माघ मेले में बढ़ी सरगर्मी प्रशासन ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को क्यों थमाया नोटिस? 24 घंटे का मिला अल्टीमेटम

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News India Live, Digital Desk: प्रयागराज की पावन धरती पर इन दिनों माघ मेले की रौनक है। संगम के किनारे लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था की डुबकी लगा रहे हैं, लेकिन इसी शांति के बीच अचानक से प्रशासन और संतों के बीच एक बड़ा तनाव खड़ा हो गया है। मामला जुड़ा है स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (शंकरचार्य) के शिविर और माघ मेला प्रशासन से। खबर है कि प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक औपचारिक नोटिस भेजकर 24 घंटे के भीतर जवाब तलब किया है।

अचानक क्यों आया प्रशासन को गुस्सा?
देखा जाए तो संगम की रेती पर जब मेला सजता है, तो उसके अपने कड़े नियम होते हैं। जानकारी के मुताबिक, नोटिस भेजने की मुख्य वजह शिविर की भूमि और वहां किए गए कुछ बदलावों या गतिविधियों से जुड़ी है। प्रशासन का कहना है कि नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है और इसी पर सफाई देने के लिए उन्होंने शंकराचार्य के खेमे को बहुत कम समय दिया है। 24 घंटे का यह अल्टीमेटम इस बात का संकेत है कि मामला थोड़ा पेचीदा और गंभीर हो चला है।

संतों और श्रद्धालुओं के बीच सुगबुगाहट
जैसे ही यह नोटिस चर्चा में आया, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच बातें होने लगीं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अक्सर अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं, और अब प्रशासन के साथ इस टकराव ने मेले के माहौल में थोड़ी गर्माहट ला दी है। संतों का एक गुट इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रशासनिक दखल मान रहा है, जबकि मेला प्रशासन का कहना है कि वे केवल व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए अपना काम कर रहे हैं।

आगे क्या होगा?
माघ मेले जैसी विशाल जगह पर सुरक्षा और नियमों का पालन बेहद ज़रूरी है, लेकिन जब बात शंकराचार्य जैसे बड़े पद की हो, तो प्रशासन भी फूंक-फूंक कर कदम रखता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का खेमा इस नोटिस पर क्या जवाब देता है। अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो क्या प्रशासन कोई बड़ी कार्रवाई करेगा? या फिर कोई आपसी सहमति बन पाएगी?

इस पूरे वाकये ने प्रयागराज के धार्मिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। कड़ाके की ठंड के बीच अब यह विवाद चर्चा का सबसे गरम विषय बना हुआ है।