्य वित्तीय उत्पाद बेचने (Mis-selling) के खेल पर अब लगाम लगने वाली है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए बैंकों को चेतावनी दी है। सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि बैंक अपने मुख्य कार्यों, जैसे जमा स्वीकार करना और ऋण देना, को छोड़कर बीमा कंपनी न बनें। बजट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के केंद्रीय निदेशक मंडल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कई बार बैंक ग्राहकों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें ऐसी पॉलिसी थमा देते हैं, जिनकी उन्हें जरूरत ही नहीं होती।
ग्राहकों की जेब पर डाका नहीं चलेगा, बैंक सुधारें अपनी कार्यशैली
वित्त मंत्री ने बैंकों को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि ग्राहकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालना बंद होना चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि जब कोई आम आदमी लोन लेने या एफडी कराने बैंक जाता है, तो कर्मचारी उस पर बीमा खरीदने का दबाव बनाते हैं। सीतारमण ने कहा कि बैंकों को ग्राहकों की वास्तविक वित्तीय स्थिति और उनकी जरूरतों को समझना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से 'कासा' (CASA - चालू और बचत खाता) आधार को मजबूत करने की सलाह दी, ताकि बैंकिंग प्रणाली में कम लागत वाली जमा राशि बढ़े और आम नागरिकों का भरोसा बैंकों पर बना रहे।
आरबीआई का नया मास्टर प्लान: 1 जुलाई से लागू होंगे सख्त नियम
बैंकों की इस मनमानी को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक क्रांतिकारी मसौदा (Draft Guidelines) तैयार किया है। नए प्रस्तावित नियमों के तहत, यदि कोई बैंक किसी ग्राहक को भ्रामक जानकारी देकर कोई उत्पाद बेचता है, तो शिकायत सही पाए जाने पर बैंक को न केवल उस ग्राहक की पूरी राशि वापस करनी होगी, बल्कि उसे हुए मानसिक और आर्थिक नुकसान का हर्जाना भी भरना पड़ेगा। यह नियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो सकते हैं। फरवरी में जारी इस मसौदे पर सुझावों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।
गृह ऋण और बीमा का 'मायाजाल' होगा खत्म
वित्त मंत्री ने बैंकिंग और बीमा नियामक के बीच तालमेल की कमी पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि गृह ऋण (Home Loan) लेते समय ग्राहकों को अक्सर दोहरे बीमा के जाल में फंसाया जाता है। जब कोई अपनी संपत्ति गिरवी रखता है, तो जोखिम पहले से ही कवर होता है, फिर भी बैंक अतिरिक्त बीमा पॉलिसी लेने का दबाव बनाते हैं। अब तक आरबीआई और इर्डा (IRDAI) के बीच क्षेत्राधिकार को लेकर स्पष्टता की कमी थी, जिसका फायदा बैंक उठा रहे थे। लेकिन अब नए दिशा-निर्देशों से इस भ्रम को दूर कर दिया गया है।
बैंकिंग सेक्टर की सेहत और जमा वृद्धि का गणित
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की वर्तमान बैंकिंग स्थिति का ब्यौरा भी साझा किया। गवर्नर के अनुसार, भारतीय बैंकों में जमा वृद्धि (Deposit Growth) वर्तमान में 12.5 प्रतिशत है, जबकि ऋण वितरण की रफ्तार 14.5 प्रतिशत के स्तर पर है। हालांकि ऋण की मांग अधिक है, लेकिन जमा राशि में भी संतोषजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में रेपो रेट और मौद्रिक नीतियों पर फैसला मुद्रास्फीति (Inflation) और देश की आर्थिक विकास दर को ध्यान में रखकर लिया जाएगा, ताकि निवेश और उपभोग के बीच संतुलन बना रहे।