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April 05 2026 04:26 pm

CCL में कोयला तस्करी का खेल ED का बड़ा एक्शन, सुरक्षा प्रभारी समेत चार के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल

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News India Live, Digital Desk : झारखंड में अवैध कोयला खनन और तस्करी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपना शिकंजा और कस दिया है। ईडी की रांची जोनल यूनिट ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के सहायक सुरक्षा उप-निरीक्षक (ASI) संजीव कुमार सिंह और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने रांची स्थित विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट में संजीव कुमार सिंह समेत चार लोगों के खिलाफ अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल कर दी है। इस मामले ने सीसीएल प्रबंधन और कोयला बेल्ट में हड़कंप मचा दिया है।

पद का दुरुपयोग और रिश्वत का मायाजाल ईडी की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि रामगढ़ जिले के बड़का सयाल क्षेत्र में सुरक्षा प्रभारी के रूप में तैनात रहते हुए संजीव कुमार सिंह ने अपने पद का जमकर दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने कोयला खदानों से होने वाले कोयला परिवहन (Transport) में अनुचित लाभ देने के बदले ट्रांसपोर्टर राहुल कुमार से करीब 5 लाख रुपये की रिश्वत ली थी। यह रिश्वतखोरी कोई सामान्य लेनदेन नहीं थी, बल्कि इसे छिपाने के लिए बाकायदा बैंक खातों का नेटवर्क तैयार किया गया था।

पत्नी के खाते में आई रिश्वत, भाई ने 'खपाए' पैसे जांच एजेंसी के मुताबिक, रिश्वत की यह मोटी रकम सीधे संजीव की पत्नी पूनम देवी के एक्सिस बैंक खाते में जमा कराई गई थी। ईडी को पूनम देवी के खाते में 4.46 लाख रुपये के और भी संदिग्ध नकद जमा मिले हैं, जिनका वह कोई संतोषजनक स्रोत नहीं बता सकीं। इतना ही नहीं, इस 'काली कमाई' को सफेद करने के लिए संजीव के भाई गोपाल कुमार का सहारा लिया गया। पूनम के खाते से 4 लाख रुपये गोपाल के खाते में ट्रांसफर किए गए, जिसने महज सात दिनों के भीतर नकद निकासी और लोन की किश्तें (EMI) चुकाकर इस पैसे को पूरी तरह खपा दिया।

इन चार आरोपियों पर गिरी गाज विशेष अदालत में पेश की गई चार्जशीट में ईडी ने चार लोगों को मुख्य आरोपी बनाया है:

संजीव कुमार सिंह: तत्कालीन सहायक सुरक्षा उप-निरीक्षक, सीसीएल।

पूनम देवी: संजीव कुमार सिंह की पत्नी।

गोपाल कुमार: संजीव कुमार सिंह का भाई।

राहुल कुमार: कोयला ट्रांसपोर्टर (रिश्वत देने का आरोपी)।

कोयला बेल्ट में मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा नेटवर्क? ईडी अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या संजीव कुमार सिंह और उनके सहयोगियों ने इसी तरह अन्य ट्रांसपोर्टरों से भी अवैध उगाही की है। मनी लॉन्ड्रिंग के इस नेटवर्क के तार और भी अधिकारियों या रसूखदारों से जुड़े हो सकते हैं। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब आरोपियों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है, क्योंकि पीएमएलए कोर्ट में सुनवाई के दौरान अवैध संपत्ति की जब्ती की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है।