आईएएस-IPS की फैक्ट्री कहे जाने वाले नेतरहाट स्कूल में अचानक मचा घमासान! असमंजस में क्यों डूबे हैं छात्र और शिक्षक

आईएएस-IPS की फैक्ट्री कहे जाने वाले नेतरहाट स्कूल में अचानक मचा घमासान! असमंजस में क्यों डूबे हैं छात्र और शिक्षक

झारखंड के जंगलों की हसीन वादियों और पहाड़ियों के बीच स्थित, देश भर में 'आईएएस-IPS की फैक्ट्री' के नाम से मशहूर ऐतिहासिक नेतरहाट आवासीय विद्यालय (Netarhat Residential School) इन दिनों अपनी किसी शानदार शैक्षणिक उपलब्धि या परीक्षा परिणामों के चलते नहीं, बल्कि भीतर मचे भारी घमासान के कारण सुर्खियों में आ गया है। इस प्रतिष्ठित आवासीय शिक्षण संस्थान में अचानक उपजे प्रशासनिक और प्रबंधकीय गतिरोध के चलते वहां पढ़ रहे मेधावी छात्रों से लेकर अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षक तक गहरी असमंजस की स्थिति में फंस गए हैं। अनुशासन, उत्कृष्टता और कड़े नियमों के लिए पहचाने जाने वाले इस स्कूल के गलियारों में इन दिनों केवल भविष्य की अनिश्चितता और प्रबंधन के फैसलों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। देश के कोने-कोने से चुनकर आए उन होनहार बच्चों के सपनों पर अचानक मंडराते इस संकट के पीछे आखिर क्या वजह है और क्यों इस ऐतिहासिक संस्थान की साख दांव पर लगी है, आइए इस पूरे विवाद के हर एक पहलू पर गहराई से नजर डालते हैं।

नेतरहाट स्कूल का गौरवशाली इतिहास और देश निर्माण में इसका अतुलनीय योगदान

इस घमासान के कारणों को टटोलने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर नेतरहाट आवासीय विद्यालय भारतीय शिक्षा जगत में इतना खास क्यों माना जाता है। ब्रिटिश काल के बाद स्थापित इस अनूठे गुरुकुल जैसी शैली वाले आवासीय संस्थान ने देश को एक से बढ़कर एक बेहतरीन नौकरशाह, वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी दिए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। यहाँ की कठोर प्रवेश परीक्षा पास करके आने वाले छात्रों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। यही कारण है कि जब ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान के भीतर किसी प्रकार की प्रशासनिक उठापटक या विवाद की खबरें बाहर आती हैं, तो झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के बुद्धिजीवियों और एलुमिनाई (Alumni) के बीच चिंता की लहर दौड़ जाती है।

प्रशासनिक फैसलों और प्रबंधन की नीतियों से उपजा वर्तमान गतिरोध

हाल के दिनों में स्कूल के अंदर प्रशासनिक स्तर पर लिए गए कुछ ऐसे कड़े और अचानक फैसले सामने आए हैं, जिन्होंने शिक्षकों और स्कूल के संचालन तंत्र के बीच गहरी खटास पैदा कर दी है। बताया जा रहा है कि विद्यालय की स्वायत्तता, शिक्षकों की नियुक्तियों और छात्रों के दैनिक संचालन से जुड़े मामलों में बाहरी हस्तक्षेप और प्रबंधन के मनमाने रवैये के कारण यह विवाद धीरे-धीरे सुलगता हुआ अब सतह पर आ गया है। शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग इन नीतियों के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज करा रहा है, उनका मानना है कि इस तरह के फैसलों से संस्थान की मूल भावना और गुरुकुल जैसी परंपरा को भारी ठेस पहुंच रही है। दूसरी तरफ, शासी निकाय और प्रशासनिक अधिकारियों का अपना पक्ष है, जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच संवादहीनता की स्थिति बन गई है।

असमंजस के भंवर में फंसे छात्र और उनके उज्ज्वल भविष्य पर मंडराता संकट

इस पूरे प्रशासनिक घमासान और खींचतान का सबसे बुरा असर नेतरहाट स्कूल के उन मासूम और प्रतिभाशाली छात्रों पर पड़ रहा है जो देश के कोने-कोने से अपना भविष्य संवारने के लिए इस दूरदराज इलाके में आए हैं। जब शिक्षक और प्रबंधन ही आपस में उलझे रहेंगे, तो उसका सीधा असर कक्षाओं की पढ़ाई, अनुशासन और छात्रों के मानसिक विकास पर पड़ना लाजिमी है। कई अभिभावकों ने भी इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि यदि समय रहते इस विवाद को नहीं सुलझाया गया, तो इस प्रतिष्ठित स्कूल का शैक्षणिक माहौल पूरी तरह से प्रभावित हो जाएगा। छात्र खुद को इस बात को लेकर असमंजस में पा रहे हैं कि आखिर आने वाले दिनों में उनके पाठ्यक्रम, परीक्षाओं और स्कूल की व्यवस्थाओं का क्या होगा, जिससे उनके मन में असुरक्षा की भावना घर करती जा रही है।

राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बढ़ रहा दबाव, जल्द समाधान की उम्मीद

जैसे-जैसे नेतरहाट स्कूल का यह विवाद तूल पकड़ता जा रहा है, वैसे-वैसे झारखंड के राजनीतिक हलकों और सामाजिक संगठनों में भी इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। पूर्व छात्र संघ और कई बड़े प्रशासनिक अधिकारी जो खुद इसी स्कूल से पढ़कर निकले हैं, वे इस मामले में हस्तक्षेप करके संस्थान की गरिमा को बचाने की अपील कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के शिक्षा विभाग पर भी यह नैतिक दबाव बन गया है कि वे इस मामले में तुरंत संज्ञान लें और सभी पक्षों के साथ बैठक करके एक निष्पक्ष समाधान निकालें। नेतरहाट सिर्फ एक स्कूल नहीं बल्कि एक विचार है, और इसकी अस्मिता से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए, ताकि यह संस्थान भविष्य में भी देश को चमकते हुए सितारे देता रहे।