अमेरिका से मिली मायूसी, ईरान के लोग बोले ट्रंप ने हमारी उम्मीदों का सौदा कर लिया

Post

News India Live, Digital Desk : ऐसा ही कुछ हुआ है ईरान के उन आम नागरिकों के साथ जो अपने देश में आजादी चाहते हैं। आपको याद होगा कि जब डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में थे, तो उन्होंने ईरान की सरकार पर बहुत सख्त प्रतिबंध (Sanctions) लगाए थे। उन्होंने "मैक्सिमम प्रेशर" की नीति अपनाई थी। ईरान के जो लोग वहां के 'धार्मिक शासन' (Regime) से तंग आ चुके थे, उन्हें लगता था कि ट्रंप उनके लिए मसीहा हैं और वो ईरान में सरकार गिराने में मदद करेंगे।

लेकिन अब कहानी पूरी तरह पलट गई है और ईरान के लोगों का दिल टूट गया है।

आखिर ऐसा क्या कह दिया ट्रंप ने?
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान दिया जिसमें उन्होंने साफ कहा कि वे "ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) नहीं चाहते।" ट्रंप ने इशारा किया कि वे ईरान के साथ कोई नई "डील" (समझौता) करना चाहते हैं, न कि वहां की सरकार को गिराना।

बस यही वो बात थी जिसने ईरान के विद्रोहियों को नाराज कर दिया।

"हमें बेवकूफ बनाया गया"
जो लोग कल तक ट्रंप के पोस्टर लेकर उनका समर्थन कर रहे थे, आज वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ट्रंप ने उन्हें धोखा दिया है। उनका मानना है कि ट्रंप ने चुनाव जीतने के लिए ईरान के मुद्दे का इस्तेमाल किया, लेकिन अब वे सिर्फ बिजनेस और डील की बातें कर रहे हैं।

एक प्रदर्शनकारी ने तो सोशल मीडिया पर यहां तक लिख दिया कि, "ट्रंप ने हमें दुनिया के सामने बेवकूफ बना दिया। हमने सोचा था वो हमारे दर्द को समझते हैं, लेकिन वो भी बाकी नेताओं जैसे ही निकले।"

ट्रंप का 'बिजनेस माइंड'
जानकारों का कहना है कि ट्रंप असल में एक बिजनेसमैन हैं। उन्हें जंग लड़ने से ज्यादा सौदेबाजी करना पसंद है। शायद उन्हें लगता है कि ईरान की सरकार को डरा-धमका कर अपनी शर्तों पर कोई नया परमाणु समझौता (Nuclear Deal) साइन करवाना ज्यादा फायदे का सौदा है, बजाय इसके कि वहां की सरकार गिराने में अमेरिका का पैसा और ताकत खर्च की जाए।

लेकिन इस सियासी खेल में पिस रही है वहां की आम जनता, जो अब अकेला महसूस कर रही है। उन्हें लग रहा है कि अब उनकी आजादी की लड़ाई उन्हें अकेले ही लड़नी पड़ेगी, अमेरिका या ट्रंप के भरोसे नहीं।