शांतिपूर्ण प्रदर्शन में नफरत का सामना: तनीषा मुखर्जी ने बयां किया अपना कड़वा अनुभव

शांतिपूर्ण प्रदर्शन में नफरत का सामना: तनीषा मुखर्जी ने बयां किया अपना कड़वा अनुभव

बॉलीवुड अभिनेत्री और काजोल की छोटी बहन तनीषा मुखर्जी अपनी बेबाक राय और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में एक सार्वजनिक बातचीत और इंटरव्यू के दौरान तनीषा मुखर्जी ने अपने जीवन के एक बेहद चौंकाने वाले और परेशान कर देने वाले वाकये का खुलासा किया है। तनीषा ने बताया कि कैसे एक सामाजिक और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन (Peaceful Protest) में हिस्सा लेने के दौरान उन्हें समाज के तथाकथित पढ़े-लिखे और 'एलीट' वर्ग की अंधी सांप्रदायिक नफरत का प्रत्यक्ष शिकार होना पड़ा। तनीषा का कहना है कि जब कोई अनपढ़ व्यक्ति कट्टरता दिखाता है तो समाज समझ सकता है, लेकिन जब समाज का सबसे समृद्ध, अंग्रेजीदां और संपन्न तबका बिना किसी तर्क के नफरत से भर जाता है, तो वह स्थिति बेहद डरावनी और निराशाजनक होती है। अभिनेत्री के इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया और बॉलीवुड के गलियारों में आधुनिक समाज में पनप रही वैचारिक असहिष्णुता को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

'यहां से जाइए, हमें आपकी जरूरत नहीं': एक पढ़ी-लिखी महिला ने किया था दुर्व्यवहार

तनीषा मुखर्जी ने उस घटना को याद करते हुए विस्तार से बताया कि वे समाज के एक जरूरी मुद्दे पर अपनी एकजुटता दिखाने और आम नागरिकों की आवाज बनने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हिस्सा बनने पहुंची थीं। वहां एक बेहद संभ्रांत दिखने वाली, डिजाइनर कपड़े पहने और धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने वाली महिला उनके पास आई। जैसे ही उस महिला ने तनीषा को देखा, उसके चेहरे के भाव पूरी तरह बदल गए। उसने बिना किसी वजह या बातचीत के तनीषा को बेहद आक्रामक लहजे में कहा, "आप यहां से तुरंत निकल जाइए, हमें यहां आपकी कोई जरूरत नहीं है।" जब तनीषा ने हैरान होकर उससे ऐसा कहने की वजह पूछी, तो उस महिला ने सीधे तौर पर धर्म और सांप्रदायिक विभाजन की बातें शुरू कर दीं और उन्हें हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखकर निशाना बनाना शुरू कर दिया। तनीषा उस महिला के व्यवहार और उसकी आंखों में भरी नफरत को देखकर पूरी तरह सन्न रह गईं।

'एलीट क्लास की ऐसी अंधी नफरत ने मुझे झकझोर कर रख दिया': तनीषा का छलका दर्द

इंटरव्यू में अपनी भावनाएं साझा करते हुए तनीषा ने कहा कि वह दृश्य उनके दिमाग में हमेशा के लिए चस्पा हो गया है। तनीषा ने कहा कि हम अक्सर यह मानकर चलते हैं कि अशिक्षा और गरीबी नफरत या विभाजन को जन्म देती है, लेकिन जब उन्होंने समाज के सर्वोच्च वर्ग की एक महिला को ऐसी ओछी मानसिकता का प्रदर्शन करते देखा, तो उनका दिल दहल गया। तनीषा ने कहा कि उस महिला के पास जीवन की सारी सुख-सुविधाएं, बेहतरीन शिक्षा और दौलत थी, लेकिन उसके दिल और दिमाग में इंसानों के लिए सिर्फ और सिर्फ जहर भरा था। तनीषा ने अफसोस जताते हुए कहा कि आज के दौर में कुछ लोग इतने संकीर्ण हो चुके हैं कि वे किसी व्यक्ति की नीयत, उसकी भलाई या उसके काम को देखने के बजाय सिर्फ उसका नाम और धर्म देखकर फैसले सुनाने लगते हैं। इस तरह की अंधी नफरत किसी भी सभ्य समाज के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है।

मिली-जुली संस्कृति और विविधता में पली-बढ़ी हैं तनीषा: परिवार का दिया हवाला

तनीषा मुखर्जी ने अपने पारिवारिक और सांस्कृतिक बैकग्राउंड का हवाला देते हुए बताया कि वे एक ऐसे परिवार से आती हैं जहां हमेशा धर्मनिरपेक्षता और इंसानियत को सबसे ऊपर रखा गया है। उनकी मां तनुजा और परिवार ने उन्हें हर धर्म, जाति और वर्ग के व्यक्ति का सम्मान करना सिखाया है। तनीषा ने कहा कि भारत की असली खूबसूरती उसकी विविधता, आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब में है। जब लोग उस खूबसूरती को भूलकर चंद राजनीतिक या नफरती एजेंडे के बहकावे में आकर एक-दूसरे के प्रति दुर्भावना पालने लगते हैं, तो इससे देश की आत्मा को चोट पहुंचती है। उन्होंने कहा कि एक कलाकार और नागरिक के तौर पर वे कभी भी समाज को बांटने वाली ताकतों के आगे नहीं झुकेंगी और हमेशा प्यार, एकता और शांति के पक्ष में अपनी आवाज उठाती रहेंगी।

सोशल मीडिया पर तनीषा के बयान का समर्थन: यूजर्स ने असहिष्णुता के खिलाफ आवाज

तनीषा मुखर्जी के इस बेबाक बयान के सामने आने के बाद इंटरनेट यूजर्स और उनके प्रशंसकों ने उनका खुलकर समर्थन किया है। कई लोगों ने कमेंट करते हुए लिखा कि तनीषा ने समाज की उस कड़वी हकीकत पर उंगली रखी है जिसे अक्सर सोफेस्टीकेशन और अंग्रेजी बोलने के पीछे छुपा लिया जाता है। लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया पर बढ़ती ध्रुवीकरण की भाषा अब असल जिंदगी में भी पढ़ी-लिखी आबादी के व्यवहार को प्रभावित करने लगी है। तनीषा के इस साहसिक बयान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सेलिब्रिटीज जब अपने मंच का इस्तेमाल समाज के अंधेरे कोनों को उजागर करने के लिए करते हैं, तो वह समाज को आत्ममंथन करने का एक जरूरी मौका देता है।