रोडवेज और प्राइवेट बसों से हटने जा रहे हैं ड्राइवर केबिन, हादसे टालने के लिए सरकार ने लिया ये कड़ा फैसला
News India Live, Digital Desk: अगर आप काम के सिलसिले में या घर जाने के लिए अक्सर लंबी दूरी की 'स्लीपर बसों' का सहारा लेते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। हम सब जानते हैं कि रात के सफर में स्लीपर बस में सोना काफी आरामदायक होता है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से इनमें कुछ ऐसी कमियां थीं जिन्हें अब तक नजरअंदाज किया जा रहा था।
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने यात्रियों की जान की हिफाजत को ध्यान में रखते हुए एक अहम फैसला लिया है। अब यूपी की सड़कों पर दौड़ने वाली स्लीपर बसों के अंदर से 'ड्राइवर केबिन' और सोने वाली सीटों पर लगे 'स्लाइडर' (कांच या लकड़ी के दरवाजे) हटा दिए जाएंगे।
आइए समझते हैं कि इस फैसले की जरूरत क्यों पड़ी और इससे आपको क्या फायदा होगा।
क्यों हटाया जा रहा है ड्राइवर केबिन? (Safety First)
अक्सर स्लीपर बसों में ड्राइवर के लिए एक अलग केबिन बना दिया जाता है। देखने में तो यह व्यवस्थित लगता है, लेकिन इमरजेंसी की स्थिति में, जैसे कि बस में आग लग जाए या अचानक कोई एक्सीडेंट हो जाए, यह केबिन एक बड़ी बाधा बन जाता है। केबिन होने की वजह से पीछे बैठे यात्रियों को आगे का रास्ता नहीं दिखता और वे समय रहते बाहर नहीं निकल पाते। सरकार का मानना है कि बस के अंदर 'ओपन लेआउट' होने से किसी भी अनहोनी के समय भगदड़ कम होगी और लोग आसानी से बाहर निकल सकेंगे।
स्लीपर सीट से 'स्लाइडर' हटाने की वजह
आपने देखा होगा कि प्राइवेसी के लिए कई बसों में सोने वाली सीटों (Sleeping Pods) के आगे स्लाइडिंग वाले दरवाजे लगे होते हैं। लोग इसे काफी पसंद करते हैं, लेकिन यही स्लाइडर जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। अगर बस का बैलेंस बिगड़ जाए या शीशे टूट जाएं, तो ये स्लाइडर जाम हो सकते हैं और पैसेंजर अपनी ही सीट के अंदर फंस सकता है। नई गाइडलाइन के मुताबिक, प्राइवेसी के लिए दरवाजों की जगह अब 'आग न पकड़ने वाले' (Fire Resistant) पर्दों का इस्तेमाल किया जा सकेगा, जो किसी भी खतरे के वक्त तुरंत हटाए जा सकते हैं।
रात के हादसों को रोकने की तैयारी
यूपी सरकार ने यह फैसला हाल के वर्षों में हुए कई दर्दनाक बस हादसों को ध्यान में रखकर लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, केबिन और बंद सीटों की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी होती है। अब बस के अंदर पर्याप्त रोशनी और हवा के आने-जाने के रास्ते को साफ रखा जाएगा।
बस मालिकों को क्या करना होगा?
बस संचालकों और मालिकों को साफ़ निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी बसों का रिन्यूअल कराने से पहले ये बदलाव सुनिश्चित करें। अगर बस में नियम के मुताबिक केबिन और स्लाइडर मौजूद मिले, तो उसे 'अनफिट' करार दिया जा सकता है।
चलते-चलते...
सफर में प्राइवेसी से ज्यादा ज़रूरी आपकी 'सुरक्षा' है। सरकार के इस कदम से हो सकता है कि शुरू में आपको थोड़ा अजीब लगे, लेकिन यह छोटे-छोटे बदलाव बड़े हादसों को टालने के लिए ही किए गए हैं। उम्मीद है कि यूपी सरकार का यह प्रयास उत्तर प्रदेश की सड़कों पर बस यात्रा को और अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बनाएगा।
अगली बार जब आप बस की टिकट बुक करें, तो इन नए नियमों को ध्यान में ज़रूर रखिएगा!