मनीष कश्यप और सोनम मलिक बने वर्कर्स, शहजाद पूनावाला के फैसले पर भड़कीं स्वरा भास्कर
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे चर्चित रियलिटी शो 'राइज एंड फॉल सीजन 2' में फिनाले की उलटी गिनती शुरू होते ही दांव-पेंच और रणनीति का स्तर चरम पर पहुंच गया है। अमेजन प्राइम वीडियो और एमएक्स प्लेयर पर लगातार ट्रेंड कर रहे इस शो ने एपिसोड 39 में दर्शकों को एक ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और शो के सबसे चतुर खिलाड़ियों में शुमार शहजाद पूनावाला ने अपनी शानदार खेल रणनीति और बौद्धिक क्षमता के दम पर फिनाले का पहला टिकट हासिल कर लिया है। पहले फाइनलिस्ट बनने के साथ ही शहजाद को अंतिम हफ्ते का 'अल्टीमेट रूलर' भी घोषित कर दिया गया, जिससे पूरे पेंटहाउस का शक्ति संतुलन पूरी तरह उनके हाथ में आ गया। उनके इस नए रुतबे और असीमित शक्तियों ने बेसमेंट में रह रहे वर्कर्स और पेंटहाउस के ऐशो-आराम में डूबे रूलर्स के बीच खलबली मचा दी है।
जैसे-जैसे शो अपनी अंतिम मंजिल की ओर बढ़ रहा है, कंटेस्टेंट्स के बीच नकाब उतरने लगे हैं और पुराने रिश्तों की डोर कमजोर पड़ने लगी है। एपिसोड 39 की शुरुआत से ही पेंटहाउस के भीतर एक अजीब सा सन्नाटा और तनाव पसरा हुआ था क्योंकि हर किसी को अंदेशा था कि शहजाद के हाथ में आई सत्ता किसी न किसी के लिए काल बनकर आएगी। हमेशा शांत दिखने वाले प्रतियोगी भी अब अपनी जगह बचाने के लिए खुलकर आक्रामकता दिखाने लगे हैं। दोस्ती और रणनीतिक गठबंधनों की परीक्षा अब हर कदम पर हो रही है, जहां सत्ता का एक गलत इस्तेमाल किसी भी मजबूत खिलाड़ी को फर्श से अर्श या अर्श से सीधे फर्श पर पटक सकता है।
एपिसोड 39 का सबसे बड़ा झटका उस वक्त लगा जब बिग बॉस और सोशल मीडिया के जरिए जनता की आवाज बनने वाले यूट्यूबर मनीष कश्यप और चर्चित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सोनम मलिक को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। गेम के नए नियमों के तहत पेंटहाउस के रूलर्स को एक विशेष और संवेदनशील टास्क सौंपा गया था, जिसमें उन्हें आपसी सहमति और वोटिंग के आधार पर अपने ही बीच से किन्हीं दो रूलर्स को 'फॉल' यानी पदच्युत करने का फैसला लेना था। इस प्रक्रिया में बंद कमरों के भीतर लंबी रणनीतियां बनीं, कई दावेदारों ने एक-दूसरे की पीठ में छुरा घोंपा और आखिरकार बहुमत का फैसला मनीष कश्यप और सोनम मलिक के खिलाफ चला गया।
इस अप्रत्याशित फैसले के साथ ही दोनों मजबूत प्रतियोगी तुरंत प्रभाव से रूलर के रुतबे से बेदखल होकर 'वर्कर्स' की श्रेणी में धकेल दिए गए। कुछ ही मिनटों पहले तक पेंटहाउस के आलीशान सोफों, फाइव-स्टार सुविधाओं और स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद ले रहे मनीष और सोनम को अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर सीधे नीचे बेसमेंट की अंधेरी और तंग दुनिया में जाना पड़ा। बेसमेंट में कदम रखते ही मनीष कश्यप के चेहरे पर मायूसी और गुस्सा साफ देखा जा सकता था, वहीं सोनम मलिक भी अपने साथी रूलर्स द्वारा किए गए इस विश्वासघात पर काफी आहत नजर आईं। बेसमेंट के कठिन जीवन और कड़े नियमों के बीच अब दोनों को फिनाले की रेस में बने रहने के लिए मजदूरों की तरह पसीना बहाना होगा।
