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March 24 2026 12:10 pm

Fatty Liver Symptoms : बच्चों में चुपके से बढ़ रही है फैटी लिवर की बीमारी, इन लक्षणों को न करें नज़रअंदाज़

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News India Live, Digital Desk: Fatty Liver Symptoms : आजकल की बदलती जीवनशैली का असर सिर्फ बड़ों पर ही नहीं, बल्कि बच्चों पर भी पड़ रहा है. एक ऐसी बीमारी जो पहले सिर्फ 40-50 की उम्र के लोगों में पाई जाती थी, अब छोटे-छोटे बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है.हम बात कर रहे हैं फैटी लिवर की समस्या की, जो बच्चों में एक नई महामारी की तरह फैल रही है. चिंता की बात यह है कि कई मामलों में इसके लक्षण साफ तौर पर दिखाई नहीं देते और जब तक पता चलता है, तब तक लिवर को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है.

क्यों हो रही है बच्चों में यह समस्या?

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में फैटी लिवर के बढ़ने के पीछे कुछ मुख्य कारण हैं:

  • गलत खान-पान: आजकल के बच्चों का जंक फूड, पिज्जा, बर्गर, चिप्स और मीठी चीजों जैसे कि कोल्ड ड्रिंक, पेस्ट्री और पैकेट वाले जूस का अधिक सेवन करना सबसे बड़ा कारण है इन चीजों में मौजूद एक्स्ट्रा शुगर और फैट सीधे लिवर में जमा होने लगता है.
  • शारीरिक गतिविधि की कमी: पहले बच्चे बाहर मैदान में खेलते थे, लेकिन अब वे ज्यादातर समय मोबाइल, टीवी या वीडियो गेम में बिताते हैं. शारीरिक गतिविधि की यह कमी मोटापे को बढ़ाती है, जो सीधे तौर पर फैटी लिवर को न्योता देता है.
  • मोटापा: जिन बच्चों का वजन उनकी उम्र और लंबाई के हिसाब से ज़्यादा होता है, उनमें फैटी लिवर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. पेट के आसपास जमा चर्बी इसका एक मुख्य संकेत है.

बच्चों में इन लक्षणों पर रखें नज़र

हालांकि फैटी लिवर के कोई खास शुरुआती लक्षण नहीं होते, लेकिन कुछ बातों पर ध्यान देकर आप इस समस्या को समय पर पहचान सकते हैं:

  • लगातार थकान और कमज़ोरी: अगर आपका बच्चा बिना किसी वजह के हमेशा थका हुआ या सुस्त रहता है, तो यह एक संकेत हो सकता है.
  • पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द: कुछ बच्चों को पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में, जहां लिवर होता है, हल्के दर्द या बेचैनी की शिकायत हो सकती है.
  • भूख न लगना: खाने में बच्चे की रुचि कम हो जाना भी एक लक्षण हो सकता है.
  • वजन का तेजी से बढ़ना: अगर बच्चे का वजन असामान्य रूप से बढ़ रहा है और तोंद निकल रही है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें.

कैसे करें अपने बच्चे का बचाव?

अच्छी खबर यह है कि सही जीवनशैली और खान-पान में बदलाव करके इस बीमारी को न सिर्फ रोका जा सकता है, बल्कि शुरुआती स्टेज में इसे पूरी तरह से ठीक भी किया जा सकता है.

  1. स्वस्थ और संतुलित आहार: बच्चे की डाइट में फल, हरी सब्ज़ियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें.उन्हें घर का बना खाना खाने की आदत डालें.
  2. जंक फूड और मीठे से दूरी: प्रोसेस्ड फूड, पैकेट वाली चीजें और ज़्यादा मीठी चीजों से बच्चों को दूर रखें.
  3. खेलने के लिए प्रोत्साहित करें: बच्चों को रोज़ाना कम से कम एक घंटा बाहर जाकर खेलने या कोई शारीरिक गतिविधि करने के लिए प्रेरित करें
  4. नियमित जांच: अगर आपके बच्चे का वजन ज़्यादा है या ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण दिख रहे हैं, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें और लिवर फंक्शन टेस्ट ज़रूर कराएं.

आपके थोड़े से ध्यान और जागरूकता से आपका बच्चा इस गंभीर बीमारी से बचा रह सकता है और एक स्वस्थ जीवन जी सकता है.