नल से पानी नहीं, बीमारियां आ रही हैं? लखनऊ के उदयगंज में गंदे पानी की प्यास ने लोगों को किया बेहाल
News India Live, Digital Desk : कल्पना कीजिये कि आप सुबह उठें और प्यास बुझाने के लिए नल खोलें, लेकिन वहां से पानी के बजाय बदबूदार और काला लिक्विड निकलने लगे? सुनकर ही घबराहट होती है न? लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के उदयगंज (Udayganj) इलाके में रहने वाले सैकड़ों परिवारों के लिए यह कोई डरावना सपना नहीं, बल्कि कड़वी हकीकत बन चुका है।
यहाँ के लोग पिछले कई दिनों से गंदे पानी की समस्या (Lucknow me gande pani ki samasya) से इस कदर परेशान हैं कि उनका जीना मुहाल हो गया है। ऐसा नहीं है कि पानी आता नहीं है, पानी तो आता है, लेकिन उसे पीना तो दूर, हाथ-पैर धोना भी किसी बड़ी रिस्क से कम नहीं है। बाल्टियों में जब लोग पानी भरते हैं, तो वह मिट्टी जैसा पीला और दुर्गंध भरा होता है।
बीमार होने का डर और प्रशासन की चुप्पी
उदयगंज के घरों में अब बातचीत सिर्फ एक ही मुद्दे पर होती है आज पानी कैसा आया?" मोहल्ले के बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि अगर ऐसा ही रहा तो जल्द ही इलाके में हैजा, टाइफाइड और त्वचा की बीमारियाँ फैलने लगेंगी। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह सबसे ज्यादा खतरनाक है। लोग डरे हुए हैं, लेकिन 'जल कल विभाग' की नींद शायद अभी टूटी नहीं है। स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत की, अधिकारियों के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार सिवाय कोरे आश्वासनों के कुछ हाथ नहीं लगा।
जेब पर पड़ रहा है दोगुना असर
एक तरफ सरकार हर घर नल से जल की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ यहाँ के लोगों को पीने के साफ पानी के लिए अलग से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। मजबूरी में लोगों को पानी के कैन मंगवाने पड़ रहे हैं या फिर दूर-दराज के हैंडपंपों से बाल्टियाँ ढोकर लानी पड़ रही हैं। मज़े की बात देखिये, पानी इतना गंदा है कि कपड़े धोने पर भी दाग पड़ जा रहे हैं, लेकिन नगर निगम के 'वाटर टैक्स' का बिल समय पर पहुँच जाता है।
अब बस बहुत हो गया!
उदयगंज के निवासियों का कहना है कि अब पानी सिर के ऊपर से जा चुका है। Jal Kal Vibhag Lucknow के चक्कर लगा-लगाकर वे थक गए हैं। अब इलाकावासियों ने तय कर लिया है कि अगर जल्द ही पाइप लाइनों की मरम्मत नहीं हुई और उन्हें साफ़ पीने लायक पानी (Udayganj clean water crisis) नहीं मिला, तो वे बड़ा विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरेंगे।
सच तो यह है कि पानी कोई लग्जरी नहीं, इंसान का मूलभूत हक है। प्रशासन को ये समझना होगा कि जब तक समाधान धरातल पर न दिखे, फ़ाइलों वाली शिकायतों का कोई मोल नहीं है।