एपिसोड का सबसे तीखा और नाटकीय मोड़ तब देखने को मिला जब शो के मेकर्स ने पहले फाइनलिस्ट और अल्टीमेट रूलर शहजाद पूनावाला को एक विशेष 'वीटो पावर' जैसी ताकत दी। इस खास अधिकार के तहत शहजाद को फॉल की कगार पर खड़े रूलर्स में से किसी एक को सीधे बचाकर पेंटहाउस में सुरक्षित करने का विशेषाधिकार दिया गया। सब उम्मीद कर रहे थे कि शहजाद अपने पुराने सियासी और व्यक्तिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए टीवी के चर्चित अभिनेता करण पटेल या फिर बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर में से किसी एक को जीवनदान देंगे, लेकिन शहजाद ने सबको चौंकाते हुए बिग बॉस के पूर्व विजेता गौतम गुलाटी के सिर पर अपना वरदहस्त रख दिया और उन्हें सुरक्षित घोषित कर दिया।
शहजाद के इस अप्रत्याशित फैसले ने स्वरा भास्कर के सब्र का बांध तोड़ दिया। स्वरा को लगा कि गेम के नाजुक मोड़ पर शहजाद ने रणनीतिक साझेदारी का उल्लंघन करते हुए उनके साथ धोखा किया है। इसके तुरंत बाद कैमरे के सामने स्वरा भास्कर और शहजाद पूनावाला के बीच तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई। स्वरा ने शहजाद की नीयत पर सवाल उठाते हुए उन्हें अवसरवादी करार दिया, वहीं शहजाद ने अपने फैसले का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि खेल के इस पड़ाव पर वे भावनाओं से नहीं बल्कि दिमाग और निष्पक्षता से फैसले ले रहे हैं। दोनों के बीच हुई इस गर्मागर्म बहस ने शो के माहौल को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया, जहां बाकी प्रतियोगी केवल मूकदर्शक बनकर दोनों की तकरार देखते रहे।
'राइज एंड फॉल 2' की बढ़ती लोकप्रियता का मुख्य कारण इसका अनोखा और समाज के वर्गीय ढांचे को दर्शाने वाला अनूठा फॉर्मेट है। अंतरराष्ट्रीय प्रोडक्शन हाउस बनिजय एशिया द्वारा निर्मित इस रियलिटी शो ने भारतीय दर्शकों को पारंपरिक शोज से बिल्कुल अलग स्वाद दिया है। शो की संरचना दो विरोधी दुनियाओं पर टिकी है—एक तरफ है 'पेंटहाउस' जहां रहने वाले रूलर्स को हर तरह की लग्जरी, मनपसंद खाना, आरामदेह बिस्तर और फैसले लेने की ताकत मिलती है, वहीं दूसरी तरफ है 'बेसमेंट' जहां रहने वाले वर्कर्स को सीमित संसाधनों, बुनियादी सुविधाओं के अभाव और कड़े शारीरिक परिश्रम के बीच जीवन गुजारना पड़ता है।
इस शो की असली यूएसपी यह है कि यहां कोई भी स्थिति स्थायी नहीं होती। हर रोज होने वाले मानसिक और शारीरिक टास्क, गुप्त रणनीतियों और आपसी विश्वासघात के जरिए वर्कर्स को रूलर बनकर ऊपर जाने का मौका मिलता है, जबकि गलती करने पर बड़े से बड़े रूलर को नीचे बेसमेंट की धूल फांकनी पड़ती है। हर रोज दोपहर 12 बजे एमएक्स प्लेयर और प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम होने वाले इस शो के फिनाले में अब कुछ ही दिन शेष हैं, ऐसे में शहजाद पूनावाला के अल्टीमेट रूलर बनने के बाद अब यह देखना बेहद रोमांचक होगा कि क्या बेसमेंट में पहुंचे मनीष कश्यप पलटवार कर पाएंगे या फिर स्वरा भास्कर शहजाद के इस दांव का बदला लेने के लिए कोई नया चक्रव्यूह रचेंगी।