रैंक 15 लाकर भी नहीं मिला सुकून मोहम्मद शाकिब ने दोबारा दी परीक्षा और बन गए देश के नंबर 1 इंजीनियर

Post

News India Live, Digital Desk : अक्सर सरकारी नौकरी का एक छोटा सा लेटर मिलते ही हम मान लेते हैं कि "बस, लाइफ सेट हो गई"। लेकिन जिनमें कुछ अलग करने की आग होती है, वो 'सेट' होने के लिए नहीं, बल्कि 'बेस्ट' बनने के लिए लड़ते हैं। उत्तर प्रदेश के बहराइच (Bahraich) जिले के रहने वाले मोहम्मद शाकिब (Mohammad Shaquib) की कहानी बिल्कुल ऐसी ही है, जो आपको यह सोचने पर मजबूर कर देगी कि "क्या मैं अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर रहा हूँ?"

हाल ही में आए UPSC इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा (ESE) के नतीजों में शाकिब ने पूरे भारत में पहली रैंक (All India Rank 1) हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन कर दिया है। लेकिन रुकिए, यह उनकी पहली सफलता नहीं थी, और यहीं इस कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट है।

रैंक 15 से रैंक 1 का 'जिद्दी' सफर
आपको जानकर हैरानी होगी कि शाकिब ने पिछली बार (2024 की परीक्षा में) भी झंडे गाड़े थे। तब उनकी All India Rank 15 आई थी। इतनी शानदार रैंक पर उन्हें केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) जैसा बड़ा विभाग भी मिल गया था। कोई और होता तो खुश होकर कुर्सी संभाल लेता, लेकिन शाकिब को वो 'कमी' खटक रही थी। उन्हें 'टॉप' करना था, उन्हें अपनी पसंद की सर्विस चाहिए थी।

इसी जिद्द ने उन्हें दोबारा किताबों की तरफ मोड़ा। ट्रेनिंग के साथ-साथ पढ़ाई की और आज नतीजा सबके सामने है—अब वो AIR-1 हैं।

बचपन में 'कमजोर', अब देश के 'सुपर इंजीनियर'
शाकिब की कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि एक वक्त था जब वो पढ़ाई में बहुत औसत थे। उनके पिता शकील अहमद, जो बहराइच में एक आढ़ती (व्यापारी) हैं, बताते हैं, "बचपन में शाकिब पढ़ाई में थोड़ा कमजोर था। हमें डर लगता था, लेकिन मैंने कभी उसे टूटने नहीं दिया। मैं हमेशा उसे कहता था कि बेटा तुम कर सकते हो।"
पिता का यही भरोसा शाकिब की ताकत बना। पहले उन्होंने IIT पटना (IIT Patna) से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया और फिर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC ESE को फतह किया।

सक्सेस मंत्र: सोशल मीडिया से 'ब्रेकअप'
आज के युवाओं के लिए शाकिब की एक बात बहुत बड़ा सबक है। उन्होंने बताया कि टॉप करने के लिए उन्होंने सबसे पहले अपने फ़ोन से इंस्टाग्राम (Instagram) और फेसबुक जैसे ऐप्स डिलीट किए।

शाकिब का कहना है, "मैंने करीब डेढ़ साल (18 महीने) तक सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। मेरा पूरा फोकस सिर्फ रिविज़न और अपनी कमियों को सुधारने पर था।"

IIT से UPSC तक का रास्ता
शाकिब ने अपनी पढ़ाई की शुरुआत बहराइच के एक छोटे से स्कूल (सेंट नॉर्बर्ट स्कूल) से की थी। इसके बाद 12वीं लखनऊ से की और फिर IIT की तैयारी के लिए कोटा गए। उनकी सफलता यह बताती है कि अगर इरादे पक्के हों, तो आप छोटे शहर से हैं या बड़े महानगर से, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

फिलहाल, शाकिब की इस बड़ी जीत पर उनके घर "मन्नत" (शाकिब के घर का नाम) पर जश्न का माहौल है। वो अब उन सभी छात्रों के लिए मिसाल हैं जो अपनी मौजूदा सफलता से खुश होकर रुक जाते हैं।