प्रेग्नेंसी में मॉर्निंग सिकनेस और उल्टी से हैं परेशान? गायनेकोलॉजिस्ट के इन 5 असरदार घरेलू उपायों से पाएं तुरंत राहत
गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में अधिकांश महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस का सामना करना पड़ता है। नाम में 'मॉर्निंग' होने के बावजूद जी मिचलाना, सिर घूमना और उल्टी आने जैसी असहज स्थिति दिन के किसी भी समय—सुबह, दोपहर या रात—हो सकती है। लखनऊ, कानपुर, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में ओपीडी में आने वाली पहली तिमाही (फर्स्ट ट्राइमेस्टर) की 70 से 80 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं इस समस्या की शिकायत करती हैं। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों (गायनेकोलॉजिस्ट) के अनुसार, इसका मुख्य कारण शरीर में ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (एचसीजी) और एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में अचानक होने वाली तेज वृद्धि है। इसके अलावा, इस दौरान सूंघने की क्षमता (ऑलफैक्ट्री सेंसिटिविटी) बढ़ जाती है और पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे मामूली गंध या खाली पेट रहने पर भी उल्टी का अहसास होने लगता है। सामान्यतः यह स्थिति 12 से 14 हफ्ते बाद अपने आप शांत होने लगती है।
सुबह बिस्तर छोड़ने से पहले आजमाएं ड्राई क्रैकर्स और टोस्ट की ट्रिक
मॉर्निंग सिकनेस की सबसे बड़ी वजह खाली पेट होना और ब्लड शुगर लेवल का अचानक गिरना होता है। जब एक गर्भवती महिला रातभर के उपवास के बाद सुबह खाली पेट उठती है, तो पेट में अत्यधिक एसिड जमा होता है, जिससे तुरंत उल्टी जैसा महसूस होता है। इससे बचने का सबसे कारगर तरीका यह है कि अपने सिरहाने या बेडसाइड टेबल पर सादे क्रैकर्स, भुने हुए मखाने, मेरी बिस्कुट या भुना हुआ ड्राई टोस्ट रखें। सुबह आंख खुलते ही बिस्तर से तुरंत उठने के बजाय 1-2 बिस्कुट या मखाने चबा लें और 10 से 15 मिनट तक लेटे रहें। ये सूखे खाद्य पदार्थ पेट में मौजूद अतिरिक्त गैस्ट्रिक एसिड को सोख लेते हैं, जिससे उठते ही जी मिचलाने की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है।
अदरक और नींबू का आजमाया हुआ प्राकृतिक उपाय
आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही अदरक को मतली रोकने के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी तत्व मानते हैं। अदरक में 'जिंजरॉल' नामक बायोएक्टिव कंपाउंड होता है, जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट को शांत करता है और उल्टी की संभावना को रोकता है।
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अदरक का पानी या चाय: सुबह एक कप हल्के गुनगुने पानी में ताजा अदरक घिसकर उबालें और उसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर पिएं।
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नींबू की महक और शिकंजी: जब भी किसी गंध से जी घबराए, तो ताजे कटे नींबू को सूंघें। नींबू की सिट्रस खुशबू मस्तिष्क के उल्टी वाले रिसेप्टर्स को तुरंत शांत करती है। इसके अलावा, थोड़े से काले नमक और भुने जीरे के साथ ताजा नींबू पानी पीना भी डिहाइड्रेशन से बचाता है।
बड़े मील के बजाय छोटे-छोटे अंतरालों पर हल्का भोजन करें
गर्भावस्था के दौरान पाचन तंत्र हार्मोनल बदलावों के कारण धीमा हो जाता है। एक साथ भारी थाली खाने से पेट पर दबाव पड़ता है और एसिड रिफ्लक्स शुरू हो जाता है। इसके विपरीत, लंबे समय तक भूखे रहने से भी मतली बढ़ती है। इसलिए 'थ्री बिग मील्स' के नियम को छोड़कर दिनभर में 5 से 6 बार छोटे-छोटे पोर्शन में हल्का और सुपाच्य भोजन करें। अपने भोजन में अत्यधिक तला-भुना, मसालेदार, तीखा और अत्यधिक तेल वाला खाना बिल्कुल हटा दें। इसके बजाय प्रोटीन और जटिल कार्बोहाइड्रेट से भरपूर चीजें जैसे उबले अंडे, दाल का सूप, दलिया, खिचड़ी, उबले आलू और ताजे फल अपनी डाइट में शामिल करें।
हाइड्रेशन बनाए रखने के स्मार्ट तरीके: घूंट-घूंट करके पिएं तरल पदार्थ
उल्टी के कारण शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकल जाते हैं, जिससे कमजोरी और सिरदर्द बढ़ जाता है। भोजन के ठीक साथ ढेर सारा पानी पीने से बचें, क्योंकि इससे पेट अत्यधिक भर जाता है और उल्टी होने का खतरा बढ़ जाता है। पानी हमेशा दो मील्स के बीच में, आराम से घूंट-घूंट (सिप-सिप) करके पिएं। सादे पानी के अलावा नारियल पानी, पुदीने का शरबत, पतली छाछ या सेब का जूस पिएं। नारियल पानी प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है जो शरीर में पोटैशियम और सोडियम के स्तर को संतुलित रखता है और कमजोरी नहीं आने देता।
ट्रिगर्स की पहचान करें और पर्याप्त आराम को दें प्राथमिकता
मॉर्निंग सिकनेस को ट्रिगर करने वाली चीजों की पहचान करना बेहद जरूरी है। कई महिलाओं को प्याज-लहसुन के तड़के की महक, स्ट्रॉन्ग परफ्यूम, कॉफी की गंध या बंद कमरे की उमस से तुरंत उल्टी आने लगती है। ऐसे ट्रिगर्स से दूरी बनाएं और रसोई में काम करते समय एग्जॉस्ट फैन जरूर चालू रखें ताकि गंध न फैले। इसके साथ ही, मानसिक तनाव और शारीरिक थकान मतली को कई गुना बढ़ा देते हैं। दिन के समय छोटी-छोटी झपकियां (पावर नैप) लें, ढीले और आरामदायक सूती कपड़े पहनें और खुली ताजी हवा में 15 से 20 मिनट टहलें।
डॉक्टर से तुरंत संपर्क कब करना जरूरी है?
हल्की मॉर्निंग सिकनेस एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, लेकिन यदि कोई महिला दिन में 4-5 बार से ज्यादा उल्टी कर रही हो, पानी या खाना बिल्कुल भी पेट में न टिक रहा हो, पेशाब का रंग गहरा पीला हो गया हो या वजन लगातार घट रहा हो, तो यह 'हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम' (Hyperemesis Gravidarum) का संकेत हो सकता है। यह एक गंभीर मेडिकल स्थिति है जिसमें शरीर में गंभीर डिहाइड्रेशन हो जाता है। ऐसी स्थिति में बिना देर किए अपनी गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करें ताकि आवश्यकतानुसार आईवी ड्रिप और सुरक्षित एंटी-एमेटिक दवाएं दी जा सकें। किसी भी स्थिति में बिना डॉक्टर के पर्चे के कोई भी उल्टी की दवा खुद से न लें।