शोक में डूबे इंसान से भूलकर भी न कहें ये बातें सांत्वना देने के बजाय जख्म कुरेद देते हैं ये शब्द
News India Live, Digital Desk : ज़िंदगी में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब हमारे किसी करीबी, दोस्त या रिश्तेदार के घर में किसी की मृत्यु हो जाती है। वो वक्त बहुत नाज़ुक होता है। हम सांत्वना देने (Condolence) जाते हैं, हमारे मन में हमदर्दी भी होती है, लेकिन कई बार अनजाने में हमारी जुबान से कुछ ऐसे शब्द निकल जाते हैं जो सामने वाले के दुख को कम करने के बजाय और बढ़ा देते हैं।
हम अक्सर फिलॉसफी झाड़ने लगते हैं या चुप कराने की कोशिश करते हैं, जो उस समय कतई सही नहीं होता। आइये, बहुत संवेदनशीलता के साथ समझते हैं कि किसी के निधन पर जाते समय किन बातों को बोलने से बचना चाहिए।
1. "जो होता है, अच्छे के लिए होता है"
प्लीज! ये लाइन भूलकर भी मत बोलिएगा। जब किसी ने अपने पिता, बच्चे या साथी को खोया हो, तो उनके लिए इसमें कुछ भी "अच्छा" नहीं हो सकता। यह बात उन्हें यह महसूस करा सकती है कि आप उनके दुख की अहमियत ही नहीं समझ रहे। उस वक्त कोई भी दलील या दर्शन शास्त्र काम नहीं आता, सिर्फ़ आपका मौन साथ खड़ा रहना ही काफी है।
2. "मैं तुम्हारा दर्द समझ सकता हूँ"
सच्चाई यह है कि आप नहीं समझ सकते। भले ही आपके साथ भी ऐसा हुआ हो, लेकिन हर इंसान का रिश्ता और दुख को महसूस करने का तरीका अलग होता है। यह कहने के बजाय कि "मुझे पता है तुम पर क्या बीत रही है," बेहतर है कि आप कहें, "मैं सोच भी नहीं सकता कि यह वक्त तुम्हारे लिए कितना मुश्किल है।" यह ज्यादा ईमानदारी भरा लगता है।
3. "कम से कम उन्होंने लंबी उम्र तो जी"
कभी-कभी हम उम्र का हवाला देकर दुख कम करने की कोशिश करते हैं। लेकिन याद रखिये, जाने वाला चाहे 80 साल का हो या 8 साल का—उसे खोने का गम परिवार के लिए एक जैसा ही होता है। उम्र का वास्ता देकर उनके आंसुओं को कमतर आंकना, उनकी भावनाओं का अपमान करने जैसा लग सकता है।
4. "अब रोना बंद करो, तुम्हें मजबूत बनना होगा"
शोक सभा में हम अक्सर लोगों को चुप कराते दिखते हैं। यह गलत है। रोना कमजोरी की निशानी नहीं, बल्कि गुबार बाहर निकालने का तरीका है। उन्हें रोने दीजिये। उन्हें जबरदस्ती 'मजबूत' बनने की सलाह मत दीजिये। उस वक्त टूट जाना सामान्य मानवीय व्यवहार है। उन्हें बस यह अहसास दिलाइये कि "रो लो, हम यहाँ हैं।"
5. "अब आगे का क्या सोचा है?"
अंतिम संस्कार या चौथे की रस्म पर लोग भविष्य की चिंता जताने लगते हैं। "अब घर कैसे चलेगा?" या "शादी कैसे होगी?"—ये सवाल उस भारी माहौल के लिए नहीं हैं। उन्हें अभी सिर्फ़ दुख से निपटने दीजिये, दुनियादारी की बातें बाद में भी हो सकती हैं।
तो क्या कहें?
कभी-कभी सबसे अच्छा शब्द होता है खामोशी। बस उनके पास बैठें, अगर वे हाथ थामना चाहें तो थामें और सिर्फ़ इतना कहें "हम तुम्हारे साथ हैं।" यही काफी है।