क्या आप जानते हैं यूपी का वो शहर जिसे कहते हैं 'पहलवानों का शहर'? यहाँ के अखाड़ों से निकलते हैं देश के शेर
उत्तर प्रदेश की पहचान सिर्फ़ ताजमहल, राम मंदिर या नवाबों के अंदाज़ से ही नहीं है। इस प्रदेश की मिट्टी में एक ऐसी कला भी बसती है जो ताक़त, धैर्य और सम्मान सिखाती है - और वो है 'कुश्ती'। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यूपी में एक ऐसा शहर भी है जिसे ख़ास तौर पर 'पहलवानों का शहर' (City of Wrestling) के नाम से जाना जाता है? ये वो जगह है जहाँ के अखाड़ों की मिट्टी में आज भी युवाओं के पसीने की महक और घी-दूध की ताक़त बसती है।
यह शहर है गोरखपुर।
जी हाँ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शहर गोरखपुर सिर्फ़ गोरखनाथ मंदिर के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी पहलवानी की सदियों पुरानी परंपरा के लिए भी पूरे देश में मशहूर है।
क्यों ख़ास है गोरखपुर की कुश्ती?
एक ज़माना था जब गोरखपुर और उसके आसपास के इलाक़ों में कुश्ती सिर्फ़ एक खेल नहीं, बल्कि जीने का एक तरीक़ा हुआ करती थी। हर गाँव में अखाड़े होते थे और दंगल का आयोजन किसी बड़े त्योहार से कम नहीं होता था। यहाँ के पहलवानों की ताक़त और दांव-पेंच के क़िस्से दूर-दूर तक सुनाए जाते थे।
हालाँकि आज के मॉडर्न ज़माने में कुश्ती का वो सुनहरा दौर थोड़ा धुंधला ज़रूर हुआ है, लेकिन गोरखपुर की मिट्टी ने आज भी इस परंपरा को ज़िंदा रखा है।
यहाँ से निकले हैं देश के नामी-गिरामी पहलवान
गोरखपुर की धरती ने देश को कई ऐसे पहलवान दिए हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। इनमें से कुछ बड़े नाम हैं:
- जनार्दन सिंह: इन्हें 'कुश्ती का द्रोणाचार्य' कहा जाता था। उन्होंने अपनी पहलवानी से तो नाम कमाया ही, साथ ही कई ऐसे शिष्य भी तैयार किए जो देश के लिए मेडल लेकर आए।
- पन्नेलाल यादव: ये भी गोरखपुर के एक महान पहलवान हुए, जिनके नाम से दूर-दूर के पहलवान काँपते थे।
- राममिलन पहलवान: इन्होंने भी अपनी ताक़त और कला से गोरखपुर का नाम बहुत ऊँचा किया।
आज भले ही बच्चे जिम और वीडियो गेम की दुनिया में खोए रहते हों, लेकिन गोरखपुर के ये अखाड़े और यहाँ के उस्तादों की मेहनत आज भी उस उम्मीद को ज़िंदा रखे हुए है कि एक दिन फिर इसी मिट्टी से कोई शेर निकलेगा जो दुनिया के मंच पर भारत का तिरंगा लहराएगा।