कमबैक के बाद प्रीति जिंटा को लगा 'कल्चरल शॉक': पैपराजी और सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा, बोलीं- अब दुखी भी फैशनेबल होकर होना पड़ता है
बॉलीवुड की चुलबुली और डिंपल गर्ल के नाम से मशहूर अभिनेत्री प्रीति जिंटा एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपनी अदाकारी का जादू बिखेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शादी के बाद लंबे समय तक सिनेमा की चकाचौंध से दूर रहने और विदेश में परिवार के साथ वक्त बिताने के बाद प्रीति ने हाल ही में बॉलीवुड में शानदार वापसी की है। जहां दर्शक उन्हें दोबारा स्क्रीन पर देखकर उत्साहित हैं, वहीं खुद प्रीति जिंटा इंडस्ट्री के बदले हुए तौर-तरीकों को देखकर हैरान हैं।
अपनी आगामी स्पाई कॉमेडी फिल्म 'वाइब' (Vibe) के प्रमोशन के दौरान एक साक्षात्कार में प्रीति ने फिल्मों में वापसी के बाद मिले 'कल्चरल शॉक' (Cultural Shock) और आक्रामक पैपराजी कल्चर (Paparazzi Culture) पर खुलकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने बेबाकी से स्वीकार किया कि आज के दौर में एक एक्टर की जिंदगी सिर्फ कैमरे के सामने अभिनय करने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उसके इर्द-गिर्द का तामझाम कई गुना ज्यादा तनावपूर्ण हो चुका है।
"पहले सिर्फ एक्टिंग करनी होती थी, अब एयरपोर्ट लुक संभालना पड़ता है"
साक्षात्कार में जब प्रीति जिंटा से पूछा गया कि इतने सालों बाद जब वह सेट पर लौटीं, तो उन्हें सबसे बड़ा सांस्कृतिक बदलाव क्या देखने को मिला, तो उन्होंने साफ कहा कि झटका फिल्मों के अंदर नहीं, बल्कि फिल्मों के इर्द-गिर्द खड़े किए गए माहौल में लगा है:
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सिर्फ सेट तक नहीं सीमित काम: प्रीति ने कहा, "मेरे लिए सबसे बड़ा कल्चरल शॉक फिल्मों को लेकर नहीं है, बल्कि फिल्मों के बाहर की चीजों को लेकर है। पैपराजी की लगातार मौजूदगी और सोशल मीडिया का बेजा दखल सबसे बड़ी चुनौती है। पहले के समय में हम सीधे सेट पर जाते थे, अपना शॉट देते थे, एक्टिंग खत्म करते थे और घर लौट जाते थे।"
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एयरपोर्ट लुक और बनावटी दिखावा: उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "आज के दौर में आप कैसे कपड़े पहनते हैं, यह अभिनय से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। आपका 'एयरपोर्ट लुक' कैसा है, इस पर सबका ध्यान रहता है। अगर आप दुखी हैं, तो भी आपको फैशनेबल तरीके से दुखी (Fashionably Sad) दिखना पड़ता है, और अगर खुश हैं, तो फैशनेबल तरीके से खुश होना पड़ता है।"
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हर मुद्दे पर राय देने का दबाव: उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज देश में अगर कोई भी घटना घटती है, तो एक्टर्स से अपेक्षा की जाती है कि उन्हें पूरी जानकारी हो, वे उस पर टिप्पणी करें और बिल्कुल सही बात कहें। आज कलाकारों पर हर समय परफेक्ट और अद्भुत दिखने का भारी दबाव (Optics Pressure) बना रहता है।
कुणाल खेमू की 'वाइब' में स्पाई अवतार: एक्शन करती नजर आएंगी प्रीति
सनी देओल के साथ फिल्म 'बंटवारा 1947' के बाद अब प्रीति जिंटा निर्देशक कुणाल खेमू की कॉमेडी-एक्शन फिल्म 'वाइब' (Vibe) में मुख्य भूमिका में नजर आने वाली हैं। 18 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही इस फिल्म में प्रीति ने 'मैडम एच' (Madam H) नाम की एक तेजतर्रार जासूस का रोल निभाया है, जो दो अनाड़ी दोस्तों को एक सीक्रेट मिशन के लिए ट्रेन करती है:
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पहली बार एक्शन अवतार: प्रीति ने बताया कि उन्होंने अपने पूरे करियर में कई लीक से हटकर किरदार निभाए हैं—चाहे वह 'क्या कहना' में बिन ब्याही मां का रोल हो, 'संघर्ष' की सीबीआई अफसर या 'चोरी चोरी चुपके चुपके' की कहानी हो। लेकिन एक्शन जॉनर में उन्होंने कभी हाथ नहीं आजमाया था।
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स्क्रिप्ट की ताकत: उन्होंने कहा कि आज महिला केंद्रित एक्शन फिल्मों का दौर है, लेकिन यह तभी सफल हो सकता है जब कहानी और पटकथा में दम हो। स्टंट डायरेक्टर परवेज शेख के मार्गदर्शन में उन्होंने फिल्म के मुश्किल एक्शन सीन्स को खुद अंजाम दिया है।
अपनी शर्तों पर काम करने का फैसला: बॉक्स ऑफिस पर दिया सच्चा संदेश
51 वर्षीय अभिनेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अब वह किसी चूहा दौड़ (Rat Race) का हिस्सा नहीं हैं और अपनी गति और पसंद के प्रोजेक्ट्स पर ही काम करेंगी। बॉक्स ऑफिस पर फिल्मों के उतार-चढ़ाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा:
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मेहनत पर भरोसा: प्रीति का मानना है कि किसी भी कलाकार का काम पूरी ईमानदारी से मेहनत करना और अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है, परिणाम जनता के हाथ में छोड़ देना चाहिए।
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दर्शकों से सिनेमाघरों में जाने की अपील: उन्होंने दर्शकों से अपील की कि अगर वे अच्छी फिल्मों की उम्मीद करते हैं, तो उन्हें सिनेमाघरों में जाकर फिल्में देखनी चाहिए। लोग अक्सर कहते हैं कि अच्छी फिल्में थिएटर्स में नहीं आतीं, लेकिन अगर दर्शक टिकट खरीदकर सिनेमाघर नहीं पहुंचेंगे, तो मेकर्स ऐसी फिल्में कैसे बनाएंगे?
प्रीति जिंटा के इस बेबाक बयान ने सोशल मीडिया और बॉलीवुड गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। कई फैंस और सेलिब्रिटीज ने उनके इस रुख का समर्थन किया है कि पैपराजी और सोशल मीडिया ट्रोलिंग ने कलाकारों की निजी आजादी और मानसिक शांति को बुरी तरह प्रभावित किया है।