मुस्लिम परिवार में जन्मीं रानी चटर्जी का मंदिर में बदला गया था नाम: जानिए सबीहा शेख कैसे बनीं भोजपुरी सिनेमा की 'क्वीन'
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे सफल, वरिष्ठ और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार रानी चटर्जी आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपने दो दशक से अधिक के करियर में सैकड़ों सुपरहिट फिल्में देकर दर्शकों के दिलों पर राज किया है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि पर्दे पर हिंदू पारंपरिक बहुओं और ग्रामीण महिलाओं का किरदार निभाने वाली रानी चटर्जी असल जिंदगी में एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उनका असली नाम सबीहा शेख है। सबीहा से 'रानी चटर्जी' बनने का किस्सा बेहद फिल्मी और नाटकीय है, जिसका संबंध एक शिव मंदिर में हो रही शूटिंग और निर्देशक के तुरंत लिए गए एक फैसले से जुड़ा हुआ है।
पहली ही फिल्म 'ससुरा बड़ा पईसावाला' के सेट पर घटा था यह अनोखा वाकया
साल 2003-2004 की बात है, जब भोजपुरी सिनेमा में एक नया इतिहास रचने वाली ब्लॉकबस्टर फिल्म 'ससुरा बड़ा पईसावाला' की शूटिंग चल रही थी। इस फिल्म में भोजपुरी सुपरस्टार और वर्तमान में सांसद मनोज तिवारी के अपोजिट एक नई लड़की को कास्ट किया गया था, जिसका नाम सबीहा शेख था। उस समय सबीहा महज 14-15 साल की थीं और स्कूल में पढ़ाई कर रही थीं। फिल्म के एक महत्वपूर्ण दृश्य की शूटिंग एक प्रसिद्ध शिव मंदिर में होनी थी, जहां अभिनेत्री को शिवलिंग के सामने सिर झुकाकर पूजा-अर्चना और प्रार्थना का सीन फिल्माना था।
मंदिर परिसर में विवाद के डर से डायरेक्टर ने दिया नया नाम 'रानी'
मंदिर में शूटिंग देखने के लिए आसपास के सैकड़ों स्थानीय लोगों और मीडियाकर्मियों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। शूटिंग के बीच कुछ पत्रकारों और लोगों ने फिल्म के डायरेक्टर अजय सिन्हा से नए चेहरे का नाम पूछना शुरू कर दिया।
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डायरेक्टर का डर: निर्देशक को यह चिंता सताने लगी कि अगर उन्होंने भीड़ को बताया कि मंदिर के गर्भगृह में पूजा का सीन कर रही लड़की एक मुस्लिम है और उसका नाम सबीहा शेख है, तो कहीं कोई धार्मिक विवाद, विरोध या हंगामा न खड़ा हो जाए और शूटिंग न रुक जाए।
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तुरंत लिया फैसला: बिना किसी पूर्व योजना के, डायरेक्टर ने आनन-फानन में मीडिया और लोगों से कह दिया कि इनका नाम 'रानी' है। वहां मौजूद लोगों ने जब उनका पूरा नाम यानी सरनेम पूछा, तो निर्देशक के दिमाग में उस दौर की दिग्गज बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी का नाम कौंध गया। उन्होंने बिना सोचे तुरंत जोड़ दिया—'रानी चटर्जी'।
घर में हुआ था भारी विरोध, लेकिन पर्दे पर छा गया यह नाम
जब शूटिंग पूरी हुई और फिल्म के पोस्टर्स व अखबारों में 'रानी चटर्जी' नाम छपकर सामने आया, तो सबीहा शेख के परिवार में भारी नाराजगी देखने को मिली। मुस्लिम परिवार होने के नाते उनके माता-पिता और रिश्तेदारों को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई कि उनकी बेटी का नाम एक बंगाली ब्राह्मण उपनाम (चटर्जी) के साथ सार्वजनिक किया गया है। खुद सबीहा भी इस नाम को लेकर सहज नहीं थीं और उन्हें लगा था कि यह सिर्फ एक फिल्म तक सीमित रहेगा। लेकिन 2004 में जब 'ससुरा बड़ा पईसावाला' रिलीज हुई, तो उसने भोजपुरी सिनेमा के इतिहास के सारे बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड तोड़ दिए और फिल्म ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इस अप्रत्याशित सफलता के बाद वितरकों और निर्माताओं ने कहा कि 'रानी चटर्जी' नाम उनके लिए लेडी लक बन चुका है, जिसके बाद उन्होंने इसी नाम के साथ अपने फिल्मी सफर को आगे जारी रखने का फैसला किया।
450 से ज्यादा फिल्में और दो दशक का बेमिसाल सफर
रानी चटर्जी ने अपनी मेहनत, दमदार अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस के दम पर भोजपुरी सिनेमा में वह मुकाम हासिल किया जो बहुत कम अभिनेत्रियों को नसीब होता है। उन्हें अक्सर भोजपुरी इंडस्ट्री की 'दबंग क्वीन' या 'माधुरी दीक्षित' कहा जाता है। उन्होंने कभी भी अपनी धार्मिक पृष्ठभूमि को छुपाया नहीं और कई साक्षात्कारों में पूरी बेबाकी के साथ स्वीकार किया कि वे दिल से एक गर्वित भारतीय और मुस्लिम हैं, लेकिन फिल्मी पर्दे पर वे सिर्फ एक कलाकार हैं जिसका कोई धर्म नहीं होता। आज भी सरकारी दस्तावेजों और पासपोर्ट पर उनका नाम सबीहा शेख ही दर्ज है, जबकि पूरी दुनिया उन्हें रानी चटर्जी के रूप में जानती और सम्मान देती है।