आकाश आनंद के ससुर पर भड़कीं मायावती! कहा-'पूरी रात अपनाए हथकंडे, वक्त आने पर सब बताऊंगी

आकाश आनंद के ससुर पर भड़कीं मायावती! कहा-'पूरी रात अपनाए हथकंडे, वक्त आने पर सब बताऊंगी

बहुजन समाज पार्टी यानी बीएसपी (BSP) के भीतर राजनीतिक उठापटक और पारिवारिक सरगर्मी का दौर इस समय चरम पर पहुंच चुका है, और पार्टी सुप्रीमो मायावती के एक तीखे बयान ने पूरे राजनीतिक गलियारे में भूचाल ला दिया है। मायावती ने अपने उत्तराधिकारी और पार्टी के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद के ससुर (अशोक सिद्धार्थ) पर सीधा निशाना साधते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मायावती के इन तेवरों से साफ जाहिर होता है कि पार्टी के भीतर कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है और अंदरूनी कलह अब खुलकर सतह पर आ चुकी है। पार्टी सुप्रीमो ने कड़े शब्दों में कहा कि कुछ लोगों ने पूरी रात अपने निजी स्वार्थ के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए, जिसके कारण पार्टी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। इस सनसनीखेज घटनाक्रम के बाद से उत्तर प्रदेश समेत देश भर के राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें बीएसपी के अगले कदमों पर टिक गई हैं।

बीएसपी के भीतर आंतरिक कलह और पारिवारिक खींचतान का बढ़ता दायरा

राजनीतिक दलों में जब कभी पारिवारिक रिश्ते और राजनीतिक महत्वकांक्षाएं आपस में टकराती हैं, तो उसका अंजाम अक्सर पार्टी संगठन के बिखराव के रूप में सामने आता है, और बीएसपी वर्तमान में इसी दौर से गुजर रही है। आकाश आनंद को पार्टी का उत्तराधिकारी घोषित किए जाने के बाद से ही संगठन के भीतर और बाहर कई तरह के समीकरण बनने और बिगड़ने लगे थे, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठने लगे थे। मायावती ने अपने संबोधन और बयानों में जिस तरह से परोक्ष और अपरोक्ष रूप से आकाश आनंद के परिवार और विशेषकर उनके ससुर के हस्तक्षेप पर आपत्ति जताई है, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी के फैसलों में बाहरी या पारिवारिक दखलंदाजी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बीएसपी जैसी कैडर आधारित पार्टी के लिए, जहां अनुशासित फैसले सर्वोपरि माने जाते हैं, इस तरह की अंदरूनी कलह का बाहर आना पार्टी के जनाधार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

'वक्त आने पर सब बताऊंगी'- मायावती की चेतावनी के सियासी मायने

मायावती का यह कहना कि 'पूरी रात हथकंडे अपनाए गए और वक्त आने पर मैं सब कुछ खुलकर देश और पार्टी के सामने बताऊंगी', भारतीय राजनीति में एक बहुत बड़ा संकेत माना जा रहा है। अपने फैसलों की दृढ़ता और कड़े प्रशासनिक तथा राजनीतिक नियंत्रण के लिए पहचानी जाने वाली मायावती जब इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करती हैं, तो उसका मतलब होता है कि पर्दे के पीछे कुछ बहुत बड़ा चल रहा था जिसे समय आने पर सार्वजनिक किया जाएगा। इस प्रकार की चेतावनियों से उन सभी नेताओं और तत्वों में हड़कंप मच गया है जो पार्टी के भीतर रहकर अपने निजी या पारिवारिक हितों को साधने में जुटे हुए थे। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि मायावती का यह रुख यह साबित करने के लिए काफी है कि वे पार्टी पर अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने देंगी और पार्टी के अनुशासन से खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।

पार्टी को हुए बड़े नुकसान का जिक्र और कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति

लोकसभा और विधानसभा चुनावों में लगातार मिल रही असफलताओं के बाद बीएसपी पहले से ही अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने के लिए कड़े संघर्ष के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में इस प्रकार का आंतरिक विवाद पार्टी की नैया को और डुबाने का काम कर सकता है। मायावती ने खुद इस बात का खुलकर जिक्र किया है कि इन चंद लोगों की स्वार्थी गतिविधियों और षड्यंत्रों के कारण पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस घटनाक्रम के बाद जमीन स्तर पर काम करने वाले आम बहुजन कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच गहरी निराशा और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है, क्योंकि वे समझ नहीं पा रहे हैं कि वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ खड़े रहें या इस पारिवारिक व राजनीतिक ड्रामे के बीच खुद को अलग कर लें। बीएसपी के लिए यह समय आत्ममंथन और संगठन को बचाने का सबसे नाजुक मोड़ साबित हो रहा है।

आने वाले दिनों में बीएसपी की राजनीतिक दिशा और आकाश आनंद का भविष्य

इस पूरे विवाद के केंद्र में रहे आकाश आनंद की राजनीतिक स्थिति और भविष्य पर भी अब बड़े सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं, जिन्हें मायावती ने कभी अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। पार्टी के भीतर इस प्रकार की बगावत और तीखी बयानबाजी के बाद यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आकाश आनंद इस पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या वे पार्टी के अनुशासन के दायरे में रहते हुए अपनी भूमिका निभाते हैं या नहीं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित राजनीति के समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित करने वाली बीएसपी के लिए यह आंतरिक संघर्ष आने वाले चुनावों में उसकी राजनीतिक प्रासंगिकता को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है। मायावती के इन कड़े तेवरों ने यह साफ कर दिया है कि वे पार्टी की शुद्धता और अपने मिशन से समझौता करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं, भले ही इसके लिए उन्हें अपनों के खिलाफ ही कड़े फैसले क्यों न लेने पड़ें।