फाजिलनगर का नाम अब होगा पावानगर सीएम योगी ने भरी हुंकार, कहा यह भगवान बुद्ध की धरती है

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News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश में एक बार फिर "नाम बदलने" की चर्चा तेज हो गई है। अगर आप यूपी की राजनीति और खबरों पर नजर रखते हैं, तो आपको पता होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) अपनी संस्कृति और इतिहास को वापस लाने के लिए जाने जाते हैं। इलाहाबाद को 'प्रयागराज' और फैजाबाद को 'अयोध्या' बनाने के बाद, अब बाबा का बुल्डोजर एक और नाम बदलने जा रहा है।

इस बार नंबर आया है कुशीनगर जिले के 'फाजिलनगर' (Fazilnagar) का।

मंच से किया बड़ा ऐलान
हाल ही में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा कि 'फाजिलनगर' नाम हमारी ऐतिहासिक पहचान से मेल नहीं खाता। उन्होंने जनता की भारी भीड़ के सामने घोषणा की कि इस जगह को अब इसके पौराणिक और ऐतिहासिक नाम 'पावानगर' (Pavanagar) से जाना जाएगा।

जैसे ही सीएम ने यह बात कही, पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लेकिन सवाल यह है कि आखिर नाम क्यों बदला जा रहा है? क्या है इसके पीछे की कहानी?

पावानगर ही क्यों? (Why Pavanagar?)
दोस्तों, इसके पीछे एक बहुत गहरा और भावुक इतिहास छिपा है।
सीएम योगी ने याद दिलाया कि यह धरती भगवान गौतम बुद्ध (Lord Buddha) से जुड़ी हुई है। इतिहास बताता है कि भगवान बुद्ध ने अपने जीवन का आखिरी भोजन यहीं ग्रहण किया था। यह मल्ल राजाओं की राजधानी हुआ करती थी, जिसे प्राचीन समय में 'पावा' या 'पावानगर' कहा जाता था।

योगी जी का तर्क एकदम सीधा है जब इस जगह का इतिहास इतना गौरवशाली है, तो इसे किसी ऐसे नाम (फाजिलनगर) से क्यों पुकारा जाए जिसका हमारी संस्कृति से कोई खास लेना-देना नहीं है?

प्रस्ताव पास, बस मोहर बाकी
सीएम योगी ने मंच से ही अपने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को निर्देश दे दिया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही नगर पंचायत और विधानसभा का नाम बदलने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाए। यानी, वह दिन दूर नहीं जब आप सरकारी कागजों और बोर्डों पर 'फाजिलनगर' की जगह 'पावानगर' लिखा देखेंगे।

विकास भी, विरासत भी
सिर्फ नाम ही नहीं, सरकार इस इलाके को पर्यटन (Tourism) के नक्शे पर भी चमकाना चाहती है। कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने के बाद यहां देश-विदेश से पर्यटक आ रहे हैं। अगर फाजिलनगर को 'पावानगर' के रूप में विकसित किया जाएगा, तो दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालु यहाँ आएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और इलाके की तरक्की होगी।

विपक्ष का क्या कहना होगा?
जाहिर है, जब भी नाम बदलता है, थोड़ी राजनीति तो होती ही है। लेकिन स्थानीय लोगों में इस फैसले को लेकर काफी उत्साह है। उनका मानना है कि 'पावानगर' नाम में एक अपनापन और वजन है जो 'फाजिलनगर' में नहीं था।

वैसे, योगी सरकार के इस फैसले पर आपकी क्या राय है? क्या नाम बदलने से सच में इलाके की तकदीर बदलती है या यह सिर्फ जज्बातों का खेल है? कमेंट बॉक्स में अपनी बात जरूर रखें!