पाकिस्तान पर भरोसा नहीं! ईरान ने चली डिकॉय चाल, इस्लामाबाद पहुंचीं तीन फ्लाइट्स पर असली टीम किसमें?
News India Live, Digital Desk: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इस वक्त दुनिया का सबसे हाई-प्रोफाइल 'डिप्लोमैटिक ज़ोन' बनी हुई है। लेकिन इस बातचीत के शुरू होने से पहले ही ईरान ने अपनी सुरक्षा को लेकर ऐसी चाल चली है कि पाकिस्तान और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां भी हैरान रह गईं। खबरों के मुताबिक, ईरान ने इस्लामाबाद के लिए एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग विमान भेजे। इसे 'डिकॉय' (Decoy) तकनीक कहा जाता है, जिसका मकसद असली डेलिगेशन की पहचान को गुप्त रखना और संभावित हमले के खतरे को टालना है।
तीन विमान और एक 'सीक्रेट' डेलिगेशन
इस्लामाबाद के नूर खान एयरबेस पर जब ईरान के विमान उतरे, तो वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी भी असमंजस में पड़ गए। सूत्रों का दावा है कि ईरान को पाकिस्तान की जमीन पर अपनी टीम की सुरक्षा को लेकर गहरा अंदेशा था। यही वजह रही कि तीन एक जैसे दिखने वाले विमानों को अलग-अलग समय पर रवाना किया गया। इनमें से केवल एक विमान में ईरान के वरिष्ठ नेता मोहम्मद बागेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची सवार थे, जबकि बाकी दो विमान 'डमी' के तौर पर सुरक्षा घेरा बनाने के लिए भेजे गए थे।
पाकिस्तान की जमीन और ईरान का अविश्वास
ईरान द्वारा इस तरह की रणनीति अपनाना पाकिस्तान के लिए किसी झटके से कम नहीं है। हालांकि पाकिस्तान ने ईरानी डेलिगेशन को हवाई सुरक्षा (Aerial Escort) देने के लिए अपने लड़ाकू विमान और 'अवाक्स' (AWACS) तैनात किए थे, लेकिन ईरान ने अपनी निजी सुरक्षा प्रोटोकॉल को ही प्राथमिकता दी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान को डर था कि पाकिस्तान के भीतर सक्रिय चरमपंथी गुट या बाहरी खुफिया एजेंसियां इस हाई-प्रोफाइल मिशन को निशाना बना सकती हैं। यह घटनाक्रम दिखाता है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक नजदीकियों के बावजूद 'विश्वास' की भारी कमी है।
ट्रंप की डेडलाइन और जेडी वेंस की मौजूदगी
एक तरफ ईरान अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी है कि ईरान को शांति की मेज पर झुकना ही होगा। ट्रंप की टीम में स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर जैसे कद्दावर चेहरे शामिल हैं, जो ईरान पर 'मैक्सिमम प्रेशर' बनाने की रणनीति लेकर आए हैं। अब देखना यह होगा कि डिकॉय विमानों के जरिए इस्लामाबाद पहुंचे ईरानी नेता, अमेरिका की कड़ी शर्तों के सामने कितना टिक पाते हैं।