डिजिटल पेमेंट का नया कीर्तिमान: 6 महीने में 145 अरब UPI लेनदेन, वैल्यू ₹177 लाख करोड़ के पार; पहली छमाही में 27% का जबर्दस्त उछाल
भारत के स्वदेशी डिजिटल पेमेंट नेटवर्क यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में सफलता का एक नया ऐतिहासिक अध्याय लिखा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस 6 महीने की अवधि के दौरान कुल यूपीआई ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में 27 प्रतिशत की जबर्दस्त वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। देश भर में किराना दुकानों, सुपरमार्केट्स, ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) पैसों के ट्रांसफर तक यूपीआई अब भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
145 अरब ट्रांजेक्शन और ₹177 लाख करोड़ की विशाल वैल्यू
एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में यूपीआई नेटवर्क के जरिए कुल 145 अरब (14,500 करोड़) से अधिक लेनदेन संसाधित किए गए, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 114 अरब दर्ज किए गए थे।
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ट्रांजेक्शन वैल्यू में 20% का उछाल: लेनदेन की कुल वैल्यू (Processed Value) की बात करें तो अप्रैल-सितंबर के दौरान यह आंकड़ा ₹177 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में दर्ज ₹148 लाख करोड़ के मुकाबले लगभग 20 प्रतिशत अधिक है।
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दैनिक औसत 80 करोड़ के पार: देश में प्रतिदिन औसतन 80.2 करोड़ (802 मिलियन) से अधिक सफल यूपीआई लेनदेन दर्ज किए जा रहे हैं, जो दुनिया के किसी भी रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम से कहीं अधिक विशाल है।
सितंबर महीने में मामूली उतार-चढ़ाव, लेकिन ट्रेंड बेहद मजबूत
हालांकि, मासिक आधार पर सितंबर महीने में यूपीआई वॉल्यूम और वैल्यू में बहुत मामूली सा सुधार या तकनीकी करेक्शन देखा गया है:
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सितंबर में कुल लेनदेन की संख्या करीब 2,407 करोड़ दर्ज हुई, जो अगस्त के मुकाबले लगभग 1.8 प्रतिशत कम रही।
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इसी तरह सितंबर में कुल लेनदेन मूल्य 1.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 29.37 लाख करोड़ रुपये रहा।
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बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह मामूली गिरावट केवल मौसमी उतार-चढ़ाव है, क्योंकि आगामी अक्टूबर और नवंबर के त्योहारी सीजन (दशहरा, दिवाली और छठ) के दौरान ई-कॉमर्स और रिटेल बाजारों में खरीदारी बढ़ने से लेनदेन के नए सर्वकालिक रिकॉर्ड बनना तय है।
15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए मर्चेंट नियमों पर भी नजर
यह ऐतिहासिक रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में मर्चेंट नियमों को लेकर अहम अपडेट्स चर्चा में हैं:
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मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR): 15 अक्टूबर से लागू होने वाले दिशा-निर्देशों के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।
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आम ग्राहकों पर कोई असर नहीं: एनपीसीआई और सरकार ने साफ किया है कि यह शुल्क पूरी तरह व्यापारियों और मर्चेंट्स के खाते से संबंधित है। आम उपभोक्ताओं के लिए व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) अथवा सामान्य दुकानदारों को किया जाने वाला क्यूआर कोड पेमेंट पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त और शून्य शुल्क वाला रहेगा।
कैशलेस इकोनॉमी और वैश्विक पटल पर भारत की धाक
देश के 400 से अधिक बैंक और 200 से ज्यादा फिनटेक ऐप्स आज यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हुए हैं। फ्रांस, यूएई, सिंगापुर, मॉरीशस और श्रीलंका जैसे देशों में भारतीय यूपीआई का विस्तार यह साबित करता है कि भारत का यह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) अब एक वैश्विक बेंचमार्क बन चुका है। छोटे कस्बों और ग्रामीण अंचलों तक क्यूआर कोड की पहुंच ने भारतीय अर्थव्यवस्था को औपचारिक, पारदर्शी और कैशलेस बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।