Drowning in Jharkhand : जब त्योहार की खुशियाँ मातम में बदल गईं, एक दोस्त को बचाने में चली गई चार मासूमों की जान
News India Live, Digital Desk: Drowning in Jharkhand : त्योहार... यानी खुशियों का दिन, जब पूरा गाँव एक साथ मिलकर जश्न मनाता है। झारखंड के दुमका में भी 'करमा पूजा' को लेकर ऐसा ही माहौल था, लेकिन किसे पता था कि यह हँसता-खेलता दिन एक झटके में चार परिवारों के लिए ज़िंदगी भर का मातम बन जाएगा। एक दर्दनाक हादसे में, चार मासूम दोस्त नदी में डूब गए और उनकी मौत हो गई।
क्या हुआ था उस मनहूस दोपहर?
यह दिल दहला देने वाली घटना दुमका के शिकारीपाड़ा ब्लॉक के मकरा-आसनसोल गाँव की है। 'करमा पूजा' के बाद, गाँव के कई लोग पास की ब्राह्मणी नदी में 'करम डाली' का विसर्जन करने गए थे। उन्हीं में ये चार दोस्त भी शामिल थे - सुनील मुर्मू, ओलसन मरांडी, सुशील मरांडी और सुभाष मरांडी। सभी की उम्र 13 से 14 साल के बीच थी, ज़िंदगी के सपनों को देखने की उम्र।
चारों दोस्त नदी के किनारे विसर्जन के बाद नहाने के लिए रुक गए। वे पानी में अठखेलियाँ कर रहे थे कि अचानक उनमें से एक गहरे पानी की तरफ चला गया और डूबने लगा।
दोस्ती की वो आखिरी कोशिश...
अपने दोस्त को डूबता देख, बाकी तीनों दोस्त बिना एक पल सोचे उसे बचाने के लिए कूद पड़े। वे यह नहीं जानते थे कि नदी का वह हिस्सा कितना गहरा और खतरनाक है। एक-दूसरे को बचाने की उस साहसी लेकिन नाकाम कोशिश में, चारों दोस्त एक-एक करके गहरे पानी में समा गए। दोस्ती निभाने का इससे बड़ा और दर्दनाक उदाहरण और क्या हो सकता है?
नदी के किनारे पसरा मातम
जब किनारे पर मौजूद लोगों को इस हादसे का पता चला, तो चीख-पुकार मच गई। गाँव वालों ने तुरंत नदी में उनकी तलाश शुरू कर दी। बाद में गोताखोरों की मदद से, घंटों की मशक्कत के बाद चारों दोस्तों के शवों को एक-एक कर नदी से बाहर निकाला गया।
जिस गाँव में सुबह त्योहार का जश्न था, शाम तक वहाँ सिर्फ़ सिसकियों और मातम का शोर था। एक साथ चार बच्चों की अर्थियाँ उठते देख हर किसी का दिल दहल गया। इस एक हादसे ने पूरे गाँव की खुशियाँ छीन ली हैं और चार परिवारों को कभी न भरने वाला ज़ख्म दे दिया है।