हनुमान अंश का बुंदेली गाना 'आवागमन' इंटरनेट पर छाया, नीम करोली बाबा पर आधारित फिल्म ने तीसरे हफ्ते में भी गाड़े झंडे
भारतीय सिनेमा जगत में इन दिनों छोटे बजट की फिल्मों का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है, और इसी कड़ी में रिलीज हुई फिल्म 'हनुमान अंश' (Hanuman Ansh) ने अपनी अद्भुत सफलता से सभी को हैरान कर दिया है। बड़े बैनर और भारी-भरकम बजट वाली फिल्मों को कड़ी टक्कर देते हुए यह फिल्म अपने रिलीज के तीसरे हफ्ते में भी सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म की इस असाधारण सफलता का मुख्य श्रेय इसकी गहरी आध्यात्मिक कहानी और इसके शुद्ध देसी, माटी की खुशबू से सराबोर गानों को जाता है। शुरुआती दिन में महज 10 लाख रुपये की मामूली ओपनिंग के साथ बॉक्स ऑफिस पर खाता खोलने वाली इस फिल्म ने वर्ड ऑफ माउथ पब्लिसिटी के दम पर ऐसा गजब का कमबैक किया है कि आज हर तरफ इसी की चर्चा हो रही है।
फिल्म की लोकप्रियता और बॉक्स ऑफिस पर इसकी मजबूत पकड़ को देखते हुए इसके निर्माताओं ने इसके सीक्वल की घोषणा भी कर दी है, जिससे फैंस में उत्साह और अधिक बढ़ गया है। नीम करोली बाबा (Neem Karoli Baba) के अलौकिक जीवन और उनकी दिव्य लीलाओं पर आधारित इस बायोपिक फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए आयाम गढ़े हैं, बल्कि दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बना ली है। फिल्म का संगीत इसकी आत्मा है, और इसके एक अन्य लोकप्रिय गीत 'पार्वती' की तरह ही इसका दूसरा बुंदेली लोक शैली में गाया गया गाना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल रहा है। इंटरनेट की दुनिया में इस देसी गाने ने रील्स और शॉर्ट्स के जरिए धूम मचा रखी है, जिसे लोग बार-बार सुनना और शेयर करना पसंद कर रहे हैं।
लोकगायक साधु तिवारी की सुरीली आवाज और शुद्ध बुंदेली भाषा का अनोखा संगम
हम जिस लोकप्रिय गाने की बात कर रहे हैं, वह है फिल्म 'हनुमान अंश' का बेहद प्यारा और रूहानी गीत 'आवागमन'। इस अनूठे गाने को अपनी माटी से जुड़े प्रसिद्ध लोकगायक साधु तिवारी ने गाया है। खास बात यह है कि इस गीत के बोल लिखने के साथ-साथ इसे स्वरबद्ध भी साधु तिवारी ने ही किया है। गाने की सबसे बड़ी खूबी इसकी शुद्ध बुंदेली भाषा और ठेठ देसी अंदाज है, जो सुनने वाले के दिल और दिमाग पर सीधा असर छोड़ता है। जब यह गाना बजता है, तो श्रोता बुंदेलखंड की संस्कृति और उसकी मिट्टी की सोंधी महक में पूरी तरह से खो जाता है। गाने के बोल इतने सरल, सहज और भावपूर्ण हैं कि वे बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के सीधे इंसान के दिल में उतर जाते हैं।
इस गाने की पंक्तियाँ - "अब ना देर लगाओ देर, बस कृपा करो महादेव" - श्रोताओं के रोंगटे खड़े कर देती हैं। साधु तिवारी की दर्द भरी और सुरीली आवाज में गाया गया यह गीत न केवल कानों को तृप्त करता है, बल्कि आत्मा को भीतर तक झकझोर कर रख देता है। बुंदेली संस्कृति और लोक संगीत प्रेमियों के बीच इस गाने ने एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। आज के आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक संगीत के दौर में इस तरह के शुद्ध देसी और पारंपरिक लोक संगीत का वायरल होना इस बात का प्रमाण है कि आज भी देश की जनता अपनी जड़ों से जुड़ी रहना चाहती है और उसे ऐसे ही सच्चे, पारदर्शी और आत्मीय संगीत की तलाश रहती है।
जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति और भगवान शिव की आराधना का आध्यात्मिक संदेश
फिल्म 'हनुमान अंश' का यह बुंदेली गाना सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह जीवन के सबसे बड़े और गहरे दार्शनिक सत्यों का सार प्रस्तुत करता है। गाने के भीतर छिपे भावों को समझें तो यह स्पष्ट होता है कि इसमें भक्त की भगवान शिव के प्रति अगाध श्रद्धा और उनकी कृपा पाने की तीव्र लालसा को दर्शाया गया है। गाने के बोल इस बात का अहसास कराते हैं कि यह भौतिक संसार और दुनिया के तमाम रिश्ते-नाते एक छलावा मात्र हैं। 'आवागमन मिटा दे भोले शंकर' इस लाइन का सीधा और गहरा अर्थ यह है कि भक्त भगवान शिव से यह विनती कर रहा है कि हे भोलेनाथ! मुझे इस जन्म और मृत्यु के अंतहीन और कष्टदायक चक्र से हमेशा-हमेशा के लिए मुक्त कर दीजिए।
यह गीत एक साधारण भक्ति गीत से बढ़कर आत्मा की परमात्मा यानी भगवान शिव से मिलने की अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक पुकार बन जाता है। जीवन और मरण के बंधन से छूटकर मोक्ष प्राप्त करने की जो छटपटाहट इस गाने में महसूस होती है, वह श्रोता को ईश्वर की शरण में जाने के लिए मजबूर कर देती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव और मानसिक अशांति के दौर में इस तरह के आध्यात्मिक और दार्शनिक गाने लोगों को मानसिक शांति दे रहे हैं और उन्हें उनके जीवन का वास्तविक उद्देश्य याद दिला रहे हैं। यह गाना सिर्फ एक संगीत कृति नहीं, बल्कि इंसान को जीवन जीने का सही सलीका और सार सिखाने वाला एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक बन गया है।
नीम करोली बाबा के जीवन और चमत्कारों पर आधारित है निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की यह फिल्म
अगर बात करें फिल्म 'हनुमान अंश' की पटकथा और मूल कहानी की, तो यह एक बेहद प्रेरणादायक डिवोशनल ड्रामा फिल्म है। यह फिल्म महान आध्यात्मिक संत और दुनिया भर में पूजनीय नीम करोली बाबा के अलौकिक जीवन, उनके उपदेशों और उनके चमータतों को पर्दे पर बेहद खूबसूरती से उकेरती है। इस फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी हैं, जिन्होंने अपनी बहुचर्चित और लोकप्रिय किताब 'डिटूर: दैट चेंज्ड माय लाइफ' (Detour: That Changed My Life) के पन्नों से इस कहानी को निकालकर सिनेमा के परदे पर जीवंत किया है। किताब के मार्मिक प्रसंगों को जब बड़े पर्दे पर उतारा गया, तो उसने दर्शकों के दिलों को गहराई से छू लिया।
नीम करोली बाबा के आश्रम और उनके भक्तों की अटूट आस्था को जिस प्रामाणिकता के साथ इस फिल्म में दिखाया गया है, वह इसकी सबसे बड़ी यूएसपी है। छोटे बजट में बनी होने के बावजूद इस फिल्म ने यह साबित कर दिया है कि अगर कंटेंट दमदार हो और उसमें सच्ची श्रद्धा व भावनाओं का पुट हो, तो दर्शक उसे सिर आंखों पर बिठा लेते हैं। फिल्म की पूरी टीम की मेहनत और कलाकारों का सहज अभिनय इस बात का गवाह है कि भारतीय सिनेमा में अब आध्यात्मिक और वैचारिक कहानियों का एक नया और स्वर्णिम दौर शुरू हो चुका है, जिसे हर वर्ग के दर्शक द्वारा भरपूर प्यार मिल रहा है।